जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों की घोषणा का राजनीतिक दलों ने स्वागत किया
जितेंद्र सुरेश
- 16 Aug 2024, 07:39 PM
- Updated: 07:39 PM
श्रीनगर/जम्मू, 16 अगस्त (भाषा) विभिन्न राजनीतिक दलों ने जम्मू-कश्मीर में 18 सितंबर से तीन चरणों में शुरू होने वाले विधानसभा चुनावों की घोषणा का पार्टी लाइन से हटकर शुक्रवार को स्वागत किया और कहा कि जनता छह वर्ष के केंद्रीय शासन के बाद इस केंद्र शासित प्रदेश में लोकतंत्र की बहाली का बेसब्री से इंतजार कर रही थी।
नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां), कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) सहित लगभग सभी दलों ने निर्वाचन आयोग को धन्यवाद दिया और कहा कि चुनाव की घोषणा ने उच्चतम न्यायालय की सर्वोच्चता को बनाए रखा है।
शीर्ष अदालत ने जम्मू-कश्मीर में बहुप्रतीक्षित विधानसभा चुनाव कराने के लिए 30 सितंबर की समय सीमा तय की थी।
आयोग ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव तीन चरणों में- 18 सितंबर, 25 सितंबर और एक अक्टूबर को होंगे और मतगणना चार अक्टूबर को होगी।
नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आयोग की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए इस कदम को ‘देर आए दुरुस्त आए’ करार दिया।
अब्दुल्ला ने श्रीनगर में संवाददाताओं से कहा, “निर्वाचन आयोग ने कुछ समय पहले जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा की है। जम्मू-कश्मीर के लोग लंबे समय से इस दिन का इंतजार कर रहे थे। देर आए दुरुस्त आए।”
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि 1987-88 के चुनावों के बाद शायद यह पहली बार है कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव इतने कम समय में और कुछ ही चरणों में हो रहे हैं।
उन्होंने कहा, “यह राजनीतिक दलों के लिए निश्चित रूप से एक नया प्रयोग होगा, लेकिन जहां तक हमारी पार्टी का सवाल है, नेशनल कॉन्फ्रेंस इस दिन के लिए तैयार थी और जल्द ही चुनाव प्रचार शुरू करेगी।”
अब्दुल्ला ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने जम्मू-कश्मीर में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने पर जोर दिया। अब्दुल्ला ने आयोग द्वारा पिछले 24 घंटों में इस केंद्र शासित प्रदेश में पुलिस और नागरिक प्रशासन में बड़े पैमाने पर तबादले किये जाने का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा, “हमें शक है कि यह सरकार भाजपा और उसकी बी, सी और डी टीमों की मदद कर रही है। आयोग को तुरंत इस पर ध्यान देना चाहिए और उनकी जांच करनी चाहिए तथा उन तबादलों को रोकना चाहिए, जो उनके दिशा-निर्देशों के दायरे से बाहर हैं।”
कांग्रेस प्रदेश कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रविंदर शर्मा ने भी मुख्य निर्वाचन आयुक्त की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “देर आए दुरुस्त आए।”
उन्होंने कहा कि जून 2018 में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी)-भाजपा सरकार के गिरने के बाद पिछले छह वर्षों से जम्मू-कश्मीर के लोग विधानसभा चुनावों का इंतजार कर रहे थे।
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता की भी भूमिका निभा रहे शर्मा ने कहा, “हालांकि हम विधानसभा चुनाव से पहले पूर्ण राज्य का दर्जा दिये जाने के लिए दबाव बना रहे थे, लेकिन निर्वाचन आयोग की घोषणा एक स्वागत योग्य कदम है और हमें उम्मीद है कि आयोग बिना किसी भेदभाव के समान अवसर तथा पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।”
उन्होंने उम्मीद जताई कि आयोग चुनावों की घोषणा के दिन केंद्र शासित प्रदेश में पुलिस और नागरिक प्रशासन में किए गए बड़े पैमाने पर फेरबदल पर भी गौर करेगा।
कांग्रेस नेता ने कहा, “अनावश्यक किसी का तबादला नहीं होना चाहिए और अगर ऐसा कुछ हुआ है तो आयोग को उचित कार्रवाई करनी चाहिए।”
माकपा के वरिष्ठ नेता एमवाई तारिगामी ने भी जम्मू-कश्मीर में चुनाव की घोषणा का स्वागत किया।
तारिगामी ने कहा, “लंबे समय के बाद निर्वाचन आयोग ने विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा की, जो एक स्वागत योग्य कदम है। हम आयोग के उस बयान का भी स्वागत करते हैं, जिसमें सभी दलों और उम्मीदवारों के लिए समान अवसर सुनिश्चित कर पूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया बरकरार रखने तथा उम्मीदवारों व मतदाताओं के लिए पर्याप्त सुरक्षा भी सुनिश्चित करने की बात कही गयी है।”
भाजपा की जम्मू-कश्मीर इकाई के अध्यक्ष रविंदर रैना ने कहा, “हम जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की घोषणा के लिए निर्वाचन आयोग के बहुत आभारी हैं।”
वहीं भाजपा के मीडिया प्रभारी प्रदीप मल्होत्रा ने कहा कि पार्टी चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार है और उन्होंने जनता से आगामी चुनावों में पूरे उत्साह से भाग लेने का अनुरोध किया।
मल्होत्रा ने उम्मीद जताई कि चुनाव शांतिपूर्ण और हिंसा-मुक्त होंगे।
भाषा जितेंद्र