स्वास्थ्य व्यवसायों पर केंद्रीय कानून का क्रियान्वयन न होने से न्यायालय चिंतित
प्रशांत सुरेश
- 12 Aug 2024, 08:53 PM
- Updated: 08:53 PM
नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने स्वास्थ्य देखभाल से संबद्ध व्यवसायों पर 2021 के केंद्रीय कानून को क्रियान्वित न किये जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए सोमवार को केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा कि वे 12 अक्टूबर तक अधिनियम का अनुपालन सुनिश्चित करें, अन्यथा दंडात्मक कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहें।
न्यायालय ने पिछले साल सितंबर में एक जनहित याचिका पर केंद्र, सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर ‘‘राष्ट्रीय सहबद्ध और स्वास्थ्य देखरेख वृत्ति आयोग (एनसीएएचपी) अधिनियम, 2021’’ के कार्यान्वयन न होने पर नाखुशी व्यक्त की थी।
एनसीएएचपी अधिनियम देश में संबद्ध एवं स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों द्वारा “शिक्षा और सेवाओं के मानकों के विनियमन एवं रखरखाव, संस्थाओं के मूल्यांकन, सहयोगी स्वास्थ्य देखभाल व्यवसायों के केन्द्रीय रजिस्टर और राज्य रजिस्टर के रखरखाव” का प्रावधान करता है।
यह कानून 2021 तक उन सभी संबद्ध स्वास्थ्य देखभाल व्यवसायों के लिए नियामक निकायों और राज्य-स्तरीय परिषदों की स्थापना का आदेश देता है, जो राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग, भारतीय दंत चिकित्सा परिषद और अन्य नियामक निकायों द्वारा शासित और कवर नहीं किए जाते हैं।
इस अधिनियम में स्वास्थ्य देखभाल व्यवसाय और चिकित्सा प्रयोगशाला एवं जीवन विज्ञान, अभिघात, बर्न केयर, तथा शल्य चिकित्सा/एनेस्थीसिया संबंधी प्रौद्योगिकी, फिजियोथेरेपी आदि के पेशेवर शामिल हैं।
प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने आदेश दिया, “हम केंद्र और राज्यों को दो महीने के भीतर अधिनियम को लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश देते हैं; साथ ही, स्वास्थ्य मंत्रालय दो सप्ताह के भीतर अधिनियम को लागू करने के लिए खाका तैयार करने के वास्ते स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के सभी राज्य सचिवों की ऑनलाइन बैठक आयोजित करेगा।”
पीठ ने चेतावनी देते हुए कहा कि अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने में विफलता पर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। पीठ ने कहा, “सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा बुनियादी ढांचे की स्थापना की जानी है और प्रावधानों को अक्षरशः लागू किया जाना चाहिए।”
इसने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई की तारीख से पहले केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव के समक्ष सारिणीबद्ध प्रारूप में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
पीठ ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी से दो सप्ताह के भीतर जनहित याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा।
पीठ भारतीय चिकित्सा प्रौद्योगिकीविदों के संयुक्त मंच (जेएफएमटीआई) की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
शुरुआत में, पीठ ने कहा कि कानून 25 मई, 2021 को अस्तित्व में आया और इस तथ्य के बावजूद कि पिछले साल सितंबर में उसे नोटिस जारी किया गया था, केंद्र द्वारा कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया।
पीठ ने कहा, “सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से केवल 14 राज्यों ने अधिनियम के तहत राज्य परिषदों का गठन किया है। (याचिका में) यह आग्रह किया गया है कि उपरोक्त राज्य परिषदें भी कार्यात्मक नहीं हैं।”
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