बंगाल: माकपा के दिग्गज नेता बुद्धदेव भट्टाचार्य को नम आंखों से दी गयी अंतिम विदाई
अमित संतोष
- 09 Aug 2024, 09:12 PM
- Updated: 09:12 PM
कोलकाता, नौ अगस्त (भाषा) कोलकाता में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के प्रदेश मुख्यालय में शुक्रवार को हजारों लोगों ने लंबी कतार में खड़े होकर पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को अंतिम श्रद्धांजलि दी।
शोक व्यक्त करने वालों में से कई पार्टी समर्थक थे, वहीं कुछ ऐसे भी थे जो मार्क्सवादी विचारधारा को नहीं मानते, लेकिन ऐसे व्यक्ति के प्रति सम्मान प्रकट करने आए थे जिसे उनकी "सादगी और साफगोई" के लिए जाना जाता था।
मार्क्सवादी नेता बुद्धदेव भट्टाचार्य का बृहस्पतिवार को यहां उनके निवास पर 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। भट्टाचार्य को साम्यवादी विचारधारा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और राज्य के औद्योगिकीकरण के लिए उनके व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए याद किया जाएगा।
शोक संतप्त लोगों में से कुछ ने नम आंखों से जबकि कइयों ने मुट्ठी बांधकर ‘लाल सलाम’ के जरिये भट्टाचार्य को श्रद्धांजलि दी। इनमें कई लोग भट्टाचार्य की तस्वीरें भी लिए हुए थे।
भट्टाचार्य के पार्थिव शरीर को पार्टी के लाल झंडे में लपेटकर माकपा के प्रदेश मुख्यालय में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। भट्टाचार्य के पार्थिव शरीर को कांच के एक ताबूत में रखा गया था जिसके चारों ओर फूल रखे हुए थे।
माकपा के वरिष्ठ सदस्यों के साथ-साथ अनुभवी नेताओं से लेकर युवा नेताओं ने भट्टाचार्य को श्रद्धांजलि दी। भीड़ में ऐसे लोग भी शामिल थे, जो भट्टाचार्य की उद्योग समर्थक नीतियों से प्रभावित थे जिसने उनके कार्यकाल के दौरान पश्चिम बंगाल में महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन को आकार दिया था।
पार्टी मुख्यालय पर मौजूद लोगों ने भट्टाचार्य को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और औद्योगिक विकास में सुधार के दिशा में उनके प्रयासों को याद किया और बताया कि कैसे उनके दृष्टिकोण ने भविष्य की प्रगति के लिए आधार तैयार किया था।
विधि छात्र एवं एसएफआई समर्थक अयान देबनाथ (23) ने कहा, "जिस व्यक्ति ने हमें सपने देखना सिखाया, वह हमारे बीच नहीं है, लेकिन यह बेहतर बंगाल के उनके सपने को पूरा करने की शपथ लेने का दिन है।"
देबनाथ शांतिपुर से आए थे, जो अलीमुद्दीन स्ट्रीट से 100 किलोमीटर दूर है, जहां मध्य कोलकाता में माकपा का प्रदेश मुख्यालय स्थित है।
उत्तरी कोलकाता के श्यामपुकुर निवासी अर्पिता दास ने खुद को एक गैर-राजनीतिक व्यक्ति बताया। वह दो घंटे से अधिक समय तक एक किलोमीटर से अधिक लंबी कतार में धैर्यपूर्वक खड़ी रहीं। उन्होंने कहा कि वे दिवंगत नेता के प्रति सम्मान के कारण उन्हें अंतिम विदाई देने आई हैं, क्योंकि वे बंगाल का विकास करना चाहते थे।
दास ने कहा, "मैं उनके व्यक्तित्व और सादगी की प्रशंसा करती हूं, उनके जैसा कोई दूसरा व्यक्ति नहीं होगा।"
माकपा के दिग्गज नेता भट्टाचार्य राज्य के औद्योगिकीकरण के प्रयासों के लिए जाने जाते थे, एक ऐसा प्रयास जिसने, उनके बेहतरीन इरादों के बावजूद, अंततः भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के कारण 34 साल के निर्बाध शासन के बाद वाम मोर्चा सरकार को सत्ता से हटा दिया।
दक्षिण कोलकाता के यादवपुर से माकपा समर्थक अमिता रॉय चौधरी ने कहा कि भट्टाचार्य एक "ईमानदार नेता थे जो मुखर भी थे।"
उत्तर 24 परगना जिले के दमदम निवासी अनिंद्य मुखर्जी ने भी कतार में खड़े होकर कहा कि वह राजनीति से जुड़े नहीं हैं, लेकिन भट्टाचार्य को अंतिम श्रद्धांजलि देने आए हैं क्योंकि वह माकपा नेता की सरल जीवनशैली और सुसंस्कृत व्यवहार के प्रशंसक थे।
उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी से ताल्लुक रखने वाली और कलकत्ता विश्वविद्यालय में दक्षिण पूर्व एशियाई अध्ययन की स्नातकोत्तर छात्रा अदिति चक्रवर्ती ने कहा कि भट्टाचार्य की राजनीति का तरीका उनके लिए माकपा की छात्र शाखा एसएफआई में शामिल होने की प्रेरणा थी।
इस बीच 'अमर रहे' और 'लाल सलाम कॉमरेड' के नारों के बीच भट्टाचार्य का पार्थिव शरीर शुक्रवार शाम चिकित्सा अनुसंधान के लिए एनआरएस अस्पताल के एनाटॉमी विभाग को सौंप दिया गया।
फूलों से सजे शव वाहन के अस्पताल परिसर में प्रवेश करने और एनाटॉमी विभाग के पास रुकने के पहले सैकड़ों शोक संतप्त लोग वाहन के पीछे-पीछे चल रहे थे।
शाम करीब 5.30 बजे भट्टाचार्य के पार्थिव शरीर को पार्टी कार्यकर्ताओं, समर्थकों और नेताओं द्वारा विभाग के अंदर ले जाया गया।
माकपा नेता सुजान चक्रवर्ती, सूर्यकांत मिश्रा, रबिन देव और दिवंगत भट्टाचार्य की बेटी सुचेतना भट्टाचार्य परिसर में मौजूद थीं।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता शांतनु सेन और कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के उप महापौर अतिन घोष सहित सत्तारूढ़ पार्टी के अन्य नेता भी श्रद्धांजलि देने और शव सौंपने की प्रक्रिया में सहायता करने के लिए मौजूद थे।
एनाटॉमी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर अभिजीत भक्त ने अस्पताल की ओर से पार्थिव शरीर प्राप्त किया।
विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि शव को भविष्य में चिकित्सा अनुसंधान के लिए सुरक्षित रखा जाएगा।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के सदस्य और डॉक्टर शांतनु सेन ने कहा, "बुद्धदेव भट्टाचार्य का शव उनकी और उनके परिवार की इच्छा के अनुसार चिकित्सा अनुसंधान के लिए दान कर दिया गया है। शव सौंपने की पूरी प्रक्रिया सुचारु रूप से संपन्न हुई।"
भाषा अमित