न्यायालय से जमानत मिलने के बाद फिर ‘एक्शन’ में नजर आएंगे केजरीवाल के भरोसेमंद मनीष सिसोदिया
प्रशांत संतोष
- 09 Aug 2024, 08:41 PM
- Updated: 08:41 PM
नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े भ्रष्टाचार और धन शोधन के मामलों में आम आदमी पार्टी (आप) प्रमुख अरविंद केजरीवल के विश्वस्त सहयोगी मनीष सिसोदिया शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय से जमानत मिलने के बाद एक बार फिर से सक्रिय भूमिका में नजर आएंगे।
करीब 17 महीने की कैद के बाद सिसोदिया तिहाड़ जेल से बाहर आए और पार्टी को कई झटकों के बीच एक नया बल दिया।
सात बार खारिज हो चुकी याचिकाओं के बाद आम आदमी पार्टी द्वारा अपने नेता को देरी से सुनवाई का हवाला देते हुए जेल से बाहर निकालने का यह आठवां प्रयास था। 26 फरवरी, 2023 को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा उनकी गिरफ्तारी के बाद से उन्हें अंतरिम जमानत नहीं दी गई थी।
सिसोदिया (52) को पिछले साल अदालत से अनुमति मिलने के बाद कुछ समय के लिए उनकी बीमार पत्नी से मिलने की अनुमति दी गई थी।
दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कई भूमिकाएं निभाई हैं और माना जाता है कि 2011 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के बाद से आप के उदय में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
वह आप की राजनीतिक मामलों की समिति के सदस्य भी रहे हैं, जो इसकी सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है।
मंत्रिमंडल की जिम्मेदारियों को छोड़ने से पहले, सिसोदिया ने 18 महत्वपूर्ण विभागों को संभाला, जिनमें शिक्षा, वित्त, भूमि और भवन योजना, सतर्कता सेवाएं, महिला एवं बाल विकास, साथ ही कला, संस्कृति और भाषाएं शामिल हैं।
पिछले साल 28 फरवरी को उन्हें दिल्ली मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा था, जिसके दो दिन बाद सीबीआई ने उन्हें अब रद्द कर दी गई दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 के निर्माण और कार्यान्वयन में कथित अनियमितताओं के लिए गिरफ्तार किया था।
आप ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर नेता को “(दिल्ली के) बहुआयामी शासन परिदृश्य को आकार देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करने” और दिल्ली के सरकारी स्कूलों की शिक्षा प्रणाली में “क्रांतिकारी बदलाव” लाने का श्रेय दिया है।
साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले सिसोदिया का जन्म पांच जनवरी 1972 को उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में सरकारी स्कूल के एक शिक्षक के परिवार में हुआ था।
राजनीतिक पृष्ठभूमि से दूर, उन्होंने भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एक पत्रकार के रूप में काम किया, 1996 में ऑल इंडिया रेडियो के लिए ‘जीरो ऑवर’ नामक एक कार्यक्रम की मेजबानी की और बाद में एक समाचार निर्माता और वाचक के रूप में अन्य मीडिया संस्थानों का हिस्सा बने।
सिसोदिया, केजरीवाल और पार्टी के अन्य प्रमुख चेहरों ने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के नेतृत्व में जन लोकपाल आंदोलन के माध्यम से प्रसिद्धि प्राप्त की जिनमें वकील-सह-कार्यकर्ता प्रशांत भूषण और कवि से राजनीतिक नेता बने कुमार विश्वास का नाम शामिल है। कुमार विश्वास ने अब आप से नाता तोड़ लिया है।
आप की 26 नवंबर 2012 को स्थापना के बाद से ही सिसोदिया पार्टी के ‘थिंक टैंक’ के रूप में काम करते रहे हैं और प्रमुख नीतिगत निर्णय और योजनाएं बनाते रहे हैं। वे पूर्वी दिल्ली के पटपड़गंज निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल करते हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में तीन बार विजयी हुए हैं।
माना जा रहा है कि सिसोदिया की जेल से रिहाई से आप को बड़ा बल मिलेगा जिसे दिल्ली में 2024 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद कई झटके लगे हैं।
दिल्ली नगर निगम में भी आप मुश्किल में है, जिसके महापौर चुनाव में देरी हो रही है क्योंकि मुख्यमंत्री केजरीवाल जेल में हैं।
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