बीबीएम से थ्रीमा तक: कैसे मैसेजिंग ऐप जम्मू कश्मीर में आतंकी नेटवर्क को हवा देते हैं
नरेश
- 10 May 2026, 07:26 PM
- Updated: 07:26 PM
(सुमीर कौल)
श्रीनगर, 10 मई (भाषा) जम्मू-कश्मीर में आतंकी नेटवर्क में 'ब्लैकबेरी मैसेंजर (बीबीएम)' एप्लिकेशन का इस्तेमाल एक बार फिर सामने आया है। लश्कर-ए-तैयबा (एलईटीटी) के एक प्रमुख आतंकवादी से पूछताछ में अन्य आतंकवादियों के साथ संवाद के लिए कुछ प्रतिबंधित एप्लिकेशन समेत कई एप्लिकेशन के उपयोग का संकेत मिला है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा, मोहम्मद उस्मान जट्ट और कश्मीर घाटी में आतंकवादियों का साथ देने वाले कई 'ओवरग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू)' की गिरफ्तारी के साथ श्रीनगर पुलिस ने पिछले महीने के आरंभ में लश्कर के एक मॉड्यूल भंडाफोड़ किया था जिसे जम्मू और कश्मीर के बाहर ठिकाने स्थापित करने का जिम्मा सौंपा गया था।
उन्होंने बताया कि अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कसूर का रहने वाला है तथा मोहम्मद उस्मान जट्ट भी एक अन्य पाकिस्तानी आतंकवादी है।
अधिकारियों ने बताया कि इस मामले के अंतरराज्यीय और वैश्विक प्रभावों को देखते हुए, राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) इसकी आगे की जांच कर रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान अबू हुरैरा ने जांचकर्ताओं को बताया कि वह और उसकी टीम 'व्हाट्सएप', 'टेलीग्राम', 'स्किपी' और 'सिग्नल' जैसे मुख्यधारा के मैसेजिंग ऐप के साथ-साथ 'बीबीएम', 'एलिमेंट', 'थ्रीमा' और 'डस्ट समेत कई अन्य एप्लिकेशन का उपयोग कर रहे थे।
'बीबीएम' पहली बार 2009 में जांच एजेंसियों की नजर में आया और तत्कालीन सरकार ने चेतावनी दी थी कि अगर इसके निर्माता, कनाडा स्थित 'रिसर्च-इन-मोशन (आरआईएम)' ने भारत में सर्वर स्थापित नहीं किए जिससे कि केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को उन तक पहुंच मिल सके, तो भारत में इसके उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। अंततः कंपनी ने बात मान ली और 2011-12 में सर्वर स्थापित कर दिए गए।
हालांकि, 2019 में बीबीएम ने अपनी मुफ्त सेवाएं बंद कर दीं और कॉरपोरेट उपयोग के लिए तैयार सशुल्क सेवा 'बीबीएम एंटरप्राइज' शुरू की।
अधिकारियों ने बताया कि अबू हुरैरा के बयान के बाद, जांचकर्ता अब आतंकवादियों द्वारा इस्तेमाल किए गए 'बीबीएम एंटरप्राइज' खातों के मालिकों का पता लगा रहे हैं और उन्होंने सेवा प्रदाता के साथ इस मामले को उठाने का मन बनाया है।
हालांकि जम्मू और कश्मीर में 2016 से ही डिजिटल प्रौद्योगिकियों पर नजर रखी जा रही है लेकिन साइबर सुरक्षा के माहौल को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।
अधिकारियों ने बार-बार 'थ्रीमा' जैसे अत्यधिक सुरक्षित और निजी 'इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप' के उपयोग पर चिंता जताई है। 'थ्रीमा' स्विट्जरलैंड स्थित एक ऐसी 'इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप' है जो संवाद की पूर्ण गोपनीयता प्रदान करती है, ऐसे में इसके उपयोगकर्ताओं का पता लगाना असंभव हो जाता है क्योंकि इसके लिए फोन नंबर या ईमेल की आवश्यकता नहीं होती।
मई 2023 में, केंद्र सरकार ने गृह मंत्रालय की सिफारिश पर 14 'मैसेजिंग एप्लिकेशन' पर प्रतिबंध लगा दिया था। इनमें लंदन स्थित 'एलिमेंट क्रिएशन्स लिमिटेड' द्वारा संचालित 'एलिमेंट' भी शामिल था। यह ऐप विकेंद्रीकृत 'मैट्रिक्स ओपन-स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल' पर आधारित है।
'एलिमेंट' को हटाने का मुख्य कारण जम्मू और कश्मीर के भीतर सक्रिय आतंकी मॉड्यूल द्वारा पारंपरिक निगरानी को चकमा देने के लिए इसके उपयोग को लेकर चिंताएं थीं।
इसी तरह, 'डस्ट' (पूर्व में साइबर डस्ट) जैसे ऐप पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है क्योंकि ये ऐप संदेशों को 24 घंटे के भीतर या पढ़ने के तुरंत बाद गायब कर देते हैं।
अधिकारियों का तर्क है कि इससे वास्तविक समय में खुफिया जानकारी जुटाने में बाधा आती है।
ये सभी ऐप आतंकी संगठनों में आम हैं जो आमतौर पर इन एप्लिकेशन से जुड़ने के लिए 'वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क' (वीपीएन) का उपयोग करते हैं।
अधिकारियों ने कहा कि इंटरनेट के प्रसार ने सोशल मीडिया को संचार और सूचना साझा करने का एक आकर्षक माध्यम बनाया है, जिससे आतंकवादी संगठनों को अपने नेटवर्क का विस्तार करने में मदद मिलती है।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि खुद को अति राष्ट्रवादी बता रहे कुछ लोग प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी सहित कट्टरपंथी समूहों से जुड़े पाए गए हैं।
खास तौर पर संयुक्त राष्ट्र ने बार-बार आतंकवादी समूहों द्वारा ऑनलाइन मंचों पर प्रोपेगैंडा का इस्तेमाल करके अलग-अलग गलत मकसदों, जिसमें भर्ती करना और हिंसा भड़काना शामिल है, के लिए किए जाने का मुद्दा उठाया है।
इन चुनौतियों के जवाब में, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 2017 का संकल्प 2354 - 'व्यापक अंतरराष्ट्रीय ढांचा' - अपनाया था, जो कानूनी और कानून प्रवर्तन उपायों, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और प्रतिवादी विमर्श के विकास की वकालत करता है।
भाषा राजकुमार नरेश
नरेश
1005 1926 श्रीनगर