रास में जया बच्चन ने सभापति के लहजे पर जताई आपत्ति, मिली सदन की गरिमा बनाए रखने की नसीहत
मनीषा अविनाश
- 09 Aug 2024, 05:22 PM
- Updated: 05:22 PM
(तस्वीर सहित)
नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) राज्यसभा में शुक्रवार को समाजवादी पार्टी की सदस्य जया बच्चन ने सभापति जगदीप धनखड़ के बोलने के लहजे पर आपत्ति जताई जिसके बाद दोनों के बीच नोंकझोंक हो गई और सभापति ने कहा कि उनके जैसी सेलिब्रिटी को भी शिष्टाचार का पालन करने की जरूरत है।
सभापति ने विपक्षी सदस्यों को सदन की गरिमा बनाए रखने की नसीहत दी वहीं विपक्षी सदस्यों ने अपनी बात रखने की अनुमति नहीं देने का आरोप लगाते हुए सदन से बहिर्गमन कर दिया।
बाद में संसद परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए जया बच्चन ने कहा कि वह सभापति के बोलने के लहजे से नाराज हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे जब अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए तो उनका माइक बंद कर दिया गया और इससे भी वह (जया) नाराज हैं।
सदन में विवाद तब शुरू हुआ जब सपा सदस्य, कुछ दिन पहले भाजपा के घनश्याम तिवाड़ी द्वारा खरगे पर की गई कुछ टिप्पणियों को लेकर विपक्षी दलों और सभापति के बीच चल रही तीखी बहस पर अपनी बात रखना चाहती थीं।
धनखड़ ने उन्हें अनुमति देते हुए कहा ‘‘जया अमिताभ बच्चन अपनी बात रखें।’’
जया ने कहा ‘‘मैं जया अमिताभ बच्चन यह बोलना चाहती हूं, मैं कलाकार हूं, बॉडी लैंग्वेज समझती हूं, एक्सप्रेशन (भाव भंगिमा) समझती हूं। और महोदय, मुझे माफ कीजियेगा। मगर आपका टोन जो है, यह स्वीकार्य नहीं.... हम सहयोगी हैं, आप आसन पर हो सकते हैं.... और मुझे याद है अपने स्कूल के.... ।’’
जया अपनी बात पूरी नहीं कर पाईं और सभापति ने उन्हें बैठने के लिए कहा।
सभापति ने कहा, ‘‘जया जी, आपने बहुत ख्याति हासिल की है। आप जानती हैं कि कलाकार निर्देशक के अनुसार काम करता है। आप वह नहीं देखतीं जो मैं यहां से देखता हूं। हर दिन... मैं दोहराना नहीं चाहता। मैं स्कूलिंग नहीं चाहता। मैं वह व्यक्ति हूं जो ‘आउट ऑफ द वे’ गया। और आप कहती हैं कि मेरी टोन....।’’
इसी बीच जया ने कुछ कहना चाहा। सभापति ने उन्हें रोकते हुए तल्ख़ लहज़े में कहा, ‘‘बहुत हो गया। आप कोई भी हों, आप भले ही सेलिब्रिटी हों, आपको शिष्टाचार समझना होगा। मैं यह सहन नहीं कहूंगा। कभी ऐसा दिखाने की कोशिश न करें कि आप ही ने ख्याति अर्जित की है। हम सभी यहां ख्याति अर्जित करके, प्रतिष्ठा के साथ आए हैं।’’
सदन में मौजूद विपक्ष की एक सदस्य ने आपत्ति जताते हुए कहा कि सदन में वह (जया) सेलिब्रिटी नहीं बल्कि वरिष्ठ सदस्य हैं। इस पर सभापति ने कहा कि संसद के वरिष्ठ सदस्य के पास क्या आसन की गरिमा को गिराने का लाइसेंस होता है?
सभापति ने अपने लहजे, अपनी आदत, अपने मिजाज को लेकर सदस्यों की टीका टिप्पणियों पर नाखुशी जाहिर करते हुए कहा कि वह किसी के कहने पर नहीं बल्कि अपने अनुसार, सदन के नियमों के अनुसार चलेंगे।
जया बच्चन ने कुछ कहना चाहा लेकिन सभापति ने उन्हें अनुमति नहीं दी।
इसी बीच खरगे ने अपनी बात रखने की कोशिश की, तो सभापति ने कहा कि वह सभी सदस्यों का बहुत सम्मान करते हैं।
धनखड़ ने आगे कहा कि वह सदन को ‘‘अशांति का केंद्र’’ नहीं बनने दे सकते।
जया बच्चन ने बाद में संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्हें आसन की ओर से इस्तेमाल किए गए लहजे पर ‘‘आपत्ति’’ है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम स्कूल के बच्चे नहीं हैं। हममें से कुछ सदस्य तो वरिष्ठ नागरिक हैं। मैं उनके लहजे से व्यथित थी और खासकर जब विपक्ष के नेता बोलने के लिए खड़े हुए तो उनका माइक बंद कर दिया गया। आप ऐसा कैसे कर सकते हैं? यह परंपरा के खिलाफ है। आपको नेता को (बोलने की) अनुमति देनी होगी।’’
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष की ओर बैठे सदस्य ‘बुद्धिहीन’ जैसे असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल करते हैं।
भाषा मनीषा