बंगाल के कम्युनिस्ट आंदोलन का एक 'अध्याय' समाप्त हो गया: वामपंथी नेताओं ने बुद्धदेव के निधन पर कहा
सिम्मी प्रशांत
- 08 Aug 2024, 07:49 PM
- Updated: 07:49 PM
नयी दिल्ली, आठ अगस्त (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और अन्य वामपंथी दलों ने मार्क्सवादी नेता एवं पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि राज्य के कम्युनिस्ट आंदोलन का एक ‘‘अध्याय’’ समाप्त हो गया।
माकपा की पश्चिम बंगाल इकाई के सचिव मोहम्मद सलीम ने बताया कि भट्टाचार्य का बृहस्पतिवार को कोलकाता स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह 80 वर्ष के थे।
माकपा ने एक बयान में कहा, ‘‘माकपा पोलित ब्यूरो, पार्टी के असाधारण नेता और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री कॉमरेड बुद्धदेव भट्टाचार्य के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करता है।’’
पार्टी महासचिव सीताराम येचुरी ने फेसबुक पर एक पोस्ट में लिखा कि यह खबर ‘‘विक्षुब्ध कर देने वाली’’ है।
येचुरी ने कहा, ‘‘बुद्ध दा के बारे में यह खबर जब मेरे पास पहुंची तब मैं मोतियाबिंद का ऑपरेशन करा रहा था। पार्टी, पश्चिम बंगाल, हमारे साझा आदर्शों के प्रति उनका समर्पण और भविष्य की ओर देखने की उनकी क्षमता हमेशा एक मार्गदर्शक की तरह काम करेगी।’’
माकपा ने कहा कि भट्टाचार्य 1966 में एक छात्र के रूप में पार्टी में शामिल हुए थे और उन्होंने विभिन्न छात्र एवं युवा आंदोलनों में भाग लिया।
उसने कहा कि वह 1968 में पश्चिम बंगाल डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन के राज्य सचिव बने। भट्टाचार्य 1971 में पार्टी की पश्चिम बंगाल राज्य समिति के लिए चुने गए और 1982 में राज्य सचिवालय के सदस्य बने।
पार्टी ने कहा कि इस अवधि में भट्टाचार्य एक महत्वपूर्ण नेता के रूप में उभरे, जिन्होंने एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। उसने कहा कि 2015 तक पोलित ब्यूरो के सदस्य के रूप में भट्टाचार्य ने पार्टी की नीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
माकपा ने कहा, ‘‘वाम मोर्चा सरकार में मंत्री और मुख्यमंत्री के रूप में बुद्धदेव की विशिष्ट भूमिका थी, जिसमें उन्होंने लगभग तीन दशक तक सेवाएं दीं। उन्होंने नवंबर 2000 में ज्योति बसु के बाद मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला और उसके बाद दो और कार्यकाल के लिए शपथ ली।’’
उसने कहा कि उन्होंने सरकार के दृष्टिकोण और नीतियों को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भट्टाचार्य ने सांस्कृतिक संस्थाओं के विकास और प्रगतिशील सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
पार्टी ने कहा, ‘‘साहित्य उनका जुनून था। वह एक कवि, नाटककार और लेखक थे। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक कृतियों का बंगाली में अनुवाद किया। उन्होंने चीन में बदलावों पर विस्तार से लिखा और इस विषय पर एक किताब भी प्रकाशित की।’’
पार्टी ने कहा कि उन्होंने एक समर्पित कम्युनिस्ट के रूप में एक साधारण जीवन जिया और मुख्यमंत्री के रूप में अपने पूरे कार्यकाल के दौरान तथा उसके बाद भी दो कमरों वाले साधारण घर में रहे।
उसने कहा, ‘‘उनके निधन के साथ ही पश्चिम बंगाल के कम्युनिस्ट और वामपंथी आंदोलन का एक अध्याय समाप्त हो गया है।’’
पार्टी ने बुद्धदेव के निधन पर शोक व्यक्त किया और उनकी पत्नी मीरा एवं बेटी सुचेतना के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
अन्य वामपंथी नेताओं ने भी पूर्व मुख्यमंत्री को श्रद्धांजलि अर्पित की।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी. राजा ने कहा, ‘‘कॉमरेड बुद्धदेव भट्टाचार्य के निधन की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ। वह माकपा और वाम दलों के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक थे। वर्ष 2000 से 2011 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल सहित सार्वजनिक जीवन में उनके लंबे कार्यकाल ने उन्हें लोकप्रिय बनाया।’’
उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘उनकी अनुपस्थिति बंगाल के साहित्यिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में भी महसूस की जाएगी, जहां उनकी अहम उपस्थिति थी। बुद्धदेव दा और माकपा के परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं।’’
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने भी शोक व्यक्त किया।
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘बुद्धदेव भट्टाचार्य पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक चले माकपा के नेतृत्व वाले वामपंथी प्रशासन के अंतिम कमांडर थे। उनके प्रशासनिक कार्यकाल के बारे में बहस जारी रहेगी, लेकिन उन्हें उनकी ईमानदारी, सादगी भरे जीवन और प्रगतिशील सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए याद किया जाएगा।’’
भाषा सिम्मी