विकास गतिविधियों के चलते बीते 10 वर्षों में 1,700 वर्ग किमी से अधिक वन क्षेत्र खत्म हुआ : सरकार
मनीषा अविनाश
- 08 Aug 2024, 07:47 PM
- Updated: 07:47 PM
नयी दिल्ली, आठ अगस्त (भाषा) सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि विकास गतिविधियों के कारण पिछले 10 वर्षों में 1,700 वर्ग किलोमीटर से अधिक वन क्षेत्र खत्म हो गया लेकिन प्रतिपूरक वनरोपण के लिए भूमि का अधिग्रहण भी किया गया है।
राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पर्यावरण एवं वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने यह भी कहा कि देश का समेकित समग्र वन क्षेत्र बढ़ा है एवं सरकार इसे और बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने एक पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि पांच पूर्वोत्तर राज्यों - अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, नगालैंड, मिजोरम और मेघालय - में वन क्षेत्र कम हो गया है, जबकि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, कर्नाटक और झारखंड जैसे राज्यों में वन क्षेत्र में वृद्धि देखी गई है।
उन्होंने कहा ‘‘पिछले 10 वर्षों में विकास गतिविधियों के कारण 1,73,396 हेक्टेयर (1733 वर्ग किमी) वन क्षेत्र खत्म हो गया है। हालांकि प्रतिपूरक वनरोपण के तहत भूमि का अधिग्रहण भी किया गया है। इसके कारण 21,761 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र बढ़ा है। इस प्रकार सरकार ने वन क्षेत्र के नुकसान की भरपाई की है।’’
आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद नारायण दास गुप्ता ने पूछा कि क्या सरकार ने भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की पहचान करने के लिए कोई सर्वेक्षण किया है या कोई तंत्र विकसित किया है, ताकि जानमाल की हानि को रोका जा सके?
इस पर जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार हर दो साल में वन सर्वेक्षण करती है। हालांकि, घटनाएं आपदा प्रबंधन का विषय है और राज्य सरकारें इस पर गौर करती हैं।
यादव ने कहा ‘‘ यदि मंत्रालय किसी एजेंसी को कोई परियोजना की अनुमति देता है, तो यह सुनिश्चित करता है कि उस क्षेत्र की मिट्टी और नमी सुरक्षित रहे। इसके अलावा, यह पहाड़ी क्षेत्रों में वन्यजीवों के लिए मार्ग भी सुनिश्चित करता है, ताकि उनके आवागमन के दौरान उन्हें किसी भी बाधा का सामना न करना पड़े।’’
कांग्रेस की रंजीत रंजन ने दावा किया कि 1,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में वन क्षेत्र कम हो रहा है, फिर भी सरकार इन क्षेत्रों के लिए परियोजनाओं को मंजूरी दे रही है। रंजन ने उत्तराखंड में भागीरथी चार धाम परियोजना का मुद्दा भी उठाया और कहा कि सरकार ‘‘वन क्षेत्रों को खत्म कर रही है। ’’
इस पर यादव ने कहा ‘‘पांच राज्यों में वन क्षेत्र में कमी आई है, उत्तराखंड इस सूची में नहीं है। पूर्वोत्तर राज्यों में वन क्षेत्र में कमी सीमित क्षेत्रों तक सीमित है।’’
यादव ने कहा कि सरकार का कर्तव्य है कि वह उन राज्यों का विकास करे और वहां सड़क, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराए।
राकांपा की फौजिया खान ने कहा कि मंत्रालय ने करीब बीस लाख पेड़ों को काटने की आवश्यकता वाली 80 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि विकल्प के रूप में फंड प्रबंधन के साथ वनरोपण किया जा सकता है। उन्होंने पूछा कि क्या कोई ऐसा आंकड़ा है जिससे पता लगता हो कि नया वनरोपण लाखों एकड़ अछूते वन क्षेत्र का प्रतिस्थापन है।
इस पर यादव ने कहा कि पेरिस समझौते के अनुसार, सरकार अपने कुल हरित क्षेत्र को 33 प्रतिशत तक बढ़ाएगी। ‘‘इसे बढ़ाना होगा और इसके लिए सरकार के पास वृक्षारोपण बढ़ाने की योजनाएं हैं।’’
उन्होंने कहा कि सरकार तटीय क्षेत्रों में वृक्षारोपण बढ़ाने का भी प्रयास कर रही है।
भाषा
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