आम बजट में मध्यम वर्ग की पूरी तरह से अनदेखी : कांग्रेस
माधव मनीषा
- 08 Aug 2024, 03:03 PM
- Updated: 03:03 PM
नयी दिल्ली, आठ अगस्त (भाषा) राज्यसभा में कांग्रेस के एक सदस्य ने आम बजट 2024-25 में मध्यम वर्ग की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आज स्थिति यह हो गयी है कि मध्यम वर्ग के नौकरी पेशा लोग कार्पोरेट क्षेत्र की तुलना में अधिक कर दे रहे हैं।
उच्च सदन में वित्त विधेयक 2024-25 और जम्मू कश्मीर से संबंधित वित्त विधेयक पर संयुक्त चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के विवेक तन्खा ने कहा कि कोई भी बजट बुरा या अच्छा नहीं होता बल्कि उसमें कुछ हिस्से अच्छे एवं कुछ बुरे होते हैं। उन्होंने बजट में कैंसर एवं जीवन रक्षक दवाओं पर सीमा शुल्क शून्य करने के प्रस्ताव का स्वागत किया। उन्होंने एंजेल टैक्स हटाये जाने के प्रस्ताव का भी स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने मध्यम वर्ग के सरोकारों पर ध्यान नहीं दिया है। उन्होंने दावा किया कि इस बजट में मध्यम वर्ग पर परोक्ष कर बढ़ा दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि कर वसूली के दायरे बताते हैं कि कार्पोरेट क्षेत्र की तुलना में मध्यम वर्ग से अधिक कर वसूल किया जा रहा है।
कांग्रेस ने कहा कि आज मध्यम वर्ग के लिए बीमार पड़ना एक पाप हो गया है। उन्होंने कहा कि इस वर्ग को आयुष्मान भारत योजना का कोई लाभ नहीं मिलता है।
उन्होंने दावा किया कि इस बजट में किसान के प्रति सहानुभूति का कोई दृष्टिकोण नजर नहीं आता। उन्होंने कहा कि इसीलिए किसान वर्ग इस बजट को लेकर बहुत उत्साहित नहीं है।
तन्खा ने कहा कि बजट में दवा एवं औषधि क्षेत्र के लिए अधिक आवंटन नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि आज भारत विकास एवं अनुसंधान कार्यों में जीडीपी का मात्र 0.6 प्रतिशत व्यय करता है। उन्होंने कहा कि बजटीय प्रावधान से आर एंड डी कार्य हतोत्साहित होंगे।
उन्होंने कहा कि बजट में महिला उद्यमियों को समुचित प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। उन्होंने शहरों में कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल बनाये जाने का सुझाव दिया।
कांग्रेस सदस्य ने बेरोजगारी दूर करने के लिए बजट में घोषित प्रोत्साहन देने की घोषणा को जमीन पर अव्यावहारिक करार दिया। उन्होंने कहा कि इस योजना में से बहुत सारे लोगों को पहले ही अयोग्य घोषित कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि नयी शिक्षा नीति में इस क्षेत्र में सकल घरेलू उत्पाद का छह प्रतिशत व्यय करने की बात कही गयी है किंतु इसमें बहुत कम व्यय किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज प्रमुख शिक्षण संस्थानों का संचालन पेशेवर लोगों के बजाय ऐसे लोग कर रहे हैं जो किसी राजनीतिक विचारधारा के समर्थक हैं और इसीलिए बच्चे शिक्षा के लिए विदेश जाना पसंद कर रहे हैं।
तन्खा ने दावा किया कि यही कारण है कि आज भारत में प्रतिभा पलायन अपने उच्चतम स्तर पर है।
रेलवे की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन एजेंसी को लाभ कमाने के लिए नहीं बल्कि जनता की सुविधा के लिए चलाया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 6800 ट्रेन स्टेशन बंद कर दिये गये जिससे छात्रों, कामगारों, कारीगरों सहित समाज के कई वर्ग प्रभावित हुए हैं।
चर्चा में भाग लेते हुए रमिलाबेन बेचारभाई बारा ने गुजराती में अपनी बात रखी। उन्होंने रोजगार को बढ़ावा देने सहित बजट में की गयी विभिन्न घोषणाओं का स्वागत करते हुए कहा कि इससे अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।
भाषा माधव