किसानों की समस्या पर गंभीरता से गौर नहीं किया गया तो देश में तनाव बढ़ेगा: सपा
ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र अविनाश
- 26 Jul 2024, 07:02 PM
- Updated: 07:02 PM
नयी दिल्ली, 26 जुलाई (भाषा) समाजवादी पार्टी सदस्य रामजी लाल सुमन ने शुक्रवार को आम बजट को ‘निराशाजनक’ करार देते हुए सरकार पर कृषि क्षेत्र की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर किसानों की समस्या पर गंभीरता से गौर नहीं किया गया तो देश में तनाव बढ़ेगा तथा इसकी जिम्मेदारी सरकार पर होगी।
राज्यसभा में आम बजट 2024-25 पर हुई चर्चा में हिस्सा लेते हुए सपा के वरिष्ठ सदस्य ने किसानों को समृद्ध करने के लिए सार्थक प्रयास की जरूरत पर बल दिया और कहा अगर सरकार सही मायनों में किसानों के साथ इंसाफ करना चाहती है तो ‘जीएसटी’ को जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य का ऐलान करना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘आज भी देश की आधी से ज्यादा आबादी कृषि पर निर्भर है। यह सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र भी है। कहने को तो कुछ भी कहा जाता है लेकिन मेरा आरोप है कि कृषि की उपेक्षा हुई।’’
सुमन ने कहा कि साल 2019-20 के बजट में बजट का 5.44 प्रतिशत कृषि पर आवंटित किया गया था और इस बजट में यह आवंटन 3.5 प्रतिशत है।’’
देश में कुछ हिस्सों में लंबे समय से हो रहे किसान आंदोलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘किसान अब सिंधु बॉर्डर पर इकट्ठा हो रहे हैं। अगर सरकार गंभीरता से किसानों की समस्या पर गौर नहीं करेगी तो देश में तनाव बढ़ेगा। और मैं बहुत विनम्रता के साथ कहूंगा...अगर यह बढ़ेगा तो इसकी जिम्मेदारी किसी और की नहीं बल्कि सरकार की होगी।’’
उन्होंने कहा कि बजट में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात की गई है लेकिन सच्चाई यह है कि प्राकृतिक खेती नाम की कोई चीज नहीं होती है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का जिक्र करते हुए सुमन ने कहा कि किसानों के आंदोलन के दौरान 22 जुलाई 2022 को एक समिति बनी थी जिसकी रिपोर्ट की समयसीमा तय की जानी चाहिए।
सपा सदस्य ने कहा कि पिछले सात वर्षों में जीएसटी का कर संग्रह 170 फ़ीसदी बढ़ गया है और इसका 67 प्रतिशत हिस्सा 50 फ़ीसदी गरीब लोगों से मिलता है।
उन्होंने कहा, ‘‘कर्ज संग्रह बढ़ गया लेकिन महंगाई भी बढ़ी। छोटे व्यापारियों को जीएसटी से नुकसान हुआ।’’
उन्होंने सवाल उठाया कि इतने कर संग्रह के बावजूद राजस्व घाटा क्यों है?
शांता कुमार समिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसका निष्कर्ष है कि देश में सिर्फ छह फ़ीसदी किसानों को एमएसपी का लाभ मिलता है और 94 फ़ीसदी किसानों को खुले बाजार में अपना उत्पाद बेचना पड़ता है।
उन्होंने कहा, ‘‘ किसी को समृद्ध करने के लिए जो सार्थक प्रयास हमारे देश में होना चाहिए था, वह नहीं हो रहा है। हमारे देश में 7,000 मंडियां है जबकि 42,000 मंडियों की आवश्यकता है।’’
सुमन ने कहा कि आज स्थिति यह है खेती की दवाइयों पर 18 प्रतिशत, ट्रैक्टर पर 28 प्रतिशत, बीजों पर 12 प्रतिशत और कृषि यंत्रों पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगता है।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर सरकार सही मायनों में किसानों के साथ इंसाफ करना चाहती है तो जीएसटी को जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य का ऐलान करना चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एमएसपी तय करने वाली समिति का अध्यक्ष कृषि मंत्रालय के अधीन एक संयुक्त सचिव होता है लेकिन समिति में कोई कृषि वैज्ञानिक नहीं है ना ही किसानों के नुमाइंदे हैं।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘‘जिन लोगों को यह नहीं पता कि चने का पेड़ बड़ा होता है या गेहूं का- वे किसानों का भविष्य तय करेंगे।’’
महाराष्ट्र में जनवरी से जून तक 1267 किसानों द्वारा आत्महत्या किए जाने का दावा करते हुए सपा सदस्य ने कहा, ‘‘जब तक कृषि आधारित बजट और श्रम पर आधारित उद्योग हमारे देश में नहीं लगेंगे, इस देश के हालात को नहीं सुधारा जा सकता है। बजट से किसानों और मजदूरों को बहुत अपेक्षाएं थी लेकिन इसने आम लोगों को निराश ही किया है।’’
भाषा ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र