लोकसभा में बजट पर चर्चा: कृषि उपकरणों से जीएसटी समाप्त करने तथा कई राज्यों को विशेष पैकेज की मांग
वैभव मनीषा
- 26 Jul 2024, 04:30 PM
- Updated: 04:30 PM
(तस्वीर सहित)
नयी दिल्ली, 26 जुलाई (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा) और एमडीएमके समेत विपक्षी दलों के सदस्यों ने केंद्रीय बजट में राज्यों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए सरकार से कृषि उपकरणों पर लागू जीएसटी को समाप्त करने की मांग की, वहीं कई सांसदों ने अपने-अपने राज्यों को विशेष दर्जा या विशेष पैकेज देने की मांग उठाई।
लोकसभा में केंद्रीय बजट पर चर्चा में भाग लेते हुए सपा सांसद हरेंद्र सिंह मलिक ने कहा कि बजट में किसानों को खाद पर कोई सब्सिडी नहीं मिली और आंदोलन के दौरान ‘शहीद’ हुए किसानों के परिवारों को आर्थिक सहायता का भी कोई प्रावधान नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अपने वादे को लेकर भी कोई कारगर उपाय नहीं किया है।
मलिक ने कहा कि सरकार से बजट में ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों पर जीएसटी खत्म करने की अपेक्षा थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी मांग है कि कृषि उपकरणों पर से जीएसटी हटा दिया जाए।’’
मलिक ने ‘अग्निपथ’ योजना में जवानों को चार साल के बजाय 20-25 साल तक मौका देने की जरूरत बताई।
एमडीएमके सदस्य दुरई वाइको ने बजट को सरकार को बनाए रखने और गठबंधन सहयोगियों को खुश करने वाला बताते हुए इसमें तमिलनाडु के साथ भेदभाव का आरोप लगाया।
उन्होंने भी कृषि उपकरणों पर जीएसटी में छूट की जरूरत बताई।
वाइको ने आरोप लगाया कि यह बजट किसान, गरीब, युवाओं और महिलाओं के लिए नहीं बल्कि उनके खिलाफ है।
आम आदमी पार्टी के गुरमीत सिंह ने कहा कि पूरे बजट में पंजाब राज्य का एक बार भी जिक्र तक नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले 70 साल में किसी सरकार ने इतनी मजबूरी वाला बजट पेश नहीं किया।’’
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा देश में 85 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन देने का दावा किया जाता है, लेकिन यह ‘‘गर्व की नहीं शर्म की बात है कि उन्हें अब तक गरीबी की रेखा से बाहर नहीं कर पाए।’’
सिंह ने बाढ़ और उद्योगों की कमजोरी जैसे हालात से गुजर रहे पंजाब राज्य के लिए केंद्र से विशेष पैकेज की मांग की।
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के हनुमान बेनीवाल ने सरकार से राजस्थान को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता तो विशेष पैकेज दें।’’
बेनीवाल ने भी बजट में बिहार और आंध्र प्रदेश को छोड़कर राजस्थान समेत देश के अन्य राज्यों के साथ ‘सौतेला व्यवहार’ किए जाने का आरोप लगाया।
उन्होंने सरकार से ‘अग्निपथ’ योजना को बंद करने की मांग की।
शिरोमणि अकाली दल की सदस्य हरसिमरत कौर बादल ने भी इसे विपक्षी दलों की तरह ‘सरकार बचाओ बजट’ बताते हुए कहा कि यह पूरे देश का बजट नहीं है।
उन्होंने दावा किया, ‘‘बजट में केवल नौ राज्यों के नाम थे। उनमें भी केवल दो (बिहार और आंध्र प्रदेश) को सबसे ज्यादा तरजीह दी गई, जिनके सहारे सरकार चल रही है।’’
उन्होंने सरकार पर बजट में प्राकृतिक आपदाओं और आवासों के नाम पर भी पक्षपात करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब हिमाचल प्रदेश में बाढ़ आती है तो पंजाब में भी उसका दंश झेलना पड़ता है लेकिन सरकार ने केवल हिमाचल प्रदेश को बाढ़ पैकेज दिया।
हरसिमरत ने कहा, ‘‘क्या सरकार के लिए पंजाब का कोई महत्व नहीं है।’’
उन्होंने पिछले कई वर्षों से राजस्थान को ‘रिपेरियन सिद्धांत’ के खिलाफ पंजाब का पानी दिए जाने का दावा करते हुए सरकार से मांग की कि या तो पंजाब को उस पानी का पैसा मिलना चाहिए या राजस्थान को पानी की आपूर्ति बंद कर दी जाए।
उन्होंने पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और विपक्षी कांग्रेस पर राज्य के खजाने को ‘लूटकर उसे तबाह करने’ का आरोप लगाया।
पंजाब से ही कांग्रेस सदस्य धरमवीर गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार खुद को मजबूत करती जा रही है और राज्यों को कमजोर कर रही है।
आईयूएमएल के अब्दुस्समद समदानी ने कहा कि सरकार ‘‘आंखें खोलकर तटस्थता के साथ’’ देश में महंगाई और अन्य समस्याओं को देखने के लिए तैयार नहीं है।
उन्होंने बजट में केरल का ध्यान नहीं रखे जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसमें केवल कुछ राज्यों को ही खुश करना सहकारी संघवाद के सिद्धांत के खिलाफ है।
भाषा
वैभव