पाकिस्तान ने इतिहास ने कोई सीख नहीं ली: प्रधानमंत्री मोदी
सिम्मी प्रशांत
- 26 Jul 2024, 03:13 PM
- Updated: 03:13 PM
(तस्वीरों के साथ)
द्रास, 26 जुलाई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि पाकिस्तान ने इतिहास से कोई सबक नहीं सीखा है और वह स्वयं को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए आतंकवाद की आड़ में छद्म युद्ध जारी रखे हुए है।
मोदी ने साथ ही कहा कि दुश्मन के नापाक मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले बहादुरों को 25वें करगिल विजय दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने एक ‘श्रद्धांजलि समारोह’ में भी भाग लिया और ‘गौरव गाथा’ सुनी। मोदी ने ‘अमर संस्मरण’ और ‘स्मरण कुटिया’ का दौरा किया। वह ‘वीर भूमि’ भी गए।
मोदी ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उसे अतीत में हमेशा हार का सामना करना पड़ा है।
उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान ने अतीत से कोई सबक नहीं लिया है और वह प्रासंगिक बने रहने के लिए आतंकवाद और छद्म युद्ध की आड़ में युद्ध जारी रखे हुए है।’’
प्रधानमंत्री का यह बयान जम्मू क्षेत्र में आतंकवादी घटनाएं बढ़ने के बीच आया है।
मोदी ने कहा कि आतंकवादियों के नापाक मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे वीर जवान सभी आतंकवादी साजिशों को कुचल देंगे।’’
मोदी ने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि देश के सैनिकों द्वारा दिया गया बलिदान अमर है।
उन्होंने कहा, ‘‘करगिल विजय दिवस हमें याद दिलाता है कि राष्ट्र के लिए दिया गया बलिदान अमर है। भले ही महीने, साल, दशक और सदियां बीत जाएं, देश की सीमाओं की रक्षा के लिए कुर्बान हुए लोगों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। राष्ट्र हमारे सशस्त्र बलों के पराक्रमी महानायकों का सदैव ऋणी और कृतज्ञ रहेगा।’’
मोदी ने करगिल युद्ध के दिनों को याद करते हुए कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उस समय उन्हें सैनिकों के बीच रहने का मौका मिला और उन्हें अब भी याद है कि कैसे सैनिकों ने इतनी ऊंचाई पर एक कठिन अभियान को अंजाम दिया था। उन्होंने कहा, ‘‘मैं देश के उन वीर सपूतों को नमन करता हूं जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।’’
मोदी ने कहा, ‘‘करगिल में हमने न केवल युद्ध जीता, बल्कि सत्य, संयम और शक्ति का अद्भुत उदाहरण पेश किया।’’
मोदी ने कहा कि भारत अपने पड़ोसी देश के साथ शांति बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है, लेकिन पाकिस्तान ने अपना असली रंग दिखा दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन झूठ और आतंकवाद को सच्चाई ने घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया है।’’
मोदी ने कहा, ‘‘आज मैं ऐसे स्थान से बोल रहा हूं, जहां से आतंकवाद के आका मेरी आवाज सीधे सुन सकते हैं। मैं आतंकवाद के सरपरस्तों को बताना चाहता हूं कि उनके नापाक मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे वीर जवान आतंकवाद को कुचल देंगे और दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के विकास में आने वाली हर बाधा को दूर करेगा।
मोदी ने कहा कि पांच अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के अगले महीने पांच साल पूरे हो जाएंगे और आज का जम्मू-कश्मीर सपनों से भरे नए भविष्य की बात कर रहा है। लद्दाख को पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य से अलग कर केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर में प्रगति का उदाहरण देते हुए केंद्र शासित प्रदेश में जी-20 बैठकें आयोजित किए जाने, बुनियादी ढांचे और पर्यटन के विकास पर सरकार के ध्यान केंद्रित करने, सिनेमा हॉल खोले जाने और साढ़े तीन दशक के बाद मुहर्रम के महीने में शिया जुलूस की अनुमति दिए जाने का उल्लेख किया।
मोदी ने कहा, ‘‘धरती का यह स्वर्ग शांति और समृद्धि की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।’’
प्रधानमंत्री ने लद्दाख में हो रहे विकास को रेखांकित करते हुए कहा कि शिंकुन ला सुरंग के माध्यम से यह केंद्र शासित प्रदेश पूरे देश से साल के हर मौसम में जुड़ा रहेगा।
मोदी लद्दाख में शिंकुन ला सुरंग परियोजना के निर्माण के लिए पहले विस्फोट के इस कार्यक्रम के दौरान डिजिटल माध्यम से साक्षी बने।
शिंकुन ला सुरंग परियोजना में 4.1 किलोमीटर लंबी दोहरी-ट्यूब सुरंग शामिल है, जिसका निर्माण लेह को सभी मौसम में संपर्क प्रदान करने के लिए निमू-पदुम-दारचा रोड पर लगभग 15,800 फुट की ऊंचाई पर किया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘यह सुरंग लद्दाख के विकास और बेहतर भविष्य के लिए नयी संभावनाओं के द्वार खोलेगी।’’
मोदी ने लद्दाख के लोगों को बधाई देते हुए कहा कि यह सुरंग उनके जीवन को और आसान बनाएगी और क्षेत्र में प्रतिकूल मौसम के कारण उन्हें होने वाली अनेक कठिनाइयां कम होंगी।
प्रधानमंत्री ने लद्दाख के लोगों के जीवन को आसान बनाने और उनके लिए अधिक सेवाएं प्रदान करने के सरकार के प्रयासों को रेखांकित करते हुए कहा कि बजट में पिछले पांच साल में लगभग छह गुना वृद्धि करते हुए इसे 1,100 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 6,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
उन्होंने सैन्य प्रौद्योगिकियों के उन्नयन के महत्व पर बल देते हुए कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में रक्षा बलों को आधुनिक कार्यशैली और व्यवस्था के साथ-साथ नवीनतम हथियारों और उपकरणों की भी आवश्यकता है।
मोदी ने कहा कि रक्षा क्षेत्र के उन्नयन की जरूरत पहले भी महसूस हुई थी, ‘‘लेकिन दुर्भाग्य से इस मामले को ज्यादा महत्व नहीं दिया गया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन पिछले 10 साल में रक्षा क्षेत्र में सुधारों को प्राथमिकता दी गई है, जिससे हमारी सेनाएं अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बन रही हैं।’’
उन्होंने कहा कि आज रक्षा खरीद में बड़ी हिस्सेदारी भारतीय रक्षा उद्योग को दी जा रही है और रक्षा एवं अनुसंधान विकास बजट में 25 प्रतिशत हिस्सा निजी क्षेत्र के लिए आरक्षित किया गया है।
मोदी ने कहा, ‘‘इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, भारत का रक्षा उत्पादन 1.5 लाख करोड़ को पार कर गया है। आज भारत एक हथियार निर्यातक देश के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है, जबकि पहले इसकी छवि हथियार आयातक देश की थी।’’
मोदी ने इस बात पर खुशी जताई कि सशस्त्र बलों ने अब 5,000 से अधिक हथियारों और सैन्य उपकरणों का आयात बंद करने का फैसला किया है।
उन्होंने अपने संबोधन के अंत में कहा कि करगिल में जीत किसी सरकार या किसी पार्टी की जीत नहीं थी।
उन्होंने कहा, ‘‘यह जीत देश की है, यह जीत देश की विरासत है। यह देश के गौरव और स्वाभिमान का पर्व है।’’
इस अवसर पर लद्दाख के उपराज्यपाल ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) बी.डी. शर्मा, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान और तीनों सशस्त्र सेनाओं के प्रमुख उपस्थित थे।
भाषा सिम्मी