भाजपा मुडा ‘घोटाला’ मामले को लेकर कर्नाटक विधानसभा, विधान परिषद में ‘दिन-रात’ धरना देगी
देवेंद्र सुभाष
- 24 Jul 2024, 10:48 PM
- Updated: 10:48 PM
बेंगलुरु, 24 जुलाई (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कर्नाटक इकाई ने बुधवार को घोषणा की कि वह मैसुरु शहरी विकास प्राधिकरण (मुडा) द्वारा भूखंड आवंटित करने में कथित फर्जीवाड़े के संबंध में चर्चा की अनुमति नहीं दिये जाने को लेकर विधानसभा और विधान परिषद, दोनों में ‘दिन-रात’ धरना देगी।
भूखंड प्राप्त करने वालों में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की पत्नी पार्वती भी शामिल हैं।
विपक्ष को आज दोनों सदनों में इस मुद्दे पर चर्चा करने की अनुमति नहीं दी गई। विधानमंडल का सत्र शुक्रवार को समाप्त होगा।
इस मामले पर विधानसभा अध्यक्ष यू टी खादर ने विपक्ष के स्थगन प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने नियमों का हवाला देते हुए विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) से इस मुद्दे पर चर्चा की अनुमति नहीं देने का आग्रह किया, जबकि विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दावा किया कि संदेह की सुई राज्य के ‘‘सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति’’ के परिवार की ओर इशारा कर रही है और मांग की कि चर्चा की अनुमति दी जाए।
विपक्ष ने मामले की जांच के लिए जांच आयोग के गठन के पीछे राजनीतिक मकसद का भी आरोप लगाया और कहा कि इसका उद्देश्य सदन को इस मुद्दे पर बहस करने का मौका देने से रोकना है।
स्पीकर ने कहा, ‘‘दोनों पक्षों को सुनने के बाद, क्योंकि विपक्ष द्वारा दिया गया स्थगन नोटिस कोई अत्यावश्यक मामला नहीं है और आरोपों की जांच के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित किया गया है, साथ ही यह मामला तत्काल घटित नहीं हुआ है, इसलिए इसे खारिज कर दिया गया है।’’
विपक्ष के नेता आर. अशोक जैसे ही इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव लाने के लिए दबाव बनाने लगे, विधि एवं संसदीय कार्य मंत्री एच. के. पाटिल ने कहा कि नियमों के अनुसार इस मुद्दे पर चर्चा नहीं हो सकती।
‘‘कर्नाटक विधानसभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन’’ के नियमों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जो मुद्दे किसी न्यायाधिकरण या आयोग या प्राधिकरण या अदालतों के समक्ष निर्णय के लिए निर्धारित हैं, उन पर आमतौर पर स्थगन प्रस्ताव के रूप में अनुमति नहीं दी जा सकती।
उन्होंने कहा कि जांच आयोग अधिनियम, 1952 के अनुसार आरोपों की जांच के लिए सरकार द्वारा 14 जुलाई, 2024 को उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी. एन. देसाई की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया गया था।
भाजपा के वरिष्ठ विधायक सुरेश कुमार ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष जांच की प्रक्रिया में बाधा डाले बिना चर्चा की अनुमति दे सकते हैं।
विधानसभा में विपक्ष के नेता अशोक ने कहा, ‘‘कांग्रेस के पास 136 विधायक हैं। हम मुडा घोटाले में 4,000 करोड़ रुपये की लूट के बारे में स्थगन प्रस्ताव लाये, जिससे सरकार डर गई और चर्चा से भाग रही है। उन्होंने वित्त विधेयक समेत कई महत्वपूर्ण विधेयकों को बिना चर्चा के पारित कर दिया है। यह सरकार डरपोक है, उनके पास सदन में मुडा के आरोपों का जवाब देने की हिम्मत नहीं है।’’
उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा कि यदि सरकार में थोड़ा भी आत्मसम्मान है तो उसे सदन में यह कहना चाहिए था कि मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने 14 भूखंड को कानूनी तरीके से लिया है और उनके समर्थकों ने भी ऐसा ही किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह 4,000 करोड़ रुपये का घोटाला है। दलितों की एक लाख वर्ग फुट से अधिक जमीन लूट ली गई है.....हम इस मुद्दे को उठाना चाहते थे, हमें इसकी अनुमति नहीं दी गई। हमारे सभी विधायक और विधान परिषद सदस्य इस सरकार के खिलाफ दिन-रात विरोध प्रदर्शन करेंगे।’’
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं विधायक बी वाई विजयेंद्र ने भी विधानसभा और विधान परिषद में कहा, ‘‘हम रातभर विरोध प्रदर्शन करेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दलितों के साथ अन्याय न हो, मुख्यमंत्री के परिवार को दी गई जमीन और 5,000 से अधिक अवैध रूप से आवंटित भूखंड को वापस लिया जाए।’’
उन्होंने मुख्यमंत्री पर मुडा घोटाले पर चर्चा का अवसर न देकर इस पर चर्चा से भागने का आरोप लगाया।
विधानसभा में विपक्ष द्वारा मुडा घोटाले को लेकर चर्चा कराये जाने पर जोर दिए जाने के कारण शोरगुल के बीच, मुख्यमंत्री द्वारा पेश चार विधेयक 8573.72 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट के प्रस्ताव संबंधी वित्त विधेयक, जीएसटी (संशोधन) विधेयक, सिंचाई (संशोधन) विधेयक और नगर पालिका एवं अन्य कानून विधेयक पारित कर दिये गये।
इस बीच, मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने बुधवार को राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात की और चर्चा की। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।
यह मुलाकात इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि राज्यपाल ने हाल में मुडा द्वारा भूखंड आवंटित करने में कथित फर्जीवाड़े के संबंध में मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
एक अधिकारी ने हालांकि बताया कि मुख्यमंत्री ने लंबित विधेयकों पर चर्चा के लिए राज्यपाल से मुलाकात की।
भाषा
देवेंद्र