केंद्रीय बजट मोदी सरकार के राजनीतिक दिवालियेपन को दर्शाता है: तृणमूल कांग्रेस
सिम्मी प्रशांत
- 23 Jul 2024, 03:55 PM
- Updated: 03:55 PM
कोलकाता, 23 जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस ने केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार पर मंगलवार को तीखा हमला किया और कहा कि केंद्रीय बजट सरकार के वित्तीय और राजनीतिक दिवालियेपन को दर्शाता है।
पार्टी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए ‘केंद्रीय बजट 2024’ शब्दावली को खारिज करते हुए इसे ‘आंध्र-बिहार बजट’ बताया।
तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, ‘‘कुल नतीजा सिफर है, क्योंकि बंगाल को लगातार प्रताड़ित और वंचित किया जा रहा है।’’
अभिषेक बनर्जी ने संसद परिसर के बाहर कहा, ‘‘आपने देखा है कि कैसे बंगाल को इस भाजपा सरकार द्वारा लगातार वंचित रखा गया है। क्या बंगाल से 12 भाजपा सांसदों के चुने जाने का कोई सकारात्मक परिणाम हुआ?’’
उन्होंने बंगाल के भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी की इस टिप्पणी का जिक्र किया कि ‘‘जो हमारे साथ है, हम उनके साथ हैं।’’
अभिषेक बनर्जी ने कहा, ‘‘उन्होंने (अधिकारी ने) जो कहा वह आज साबित हो गया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने केवल अपनी सरकार बचाने के लिए बिहार और आंध्र प्रदेश को विशेष पैकेज आवंटित किए हैं। हमें किसी भी राज्य को कुछ भी आवंटित किए जाने से कोई समस्या नहीं है, लेकिन बंगाल को वंचित क्यों रखा जाना चाहिए?’’
उन्होंने कहा, ‘‘बंगाल ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाई है लेकिन उसी बंगाल को वंचित रखा गया है और लोग निश्चित रूप से इसका फिर करारा जवाब देंगे।’’
अभिषेक बनर्जी ने बाद में ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘यह बजट एक विफल सरकार की विफल वित्त मंत्री द्वारा पेश किया गया शून्य वारंटी वाला पूरी तरह से विफल बजट है। बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई और बढ़ती मुद्रास्फीति जैसे जरूरी मुद्दों से निपटने के बजाय भाजपा ने अपने गठबंधन सहयोगियों को रिश्वत देने के लिए बजट तैयार किया है ताकि सरकार के गिरने को टाला जा सके।’’
तृणमूल के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘इस बजट को केंद्रीय बजट नहीं कहा जाना चाहिए। यह आंध्र प्रदेश और बिहार को खुश रखने वाला बजट है। यह अपनी कुर्सी बचाने और कुछ अन्य को खुश रखने के लिए लाया गया बजट है।’’
घोष ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की केंद्र सरकार पर पश्चिम बंगाल की उपेक्षा करने और राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रशासन द्वारा शुरू की गई सफल सामाजिक कल्याण योजनाओं की नकल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बजट देश के मूल मुद्दों से निपटने में विफल रहा और केवल आंकड़ों में हेरफेर किया गया एवं बयानबाजी की गई।
पूर्व राज्यसभा सदस्य ने बजट प्रस्तावों को केंद्र के वित्तीय और राजनीतिक दिवालियेपन का प्रतीक बताया।
भाजपा की प्रदेश इकाई के प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य समिक भट्टाचार्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि केंद्रीय बजट पूरे पूर्वी क्षेत्र के विकास को गति देगा, जिसका बंगाल भी एक हिस्सा है।
भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘यह बजट विकासोन्मुखी है और इसका उद्देश्य पूरे पूर्वी क्षेत्र में आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे के विकास को गति देना है, जिसका हिस्सा बंगाल भी है। केवल तृणमूल ही इसे देख नहीं पा रही...।’’
भाजपा नेता और पार्टी की युवा शाखा के प्रदेश अध्यक्ष इंद्रनील खान ने बजट की प्रशंसा करते हुए कैंसर की दवाओं पर मूल सीमा शुल्क माफ करने का उल्लेख किया।
पेशे से चिकित्सक खान ने कहा, ‘‘कैंसर की दवाओं पर मूल सीमा शुल्क माफ करने के माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्णय से इस बीमारी से जूझ रहे रोगियों को बड़ी राहत मिलेगी।’’
केंद्रीय बजट में मंगलवार को बिहार के लिए कई बड़े कदम उठाए गए। इनमें राज्य में विभिन्न परियोजनाओं के लिए 60,000 करोड़ रुपये से अधिक के परिव्यय का प्रस्ताव किया गया। इनमें तीन एक्सप्रेसवे, एक बिजली संयंत्र, विरासत गलियारों, नए हवाई अड्डे एवं खेल बुनियादी ढांचे के लिए योजनाओं की रूपरेखा पेश की गई।
आम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तीन सड़क संपर्क परियोजनाओं - पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे, बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे, तथा बोधगया, राजगीर, वैशाली और दरभंगा एक्सप्रेसवे और बक्सर में गंगा नदी पर एक अतिरिक्त दो-लेन पुल के विकास के लिए केंद्र के समर्थन की घोषणा की।
सीतारमण ने कहा कि इन चार परियोजनाओं की कुल लागत 26,000 करोड़ रुपये होगी। सरकार बाढ़ से निपटने के लिए राज्य को 11,500 करोड़ रुपये उपलब्ध कराएगी।
आंध्र प्रदेश के लिए बजट प्रावधान के बारे में सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि केंद्र सरकार अमरावती के विकास के उद्देश्य से आंध्र प्रदेश को 15,000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।
उन्होंने कहा कि केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार पोलावरम सिंचाई परियोजना के वित्तपोषण और उसे जल्द पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जिसे आंध्र प्रदेश और उसके किसानों के लिए जीवन रेखा माना जाता है।
भाषा
सिम्मी