विपक्षी दलों ने कावंड़ यात्रा संबधी आदेश पर उच्चतम न्यायालय की रोक का स्वागत किया
हक हक प्रशांत
- 22 Jul 2024, 08:22 PM
- Updated: 08:22 PM
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने सोमवार को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों के उन आदेश पर अंतरिम रोक लगाने वाले उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया, जिसमें कहा गया था कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर भोजनालयों को मालिकों के नाम प्रदर्शित करने होंगे।
मामले में याचिकाकर्ताओं में से एक और तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने दोनों राज्य सरकारों के फैसले को असंवैधानिक बताया और अदालत के आदेश को सभी भारतीय नागरिकों की जीत बताया।
मोइत्रा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमें अभी पूरी तरह से अवैध और असंवैधानिक आदेश पर स्थगन मिला है, जिसे उत्तर प्रदेश ने शुरू किया था...इस आदेश को पहले मुजफ्फरनगर पुलिस ने लागू किया और फिर इसे पूरे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों तक विस्तारित कर दिया गया।''
उन्होंने कहा, ‘‘कांवड़ यात्रा मार्ग पर सभी दुकानों और प्रतिष्ठानों को प्रतिष्ठान के मालिकों और कर्मचारियों के नाम बताने की आवश्यकता थी। इससे धार्मिक भेदभाव हो रहा था।’’
कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने एक बयान में कहा, ‘‘हम उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारों के पूरी तरह से असंवैधानिक आदेशों पर उच्चतम न्यायालय द्वारा अंतरिम रोक लगाए जाने का स्वागत करते हैं। इन सरकारों ने सभी दुकानदारों, भोजनालयों से था कि वे कांवड़ यात्रा के दौरान अपने मालिकों और कर्मचारियों के नाम का उल्लेख बाहर बोर्ड पर करें। यह असंवैधानिक था और कांग्रेस समेत विपक्ष ने इसका विरोध किया था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम बहुत खुश हैं कि उच्चतम न्यायालय ने इतना कड़ा आदेश दिया है और हमें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री अपने मुख्यमंत्रियों को उनके 'राज धर्म’ के बारे में जागरूक करेंगे। दुर्भाग्य से वह वही प्रधानमंत्री हैं, जिन्हें गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ‘राज धर्म’ का पालन करने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने अटल जी की अवहेलना की थी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि उनके मुख्यमंत्री उनकी अवहेलना नहीं करेंगे। उनकी पार्टी में प्रधानमंत्री की स्थिति काफी कमजोर हो गई है, फिर भी हमें उम्मीद है कि वह उस स्थिति को फिर से हासिल करेंगे और अपने मुख्यमंत्रियों को ऐसे असंवैधानिक कदमों में शामिल होने से रोकेंगे।’’
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भोजनालयों के लिए निर्देश और साथ ही सरकारी कर्मचारियों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की गतिविधियों में भाग लेने की अनुमति देने का निर्णय, भाजपा की हताशा को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि सांप्रदायिकता की राजनीति अपने आखिरी दौर में है, इसलिए ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं।
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सत्तारूढ़ दल का दीपक फड़फड़ा रहा है और यह जल्द बुझ जाएगा।
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने कहा, ‘‘मैं दिल की गहराइयों से उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करता हूं। उन्होंने संविधान की रक्षा की है।’’
उन्होंने कहा कि इस निर्देश का उद्देश्य सांप्रदायिक विभाजन को गहरा करना है।
आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के सांसद चन्द्रशेखर ने कहा कि लोग अपनी आजीविका के मुद्दों पर बात करना चाहते हैं और कांवड़ यात्रा के नाम पर हो रहे 'प्रयोग' को स्वीकार नहीं करेंगे।
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