हिमाचल प्रदेश में शिमला और कांगड़ा संसदीय क्षेत्रों के बीच स्पष्ट विभाजन
गोला वैभव
- 17 Mar 2024, 09:31 AM
- Updated: 09:31 AM
शिमला, 17 मार्च (भाषा) हिमाचल प्रदेश के शिमला और कांगड़ा संसदीय क्षेत्रों में विधानसभा सीटों की संख्या भले ही समान है लेकिन जब मंत्रिमंडल में सदस्यों को चुनने की बात आती है तो कांगड़ा के मुकाबले शिमला को ज्यादा तरजीह दी जाती है।
कांग्रेस सरकार के मौजूदा मंत्रिमंडल में पांच मंत्री, एक विधानसभा उपाध्यक्ष और तीन मुख्य संसदीय सचिव शिमला से हैं जबकि दो मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और दो मुख्य संसदीय सचिव कांगड़ा से हैं।
दोनों संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में 17-17 विधानसभा सीटें हैं।
कांगड़ा लोकसभा सीट में कांगड़ा जिले की 13 विधानसभा सीट और चंबा जिले से चार सीट हैं। शिमला लोकसभा सीट में शिमला जिले से सात विधानसभा सीट और सोलन तथा सिरमौर जिलों से पांच-पांच विधानसभा सीट हैं।
अगर अब तक कि प्रवृत्ति पर यकीन करें तो कांगड़ा को भले ही अपेक्षाकृत रूप से नजरअंदाज किया जाता रहा है लेकिन राज्य में सत्ता की कुंजी उसके पास है।
यह एक तरह का नियम बन गया है कि जो पार्टी कांगड़ा जिले में जीत हासिल करती है, वही राज्य में सरकार बनाती है। 2022 के विधानसभा चुनाव में यह नियम एक बार फिर सही साबित हुआ जब कांग्रेस ने कांगड़ा से 10 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करते हुए सरकार बनायी।
शुरुआत में कांगड़ा से केवल एक विधायक को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। हालांकि, पार्टी में तनाव शुरू होने के बाद दिसंबर 2023 में मंत्रिमंडल विस्तार में एक और मंत्री को शामिल किया गया।
वर्ष 1966 में कांगड़ा का हिमाचल प्रदेश में विलय किए जाने के बाद से ही लोगों के मन में यह धारणा है कि इस जिले को नजरअंदाज किया जाता रहा है।
इस असमानता की धारणा का आगामी लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को फायदा मिल सकता है जो राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद से उत्साहित है और इस हिंदू बहुल राज्य में लोगों की भावनाओं का लाभ उठा सकती है।
भाजपा का तब भी हौसला बढ़ा जब हाल में हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के छह विधायकों ने उसके पक्ष में मतदान किया।
वहीं, कांग्रेस पार्टी अंदरुनी कलह से जूझ रही है और उस पर शिमला जिले में सत्ता के जरूरत से अधिक केंद्रीकरण का आरोप है।
ऐसी भी अटकलें हैं कि भाजपा कांग्रेस के छह बागी विधायकों में से एक सुधीर शर्मा को कांगड़ा संसदीय सीट से उम्मीदवार बना सकती है।
लंबे समय से चली आ रही परंपरा के अनुसार, जब कांग्रेस राज्य में सत्ता में आती है तो उसके मुख्यमंत्री शिमला या सिरमौर के पुराने इलाकों से आते हैं, वहीं जब भाजपा सरकार बनाती है तो मुख्यमंत्री कांगड़ा और हमीरपुर के विलय वाले क्षेत्रों से आते हैं।
राज्य को 2022 में पहली बार विलय वाले इलाकों से सुखविंदर सिंह सुक्खू के रूप में एक मुख्यमंत्री मिला।
भाजपा ने 2014 और 2019 में हिमाचल प्रदेश में सभी चार लोकसभा सीटें जीती थी। हालांकि, मंडी संसदीय सीट से सांसद राम स्वरूप शर्मा के निधन के कारण 2021 में उपचुनाव कराने पड़े थे जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी और कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने जीत हासिल की थी।
भाषा
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