आबकारी मामला: केजरीवाल ने सीबीआई की ओर से की गई गिरफ्तारी को उच्च न्यायालय में चुनौती दी
देवेंद्र पवनेश
- 17 Jul 2024, 09:35 PM
- Updated: 09:35 PM
नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई द्वारा की गई अपनी गिरफ्तारी को बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी और कहा कि यह एक ‘‘इंश्योरेंस अरेस्ट’’ है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह जेल में रहें।
उच्च न्यायालय ने मुख्यमंत्री केजरीवाल की उन याचिकाओं पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया, जिनमें आबकारी नीति मामले में केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा उनकी गिरफ्तारी किये जाने को चुनौती दी गई है और अंतरिम जमानत का अनुरोध किया गया है।
न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने मुहर्रम का अवकाश होने के बावजूद सुनवाई की। उन्होंने केजरीवाल और सीबीआई के वकीलों की दलीलें सुनीं और याचिकाओं पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
उच्च न्यायालय ने उनकी नियमित जमानत याचिका पर अगली सुनवाई की तिथि 29 जुलाई तय की है।
सीबीआई के वकील ने केजरीवाल की दोनों दलीलों का विरोध किया और कहा कि उनकी गिरफ्तारी को ‘‘इंश्योरेंस अरेस्ट’’ कहना अनुचित है।
केजरीवाल के वकील ने दलील दी कि सीबीआई उन्हें गिरफ्तार नहीं करना चाहती थी और उनके पास उन्हें हिरासत में लेने के लिए कोई सामग्री नहीं थी और घटनाओं के अनुक्रम से यह स्पष्ट हो गया कि उन्हें जेल में ही रखने के लिए गिरफ्तार किया गया था।
आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने दलील दी, ‘‘दुर्भाग्यवश यह रिहाई रोकने के लिए की गई गिरफ्तारी (इंश्योरेंस अरेस्ट) है। मेरे पास (ईडी के मामलों में) बहुत ही सख्त प्रावधानों में प्रभावी रिहाई के तीन आदेश हैं...इन आदेशों से पता चलता है कि व्यक्ति रिहाई के लिए अधिकृत है। उसे रिहा किया जाना चाहिए लेकिन उसकी रिहाई न हो यह सुनिश्चित करने के लिए उसे गिरफ्तार किया गया है।’’
सिंघवी ने कहा कि केजरीवाल ‘‘आतंकवादी नहीं’’ बल्कि दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि उनकी गिरफ्तारी कानून के तहत नहीं हुई है और मुख्यमंत्री होने के नाते वह जमानत के हकदार हैं।
उन्होंने दलील दी, ‘‘यह एक दुर्लभतम मामला है। वह (केजरीवाल) पहले से ही ईडी मामले में हिरासत में हैं और सीबीआई पिछले एक साल से कुछ नहीं कर रही है और फिर अचानक उन्हें गिरफ्तार कर लेती है।’’
उन्होंने दलील दी कि जो लोग ऐसा कर रहे हैं, वे चाहते हैं कि वह किसी भी तरह हिरासत में रहें।
सिंघवी ने कहा कि केजरीवाल के वीआईपी दर्जे ने उनकी स्थिति आम आदमी से भी बदतर बना दी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रक्त शर्करा के स्तर में उतार-चढ़ाव हो रहा है।
उन्होंने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के मामले का भी जिक्र किया और कहा, ‘‘यह (केजरीवाल की गिरफ्तारी) एक गैर-आवश्यक गिरफ्तारी है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।’’
सिंघवी ने कहा, ‘‘हम सभी ने हाल में अखबारों में पढ़ा कि एक के बाद एक कई मामलों में खान को रिहा कर दिया गया, लेकिन जिस दिन वह जेल से बाहर आये, उन्हें किसी दूसरे मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। अब वे (पाकिस्तानी अधिकारी) उनके खिलाफ एक बड़ा मामला दर्ज करना चाहते हैं। मैं नहीं चाहता कि हमारे देश में भी ऐसी ही चीजें हों।’’
सीबीआई की ओर पेश हुए अधिवक्ता डी.पी.सिंह ने केजरीवाल द्वारा दाखिल याचिकाओं का विरोध किया।
केजरीवाल को गिरफ्तारी से पहले नोटिस न दिए जाने के मुद्दे पर सिंह ने दलील दी कि दिल्ली कारागार नियम के तहत अदालत की हिरासत में मौजूद किसी व्यक्ति से पूछताछ करने के लिए अदालत की अनुमति लेना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि सीबीआई को केजरीवाल को पहले से सूचना देने की जरूरत नहीं थी।
सिंह ने कहा कि केजरीवाल से 24 जून को सीबीआई ने पूछताछ की थी, लेकिन उन्हें गिरफ्तार नहीं किया और यदि यह ‘इंश्योरेंस अरेस्ट’ होता, तो वह सीआरपीसी की धारा 41 के तहत गिरफ्तारी के अपने अधिकार का इस्तेमाल कर सकती थी।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन मैं (सीबीआई) ऐसा नहीं करता। हम वापस आते हैं और उनके बयान का मूल्यांकन करते हैं। और फिर हम तय करते हैं कि हमें उन्हें गिरफ्तार करना चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि एजेंसी को आरोपी को बुलाने का समय तय करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल की भूमिका पहले स्पष्ट नहीं थी, क्योंकि आबकारी नीति आबकारी मंत्री के अधिकार क्षेत्र में आती है। उन्होंने कहा कि हालांकि, जब उनकी संलिप्तता प्रासंगिक हो गई तो उन्हें सीबीआई ने तलब किया।
सिंह ने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने उन्हें 10 मई को सिर्फ चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत दी थी। मेरे हिसाब से उन्हें गिरफ्तार करने पर कोई रोक नहीं है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मामले में वह जमानत पर बाहर आए थे।’’
केजरीवाल को सीबीआई ने 26 जून को तिहाड़ जेल से गिरफ्तार किया था जहां पर वह पहले ही ईडी द्वारा दर्ज धनशोधन के मामले में न्यायिक हिरासत में थे।
मुख्यमंत्री को ईडी ने 21 मार्च को गिरफ्तार किया था और सुनवाई अदालत ने 20 जून को उन्हें धनशोधन के मामले में जमानत दे दी थी। हालांकि, सुनवाई अदालत के फैसले पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी थी।
केजरीवाल को उच्चतम न्यायालय ने 12 जुलाई को धनशोधन के मामले में अंतरिम जमानत दी थी।
विवादास्पद आबकारी नीति को दिल्ली के उपराज्यपाल द्वारा इसे बनाने एवं लागू करने में हुई कथित अनियमितता एवं भ्रष्टाचार की जांच सीबीआई को सौंपने के बाद 2022 में रद्द कर दिया गया था।
सीबीआई और ईडी के मुताबिक लाइसेंस धारकों को अनुचित लाभ पहुंचाने के इरादे से आबकारी नीति में बदलाव कर अनियमितता की गई।
भाषा
देवेंद्र