के पी शर्मा ओली ने चौथी बार नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली
अमित दिलीप
- 15 Jul 2024, 08:28 PM
- Updated: 08:28 PM
(शिरीष बी प्रधान)
काठमांडू, 15 जुलाई (भाषा) के. पी. शर्मा ओली ने सोमवार को चौथी बार नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। उनके नेतृत्व वाली नयी गठबंधन सरकार के समक्ष देश में राजनीतिक स्थिरता प्रदान करने की कठिन चुनौती होगी।
नेपाल की सबसे बड़ी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता ओली को रविवार को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने प्रधानमंत्री नियुक्त किया था। ओली को संसद में सबसे बड़ी पार्टी नेपाली कांग्रेस (एनसी) और कुछ अन्य छोटे दलों का समर्थन प्राप्त है।
ओली (72) ने पुष्प कमल दाहाल ‘प्रचंड’ की जगह ली है, जो शुक्रवार को प्रतिनिधि सभा में विश्वास मत हासिल नहीं कर पाये थे।
पौडेल ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-यूनीफाइड मार्क्सिस्ट लेनिनिस्ट (सीपीएन-यूएमएल) के अध्यक्ष ओली को राष्ट्रपति भवन के मुख्य भवन शीतल निवास में आयोजित एक समारोह शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह आधे घंटे से अधिक देरी से शुरू हुआ।
समाचार पोर्टल ‘माई रिपब्लिका’ के अनुसार, नेपाली कांग्रेस पार्टी के भीतर विवाद के चलते सरकार में शामिल होने वाले मंत्रियों के नामों को अंतिम रूप देने में देरी के कारण ही शपथ ग्रहण समारोह में विलंब हुआ।
राष्ट्रपति ने दो उप प्रधानमंत्रियों प्रकाश मान सिंह और बिष्णु पौडेल को भी शपथ दिलाई। इसके अलावा 19 अन्य मंत्रियों ने भी शपथ ली। सिंह शहरी विकास मंत्रालय का कार्यभार भी संभालेंगे, जबकि विष्णु प्रकाश पौडेल वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभालेंगे।
नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा की पत्नी आरजू राणा देउबा को विदेश मंत्री बनाया गया है।
सरकार में नेपाली कांग्रेस से 10 कैबिनेट मंत्री हैं। इसी तरह प्रधानमंत्री को छोड़कर, सीपीएन-यूएमएल से आठ, जनता समाजवादी पार्टी से दो और लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी से एक मंत्री हैं।
शपथ ग्रहण समारोह में निवर्तमान प्रधानमंत्री प्रचंड, विदेशी राजनयिक और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी शामिल हुए।
इससे पहले, रविवार को राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी एक नोटिस के अनुसार, राष्ट्रपति पौडेल ने नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 76(2) के तहत ओली को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया था।
शुक्रवार देर रात ओली ने नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश किया और प्रतिनिधि सभा के 165 सदस्यों के हस्ताक्षर वाला समर्थन पत्र सौंपा, जिस पर सीपीएन-यूएमएल से 77 तथा नेपाली कांग्रेस से 88 सदस्यों के दस्तखत थे।
ओली को अब नियुक्ति के 30 दिनों के भीतर संसद में विश्वास मत हासिल करना होगा। उम्मीद है कि वह विश्वासमत आसानी से हासिल कर लेंगे, क्योंकि सरकार के लिए 275 सीट वाली प्रतिनिधि सभा में कम से कम 138 मतों की आवश्यकता होगी।
प्रचंड को विश्वास मत का इसलिए सामना करना पड़ा, क्योंकि पिछले सप्ताह की शुरूआत में ओली की पार्टी ने उनकी (प्रचंड नीत) सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था और नयी गठबंधन सरकार बनाने के लिए देउबा के साथ सात सूत्री समझौता कर लिया था।
सीपीएन-माओइस्ट सेंटर के अध्यक्ष प्रचंड शुक्रवार को शक्ति परीक्षण के दौरान विश्वासमत हासिल नहीं कर पाए थे। नेपाली कांग्रेस और सीपीएन-यूएमएल के बीच एक जुलाई को हुए समझौते के अनुसार, दोनों दल 2027 में होने वाले अगले आम चुनाव तक बारी-बारी से सरकार का नेतृत्व करेंगे।
ओली 11 अक्टूबर 2015 से 3 अगस्त 2016 तक नेपाल के प्रधानमंत्री रहे और फिर 5 फरवरी 2018 से 13 जुलाई 2021 तक प्रधानमंत्री रहे। इसके बाद भी वह तत्कालीन राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी की वजह से 13 मई 2021 से 13 जुलाई 2021 तक पद पर बने रहे। बाद में उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुनाया कि ओली का प्रधानमंत्री पद पर बने रहना असंवैधानिक है।
नेपाल को लगातार राजनीतिक उथल-पुथल का सामना करना पड़ा है और गणतंत्र प्रणाली लागू होने के बाद पिछले 16 वर्षों में देश ने 14 सरकारें देखी हैं।
‘काठमांडू पोस्ट’ अखबार ने संपादकीय में कहा कि नयी ओली सरकार की प्राथमिकता स्थिर अर्थव्यवस्था में जान फूंकने की होगी।
इसमें कहा गया है, "दो तिहाई बहुमत से मिला राजनीतिक स्थिरता का संदेश मददगार होगा। फिर भी इस 'अस्वाभाविक' कांग्रेस-कम्युनिस्ट गठबंधन सरकार के भविष्य को लेकर देश के अंदर और बाहर, कुछ संदेह है।"
इसमें कहा गया है, "प्रधानमंत्री के रूप में ओली को सरकार में अस्थिरता के चक्र को रोकने के लिए कुछ कठोर व्यक्तिगत समायोजन करने के लिए तैयार रहना चाहिए।"
भाषा अमित