निलंबित 'आप' विधायक कुंवर विजय प्रताप ने पंजाब विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया
भाषा
- 02 Nov 2026, 01:46 PM
- Updated: 01:46 PM
चंडीगढ़, दो नवंबर (भाषा) आम आदमी पार्टी (आप) से निलंबित विधायक और पूर्व आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने सोमवार को कहा कि उन्होंने पंजाब विधानसभा के विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है।
अमृतसर उत्तर सीट से विधायक सिंह ने अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान को भेज दिया है।
सिंह ने 'फेसबुक' पर एक पोस्ट में अपना इस्तीफा साझा करते हुए लिखा, ''मैंने पंजाब विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।''
पंजाब विधानसभा अध्यक्ष को भेजे अपने पत्र में सिंह ने लिखा, ''मैं इसके माध्यम से सूचित करना चाहता हूं कि एक नवंबर 2026 से मैं सदन में अपनी सीट से इस्तीफा दे रहा हूं।''
सिंह ने पार्टी से भी इस्तीफा दे दिया। 'आप' की पंजाब इकाई के अध्यक्ष अमन अरोड़ा को भेजे एक पत्र में सिंह ने लिखा, ''मैं आपको सूचित करना चाहता हूं कि मैंने एक नवंबर 2026 से पंजाब विधानसभा के सदस्य के रूप में अपना इस्तीफा दे दिया है। मैं तत्काल प्रभाव से आम आदमी पार्टी के सभी पदों और जिम्मेदारियों से भी इस्तीफा देता हूं।''
उन्होंने इस पत्र की एक प्रति 'आप' के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भी भेजी।
आप के लिए झटका माने जा रहे इस घटनाक्रम के बीच सिंह के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की संभावना है।
उनका यह इस्तीफा 'आप' के दो विधायकों - पंजाब के पटियाला जिले में समाना से चेतन सिंह जोड़ामाजरा और सनौर से हरमीत सिंह पठानमाजरा के रविवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के ठीक बाद आया है।
अपने 'फेसबुक' पोस्ट में सिंह ने अपने विधानसभा क्षेत्र के लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें जो प्यार और सम्मान मिला है उसके लिए वह अपनी आखिरी सांस तक लोगों के आभारी रहेंगे।
सिंह ने लिखा, ''आप सभी के समर्थन और ईश्वर के आशीर्वाद से हमें एकजुट होकर 'फीता काटने' वाली राजनीति से ऊपर उठना होगा। पंजाब इस समय नशीले पदार्थों, जबरन वसूली, गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार से जूझ रहा है, उसे फिर से एक प्रगतिशील और अग्रणी राज्य बनाने के लिए मिलकर काम करना होगा।''
उन्होंने दावा किया कि एक विधायक के रूप में उन्होंने अपने 90 प्रतिशत लक्ष्य पूरे किए।
सिंह ने अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के बारे में कहा कि उन्होंने राजनीति में 'माई-बाप' संस्कृति को खत्म किया और जनता को अपनी प्रेरणा का एकमात्र स्रोत मानकर काम किया।
उन्होंने कहा, ''पंजाब विधानसभा में मैंने हमेशा अमृतसर के लोगों की आवाज उठाई है।''
उन्होंने पानी की आपूर्ति, सर्किट हाउस और कंपनी बाग की सीवरेज व्यवस्था, प्रदूषित नालों, गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, सरकारी मेडिकल कॉलेज, स्वरूप रानी कॉलेज और बरगारी बेअदबी कांड जैसे मुद्दों का जिक्र किया।
उन्होंने कहा, ''पहली बार पंजाब विधानसभा में विशिष्ट इलाकों से जुड़े मुद्दे उठाए गए और इसके लिए सड़कों तथा मोहल्लों के नाम तक स्पष्ट रूप से बताए गए।''
उन्होंने कहा, ''मेरा लक्ष्य आप सभी के साथ मिलकर एक ऐसी भविष्य की रणनीति बनाना होगा, जिससे साफ-सुथरी राजनीति और पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित हो सके। मेरा एकमात्र उद्देश्य 'पंजाब सबसे पहले' है। इसके अलावा मेरा कोई निजी स्वार्थ या छिपा हुआ मकसद नहीं है।''
सिंह ने रविवार को एक अन्य फेसबुक पोस्ट में आरोप लगाया कि भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार ने 'स्वराज' आंदोलन से निकली क्रांतिकारी विचारधारा वाली एक पार्टी को पूरी तरह से ''बर्बाद'' कर दिया है।
उन्होंने कहा, ''इस पार्टी के गठन का मूल विचार रही 'स्वराज' नाम की किताब अब सिर्फ मेरे पास ही रह गई है।''
पूर्व आईपीएस अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि पूरे पंजाब में अपराध, नशीले पदार्थों का कारोबार, जबरन वसूली और गुंडागर्दी का बोलबाला है। पिछले साल जून में पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में सिंह को पांच साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया गया था।
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ पंजाब सतर्कता ब्यूरो की कार्रवाई पर सवाल उठाने के बाद सिंह को निलंबित कर दिया गया था। मजीठिया को आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
सिंह कई मुद्दों पर 'आप' सरकार के मुखर आलोचक रहे।
उन्होंने इससे पहले फरीदकोट में 2015 के बेअदबी और पुलिस गोलीबारी के मामलों से निपटने के तरीके पर नाराजगी जताई थी और इस मामले में न्याय की मांग की थी।
सिंह पंजाब पुलिस के उस विशेष जांच दल (एसआईटी) का हिस्सा थे जिसने 2015 की कोटकपुरा और बहबल कलां पुलिस गोलीबारी की घटनाओं की जांच की थी।
उन्होंने विधानसभा में भी कई बार 2015 की बेअदबी का मुद्दा उठाया था।
पिछले साल अमृतसर में जहरीली शराब के सेवन से 20 से अधिक लोगों की मौत के बाद भी सिंह ने भगवंत मान सरकार की आलोचना की थी।
सिंह ने 2021 में पुलिस सेवा से समय से पहले सेवानिवृत्ति लेने के बाद आम आदमी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। इसके बाद वह 2022 के विधानसभा चुनाव में अमृतसर उत्तर सीट से विधायक निर्वाचित हुए थे।
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