तमिलनाडु: थेनी उप कारागार से 17 विचाराधीन कैदी फरार, चार को फिर से पकड़ा गया
भाषा
- 27 Oct 2026, 01:28 PM
- Updated: 01:28 PM
थेनी (तमिलनाडु), 27 अक्टूबर (भाषा) तमिलनाडु के थेनी में एंडीपट्टी के पास थेक्कमपट्टी उप-कारागार से 17 विचाराधीन कैदी फरार हो गए। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
यह घटना सोमवार देर रात को हुई। हालांकि, जेल से कैदियों के फरार होने की इस बड़ी घटना के कुछ ही समय बाद उनमें से चार को फिर से पकड़ लिया गया।
कैदियों ने मिर्गी का दौरा पड़ने का नाटक करके एक सुनियोजित तरीके से जेल से फरार होने की साजिश रची थी।
पुलिस के अनुसार, जेल की एक ही कोठरी में बंद कुछ कैदियों ने ड्यूटी पर मौजूद जेल प्रहरी को आवाज दी और कहा कि एक कैदी की तबीयत बहुत खराब है एवं उसे तुरंत मदद की जरूरत है।
उसने बताया कि जब जेलकर्मी मदद के लिए बैरक का ताला खोलकर अंदर पहुंचे, तो कैदियों ने अचानक उन पर हमला कर दिया। उन्होंने सुरक्षाकर्मियों को काबू में कर लिया। इसके बाद कैदी जेल परिसर से फरार हो गए।
पुलिस ने बताया कि इस घटना में तीन अधिकारी घायल हो गए।
तमिलनाडु में 17 विचाराधीन कैदियों के जेल से फरार होने के बाद उनकी तलाश में कई जिलों और अंतरराज्यीय स्तर पर बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया गया है। पड़ोसी राज्य केरलम की पुलिस को भी सतर्क कर दिया गया है। पश्चिमी घाट के जंगलों और इडुक्की जिले में सीमा के आसपास गहन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।
पुलिस ने मंगलवार सुबह बताया कि फरार कैदियों में से चार को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया है। उनकी पहचान प्रवीण कुमार, सिलंबरासन, राजा सिकंदर और राजकुमार के रूप में हुई है, जबकि 13 कैदी अब भी फरार हैं।
पुलिस महानिरीक्षक (दक्षिण क्षेत्र) विजयेंद्र बिदारी ने फरार कैदियों को खोजने के लिए 17 विशेष टीम बनाई हैं। साथ ही, पड़ोसी डिंडीगुल जिले में भी वाहनों की जांच तेज कर दी गई है क्योंकि विचाराधीन कैदियों में से कई मदुरै और उसके आसपास के इलाकों के रहने वाले हैं।
स्थानीय पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है। एक सूत्र ने बताया कि उप-कारागार में हुई गंभीर सुरक्षा चूक की उच्च-स्तरीय जांच जारी है।
इस घटना को लेकर राज्य में राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) को निशाना बनाते हुए जेल से कैदियों के फरार होने को सुरक्षा व्यवस्था की शर्मनाक नाकामी बताया है। उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की आलोचना की है।
ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) महासचिव ई. के. पलानीस्वामी ने कहा कि थेनी जिले की जेल से 17 कैदियों के फरार होने की खबर ''चौंकाने वाली'' है।
पलानीस्वामी ने एक बयान में कहा, ''वकीलों की नियुक्ति में भ्रष्टाचार और सरकार के खिलाफ अदालती मामलों के कारण विधि विभाग पहले ही उपहास का पात्र बन चुका है। बिजली खरीद घोटाले और बार-बार बिजली कटौती के कारण बिजली विभाग भी विवादों में है। अब इस सूची में जेल विभाग भी शामिल हो गया है। सबसे खास बात यह है कि इन तीनों विभागों की जिम्मेदारी एक ही मंत्री संभाल रहे हैं।''
पलानीस्वामी ने मंत्री आर. निर्मल कुमार की प्रशासनिक क्षमताओं पर तंज कसते हुए कहा कि पूरा शहर उनका मजाक उड़ा रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि चेन्नई की पुझल जेल से दो कैदी भाग गए थे।
उन्होंने कहा, ''ऐसा लगता है कि इस सरकार और मंत्री के पास इन सब बातों पर ध्यान देने का समय नहीं है।''
कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री विजय पर निशाना साधते हुए पलानीस्वामी ने कहा कि जब जेल ही सुरक्षित नहीं है और कैदी प्रहरियों पर हमला करके फरार हो सकते हैं, तो इस सरकार में आम आदमी सड़कों पर कैसे सुरक्षित रह सकता है?
उन्होंने कहा कि राज्य में हत्या की घटनाएं बढ़ी हैं, महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े हैं, टीवीके के कुछ पदाधिकारियों की कथित संलिप्तता के साथ नशीले पदार्थों की तस्करी जारी है, बच्चे लगातार लापता हो रहे हैं और जेल से कैदियों के भागने की घटनाएं हो रही हैं, जो टीवीके शासन की मौजूदा स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने सरकार से फरार कैदियों को पकड़कर वापस जेल भेजने और तमिलनाडु में कानून-व्यवस्था पर उचित ध्यान देने की अपील की।
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने कहा, ''थेनी जेल से कैदियों का फरार होना टीवीके सरकार की शर्मनाक नाकामी है और मुख्यमंत्री विजय के प्रशासन पर सीधा सवाल है। 26 अक्टूबर 2026 की रात थेनी उप-कारागार से 17 विचाराधीन कैदी बेहद सामान्य तरीके से जेल से फरार हो गए। सभी एक ही कोठरी में बंद थे। एक कैदी ने दौरा पड़ने का नाटक किया, जबकि बाकी इंतजार करते रहे। कर्मचारियों ने दरवाजा खोला तो कैदियों ने उन पर हमला कर दिया और बाहर निकल गए। इस दौरान द्वितीय श्रेणी के कर्मचारी थंगापांडी के सिर में चोट आई।''
उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा कि यह कोई अत्यधिक जोखिम वाली जेल तोड़कर भागने की घटना नहीं बल्कि धोखाधड़ी थी जो इसलिए सफल हुई क्योंकि टीवीके सरकार के शासन में जेल सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
इतने सारे विचाराधीन कैदियों को एक साथ रखना, कोठरी खोलने से पहले किसी मेडिकल दावे की जांच नहीं करना और पूरे समूह को कर्मचारियों पर हावी होकर बाहर निकलकर जाने देना, यह सब टीवीके सरकार की अक्षमता, कुप्रबंधन और प्रशासनिक नाकामी को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, ''13 कैदियों के फरार होने के बावजूद अधिकारियों की अब तक की सुस्त प्रतिक्रिया, टीम के गठन और तलाशी अभियानों की महज रस्मी घोषणाएं यह दिखाती हैं कि यह प्रशासन कानून-व्यवस्था को कोई खास अहमियत नहीं देता। जब विचाराधीन कैदी एक फर्जी मेडिकल आपात स्थिति का नाटक करके सरकारी परिसर से आसानी से बाहर निकल सकते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित जेल मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार और उन विभागों का प्रभार संभालने वाले मुख्यमंत्री की बनती है।''
भाषा