ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल नहीं होने का रहमान का फैसला बांग्लादेश के हितों के खिलाफ : हसीना
भाषा
- 14 Oct 2026, 12:26 PM
- Updated: 12:26 PM
नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि भारत में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं होने का उनके देश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान का फैसला ''अपरिपक्व'' था और इससे बांग्लादेश के राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचा।
हसीना ने आगाह किया कि विदेश नीति से जुड़े फैसले व्यक्तिगत प्रतिक्रिया या तात्कालिक राजनीतिक लाभ को ध्यान में रखकर लेना हमेशा नुकसानदेह होता है।
हसीना ने 'पीटीआई-भाषा' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि इस प्रभावशाली समूह के शिखर सम्मेलन में बांग्लादेश की भागीदारी से उनके देश के लिए आर्थिक एवं सामाजिक विकास के नए अवसर खुल सकते थे लेकिन उसने यह मौका गंवा दिया।
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि रहमान ने नयी दिल्ली में उनकी मौजूदगी के कारण शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि दो देशों के संबंध किसी एक व्यक्ति से जुड़े निजी या राजनीतिक पहलुओं के आधार पर तय नहीं किए जा सकते।
हसीना ने रहमान के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक जिम्मेदार सरकार को देश के लिए ''अवसरों के दरवाजे खोलने चाहिए, न कि उन्हें बंद करना चाहिए।''
भारत ने बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल (बिम्सटेक) के मौजूदा अध्यक्ष के रूप में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री रहमान को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया था।
हालांकि, रहमान ने 12 और 13 सितंबर को नयी दिल्ली में आयोजित इस सम्मेलन में शामिल नहीं होने का फैसला किया।
हसीना ने कहा, ''यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि बांग्लादेश ने सम्मेलन में भाग नहीं लेने का फैसला किया। मेरी राय में यह एक अपरिपक्व फैसला था, जो बांग्लादेश के राष्ट्रीय हित में नहीं था।''
उन्होंने कहा, ''ब्रिक्स केवल एक राजनयिक सम्मेलन नहीं है। यह दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक मंच पर लाता है और व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी एवं विकास के क्षेत्रों में सहयोग के अवसर प्रदान करता है। इसमें भाग लेकर बांग्लादेश महत्वपूर्ण अनुभव हासिल कर सकता था और अपने आर्थिक एवं सामाजिक विकास के नए अवसर तलाश सकता था, लेकिन उसने यह मौका गंवा दिया।''
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि विदेश नीति व्यक्तिगत प्रतिक्रिया या अल्पकालिक राजनीतिक गणना को ध्यान में रखकर नहीं चलाई जा सकती।
उन्होंने कहा, ''भारत हमारा सबसे करीबी पड़ोसी और एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक साझेदार है, लेकिन ब्रिक्स के साथ जुड़ना अंतरराष्ट्रीय समुदाय में बांग्लादेश की अपनी स्थिति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।''
हसीना (78) बांग्लादेश में अगस्त 2024 में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के कारण अपनी सरकार गिरने के बाद अपने देश से भारत आ गई थीं और वह तब से दिल्ली में रह रही हैं।
हसीना ने कहा कि 1979 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जियाउर रहमान ने भी नयी दिल्ली की यात्रा की थी, जबकि उस समय वह भारत में रह रही थीं।
हसीना ने लिखित सवालों के जवाब में कहा, ''बांग्लादेश के जनक बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान और मेरे परिवार के सदस्यों की 15 अगस्त 1975 को हत्या तथा तीन नवंबर (1975) को ढाका की केंद्रीय जेल में चार राष्ट्रीय नेताओं की हत्या के बाद जियाउर रहमान असंवैधानिक तरीके से सत्ता में आए थे।''
उन्होंने कहा, ''इसके बाद जब वह 1979 में दिल्ली आए थे, तब मैं दिल्ली में रह रही थी। जब वह 1980 में लंदन गए थे, तब मैं भी लंदन में थी। इन दोनों शहरों में मेरी मौजूदगी उनके वहां जाने में बाधा नहीं बनी।''
हसीना ने कहा, ''तो आज दिल्ली में मेरी मौजूदगी जियाउर रहमान के बेटे तारिक रहमान को भारत आने से क्यों रोकेगी? ऐसे फैसले के पीछे असली वजह क्या है?''
उन्होंने कहा, ''दो देशों के संबंध किसी एक व्यक्ति से जुड़े निजी या राजनीतिक पहलुओं के आधार पर तय नहीं किए जा सकते।''
हसीना ने यह भी जिक्र किया कि उनकी सरकार की विदेश नीति से बांग्लादेश के आर्थिक विकास में किस तरह मदद मिली थी।
उन्होंने कहा, ''मेरे कार्यकाल के दौरान हमने भारत के साथ मजबूत संबंध बनाए रखे और साथ ही चीन, रूस, जापान, अमेरिका, यूरोप एवं कई अन्य साझेदारों के साथ भी सहयोग बढ़ाया।''
हसीना ने कहा, ''एक देश के साथ मित्रता रखने के लिए दूसरे देश से दुश्मनी रखना कभी जरूरी नहीं होता। बांग्लादेश को एक परिपक्व, संतुलित और आत्मविश्वास से भरी विदेश नीति की जरूरत है। एक जिम्मेदार सरकार को देश के लिए अवसरों के दरवाजे खोलने चाहिए, न कि उन्हें बंद करना चाहिए।''
हसीना के पत्रकारों के साथ पांच अगस्त को नयी दिल्ली से ऑनलाइन माध्यम से बातचीत करने के बाद भारत और बांग्लादेश के संबंधों में एक बार फिर तनाव पैदा हो गया।
इस कार्यक्रम के बाद ढाका ने हसीना के प्रत्यर्पण की अपनी मांग दोहराई और इसे रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा से भी जोड़ने की कोशिश की। भारत ने इस कार्यक्रम से खुद को अलग करते हुए कहा था कि न तो इसके आयोजन में उसकी कोई भूमिका थी और न ही वह हसीना की टिप्पणियों का समर्थन करता है।
पूर्व प्रधानमंत्री ने रहमान सरकार की विदेश नीति की भी आलोचना की और कहा कि यह ''स्वतंत्र, संतुलित और राष्ट्रीय हितों पर आधारित'' होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ''बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान का दिया सिद्धांत आज भी हमारा सबसे अच्छा मार्गदर्शन करता है। वह सिद्धांत है- सभी से मित्रता, किसी से बैर नहीं। भारत बांग्लादेश का सबसे करीबी पड़ोसी और मुक्ति संग्राम के समय से उसका ऐतिहासिक मित्र है।''
हसीना ने कहा, ''चीन भी विकास में एक महत्वपूर्ण साझेदार है। जापान, अमेरिका, यूरोप, दक्षिण पूर्व एशियाई देशों का संगठन (आसियान) और मुस्लिम जगत, सभी बांग्लादेश के लिए महत्वपूर्ण हैं। समस्या चीन या किसी अन्य देश के साथ संबंध रखने में नहीं है। समस्या तब शुरू होती है, जब एक देश के साथ संबंधों का इस्तेमाल दूसरे देश के खिलाफ किया जाता है।''
उन्होंने कहा, ''समस्या तब शुरू होती है, जब घरेलू राजनीति के लिए भारत विरोधी बयानबाजी को बढ़ावा दिया जाता है। समस्या तब भी पैदा होती है, जब बड़े फैसले पारदर्शिता के बिना लिए जाते हैं।''
अवामी लीग की नेता ने कहा कि बांग्लादेश इस समय ''गंभीर राष्ट्रीय संकट'' से गुजर रहा है क्योंकि वहां लोकतांत्रिक गतिविधियों के लिए जगह ''खत्म कर'' दी गई है।
उन्होंने कहा, ''न्यायपालिका का इस्तेमाल राजनीतिक बदला लेने के लिए किया गया है। मीडिया की स्वतंत्रता पर पाबंदियां लगाई गई हैं। कानून-व्यवस्था कमजोर हुई है। अल्पसंख्यक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। चरमपंथी ताकतें फिर से सक्रिय हो गई हैं। अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है।''
हसीना ने कहा, ''यह अब केवल अवामी लीग का मुद्दा नहीं रह गया है। यह एक राष्ट्रीय संकट है। देश की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकतों में से एक पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। उसके नेता जेल में हैं या उन्हें छिपकर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा है।''
उन्होंने कहा, ''पार्टी के लाखों समर्थकों को सामान्य राजनीतिक अधिकारों से वंचित कर दिया गया है। अपनी ही आबादी के इतने बड़े हिस्से को अलग-थलग करके कोई देश फिर से स्थिरता हासिल नहीं कर सकता। पूरे देश में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन अवामी लीग के नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों को अप्रत्याशित राजनीतिक उत्पीड़न झेलना पड़ा है।''
हसीना ने अपने बांग्लादेश लौटने के बारे में कोई निश्चित जानकारी दिए बिना कहा कि वह लोकतंत्र बहाल करने के लिए लौट रही हैं।
उन्होंने कहा, ''हजारों लोगों को जेल में डाल दिया गया है और कई अन्य को छिपकर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा है। केवल अपनी राजनीतिक पहचान के कारण कई परिवारों को अपने घर, नौकरियां, कारोबार और आजीविका के साधन गंवाने पड़े हैं।''
हसीना ने कहा, ''मेरी वापसी लोकतंत्र, मतदान के अधिकार और कानून का शासन बहाल करने के संघर्ष का हिस्सा है। मैं बांग्लादेश के लोगों के साथ खड़ी होना चाहती हूं, उनके अधिकारों के लिए लड़ना चाहती हूं और अपने देश में लोकतंत्र, सुरक्षा तथा विकास बहाल करने में मदद करना चाहती हूं।''
उन्होंने कहा, ''बांग्लादेश के लोगों को स्वतंत्र, निष्पक्ष और सभी की भागीदारी वाले चुनाव के जरिए अपना भविष्य तय करने का अवसर मिलना चाहिए इसीलिए मेरी वापसी महत्वपूर्ण होगी। यह बांग्लादेश को उसके लोगों को वापस सौंपने की दिशा में एक कदम होगा।''
हसीना ने साथ ही स्वीकार किया कि बांग्लादेश लौटना उनके लिए जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि वहां की एक अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई है। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह भयभीत नहीं हैं।
अवामी लीग की नेता ने कहा, ''यह पहली बार नहीं है जब मौत मेरे इतने करीब आई है। मेरे पिता, मां, भाइयों और परिवार के लगभग सभी सदस्यों की 1975 में हत्या कर दी गई थी। मैं 1981 में सैन्य शासन और धमकियों के बावजूद बांग्लादेश लौटी थी। मेरी हत्या की कई बार कोशिश की गई, जिनमें 21 अगस्त 2004 का ग्रेनेड हमला भी शामिल है। इसके अलावा मुझे जेल, साजिशों और राजनीतिक उत्पीड़न का भी सामना करना पड़ा है।''
उन्होंने कहा, ''आज सबसे बड़ी चिंता मेरी व्यक्तिगत सुरक्षा नहीं, बल्कि बांग्लादेश में न्याय व्यवस्था का खत्म होना है। राजनीतिक बदले की भावना से की गई कार्रवाई के तहत, अपना बचाव करने का उचित अवसर दिए बिना सुनाई गई मौत की सजा को न्याय नहीं कहा जा सकता।''
भाषा