जग्गू भगवानपुरिया गिरोह का सदस्य मोल्दोवा से प्रत्यर्पित : पंजाब पुलिस
भाषा
- 12 Sep 2026, 03:59 PM
- Updated: 03:59 PM
चंडीगढ़, 12 सितंबर (भाषा) पंजाब पुलिस जग्गू भगवानपुरिया गिरोह के एक प्रमुख सदस्य को केंद्रीय एजेंसियों की मदद से मोल्दोवा गणराज्य से प्रत्यर्पित कराकर भारत लेकर आई। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।
पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने बताया कि ऐसा पहली बार है जब पंजाब पुलिस ने यूरोप के किसी देश से किसी आरोपी को प्रत्यर्पित कराया है।
यादव ने बताया कि अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत दलम हत्या, हत्या के प्रयास, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), आयुध अधिनियम और मादक पदार्थों से जुड़े कई मामलों में वांछित था।
अमृतपाल को 24 फरवरी को मोल्दोवा के अधिकारियों ने उस समय हिरासत में लिया था जब वह ओताची सीमा से यूक्रेन में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। इसके बाद पंजाब पुलिस के ओएफटीईसी (विदेश भागे भगोड़ों का पता लगाने एवं उनके प्रत्यर्पण संबंधी प्रकोष्ठ) ने उसे भारत लाने के लिए प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू की।
चिशिनाउ की एक अदालत ने 26 मई को अमृतपाल के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी। इसके बाद 16 जुलाई को एक अपीलीय अदालत ने प्रत्यर्पण के खिलाफ उसकी याचिका खारिज कर दी।
यादव ने कहा, ''पंजाब पुलिस द्वारा यूरोप के किसी देश से कराया गया यह पहला प्रत्यर्पण है और संगठित अपराध के खिलाफ हमारी लड़ाई में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।''
यादव ने बताया कि 'ऑपरेशन ईस्टर्न रीच' के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छह महीने तक अमृतपाल की तलाश की गई। यह अभियान पंजाब पुलिस के गैंगस्टर रोधी कार्यबल (एजीटीएफ) और ओएफटीईसी ने केंद्रीय एजेंसियों तथा अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के समन्वय से चलाया।
अमृतपाल को भारत लाने के लिए पंजाब पुलिस की चार सदस्यीय टीम मोल्दोवा भेजी गई थी।
गैंगस्टर रोधी कार्यबल के पुलिस अधीक्षक बिक्रमजीत सिंह बराड़ की अगुवाई वाली इस टीम में निरीक्षक पुषविंदर सिंह, उपनिरीक्षक जसप्रीत सिंह और सहायक उपनिरीक्षक वरिंदर कुमार शामिल थे।
यादव ने बताया कि इस टीम ने शुक्रवार को मोल्दोवा के चिशिनाउ हवाई अड्डे पर अमृतपाल को अपनी हिरासत में लिया और उसे लेकर शनिवार सुबह नयी दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) हवाई अड्डे पहुंची।
उन्होंने मोल्दोवा और अजरबैजान के अधिकारियों, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग इकाई (आईपीसीयू), केंद्रीय गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय को अभियान में मदद के लिए धन्यवाद दिया।
गैंगस्टर रोधी कार्यबल के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रमोद बान ने बताया कि अमृतपाल 2019 में बटाला में दलवीर सिंह की हत्या, 2024 में होशियारपुर में अमरजीत लाल एवं कश्मीरी लाल की हत्या और 2025 में धरमजीत सिंह उर्फ धर्मा, कनव महाजन, सरबजीत सिंह उर्फ काका और जसदीप सिंह उर्फ दीप चीमा की हत्या के मामलों में वांछित था।
उन्होंने कहा कि अमृतपाल हरियाणा निवासी गुरपाल के विवरण का इस्तेमाल कर तैयार किए गए फर्जी पासपोर्ट के जरिए अक्टूबर 2024 में विदेश भाग गया था।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने बताया कि उसके फरार रहने के दौरान कई देशों में उसकी गतिविधियों का पता लगाया गया और बाद में उसके खिलाफ 'रेड कॉर्नर नोटिस' जारी किया गया।
पुलिस महानिरीक्षक आशीष चौधरी ने बताया कि ओएफटीईसी के गठन के बाद से विभिन्न देशों से नौ वांछित अपराधियों को निर्वासित कर भारत लाया गया है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष भेजे गए प्रत्यर्पण के दो अनुरोध सफल रहे हैं। इससे पहले संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से अमृतपाल मेहरों को प्रत्यर्पित कराया गया था।
चौधरी ने कहा कि ओएफटीईसी विदेश में मौजूद 11 अन्य भगोड़ों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को भी तेजी से आगे बढ़ा रहा है।
पंजाब पुलिस ने विदेश में रह रहे गैंगस्टरों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए ओएफटीईसी का गठन किया है।
भाषा