नेपाल त्रासदी : लापता लोगों की तलाश जारी, बरामद शवों की पहचान बनी चुनौती
संतोष
- 06 Sep 2026, 04:14 PM
- Updated: 04:14 PM
(शिरीष बी प्रधान)
काठमांडू, छह सितंबर (भाषा) नेपाल में 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ से मची तबाही के करीब 11 दिन बाद भी बचावकर्मी मलबे में लोगों की तलाश कर रहे हैं लेकिन उन्हें बरामद किए जा रहे शवों की पहचान करने में मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।
नेपाल पुलिस द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, 1,344 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है जबकि करीब पांच हजार लोग अब भी लापता हैं। अब तक 13,100 से अधिक लोगों को बचाया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि नेपाल-तिब्बत सीमा के नजदीक 26 अगस्त को ग्लेशियर से हिमखंड का बड़ा हिस्सा टूटा और इसके बाद भारी मलबे और वेग के साथ निचले इलाकों में पानी बहा और उत्तरी व मध्य नेपाल में बस्तियां तबाह हो गईं।
चीनी मीडिया की खबरों के मुतबिक तिब्बत में भी कम से कम 31 लोगों की मौत हुई है जबकि 500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं।
अधिकारियों के अनुसार, नेपाल में बरामद शवों में से कम से कम 85 बच्चों के थे जबकि लगभग 500 शवों के कुछ अंग गायब थे। कई शवों की हालत ऐसी है कि उनकी पहचान करने में मुश्किल आ रही है।
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा व्यवस्थापन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के मुताबिक चितवन जिले से सबसे अधिक 362 शव बरामद किए गए। इसके बाद प्रभावित जिलों में नवलपरासी पूर्व, नवलपरासी पश्चिम, नुवाकोट, रसुवा, गोरखा, धादिंग और तनहुं शामिल हैं।
एनडीआरआरएमए के अनुसार, केवल 98 शवों की पहचान की गई और उन्हें उनके परिवारों को सौंपा गया।
अधिकारियों ने बताया कि मृतकों की पहचान करना एक बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि पानी के साथ बहकर आए कई शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हैं, या फिर उनके केवल कुछ हिस्से ही मिल पाए हैं।
पुलिस ने कहा है कि आपदा वाली जगहों से दूर बहकर गए शवों और पानी व कीचड़ में दबे शवों की पहचान करना बहुत मुश्किल हो गया है।
नेपाल पुलिस ने शवों और इंसानी अवशेषों की पहचान में मदद के लिए लापता लोगों के रिश्तेदारों से डीएनए नमूने एकत्र करने की प्रक्रिया शुरू की है। नेपाल में रहने वाले रिश्तेदार काठमांडू स्थित नेपाल पुलिस अस्पताल या अपने नजदीकी जिला पुलिस कार्यालय में जाकर नमूने दे सकते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में पहचान आसान बनाने के लिए डीएनए नमूने लेने के बाद 1,000 से अधिक अज्ञात शवों को दफनाया गया है।
नेपाल के सूचना और संचार मंत्री विक्रम तिमिलसिना ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि रासुवा में बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री की कोई कमी न हो और उनके वितरण में कोई अव्यवस्था न हो।
तिमिलसिना ने सरकारी अखबार 'गोरखापत्र' के ऑनलाइन संस्करण को बताया कि आपदा के बड़े पैमाने के बावजूद सरकार राहत और पुनर्वास कार्यों में सक्रिय रूप से शामिल थी।
उन्होंने कहा कि अभी राहत सामग्री की कोई कमी नहीं है और सरकार संसाधनों के प्रबंधन में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होने देगी।
मंत्री ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों के लिए विद्यालयों और अस्पतालों की इमारतों में अस्थायी रहने की व्यवस्था की गई है, जबकि उनके स्थायी पुनर्वास की योजना भी तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रभावित इलाकों में ठप पड़े संचार, बिजली और सड़क नेटवर्क को बहाल करने के लिए मानवबल और संसाधनों को जुटा रही है।
तिमिलसिना ने कहा, ''इस समय नेपाल जलवायु न्याय की मांग कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस बारे में गंभीर होना चाहिए।'' उन्होंने कहा कि इस आपदा ने भविष्य में जलवायु से जुड़ी आपदाओं के लिए बेहतर तैयारी की जरूरत को उजागर किया है।
इस बीच, रविवार तड़के गोरखा जिले में आई बाढ़ में चार मकान और एक झूला पुल बह गए, हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ।
पुलिस ने ताया कि नम्रुंग खोला नदी के उफान पर आने के बाद चुमनुबरी ग्रामपालिका-4 में बाढ़ आ गई। बाढ़ देख निवासी सुरक्षित स्थानों पर चले गए, लेकिन चार मकान बह गए।
अधिकारियों के मुताबिक नदी के उद्गम स्थल के नजदीक बहाव में कीचड़ और मलबा आने से संभवत: बहाव बाधित हो गया होगा। नम्रुंग खोला नदी बूढ़ी गंडकी नदी में मिलती है, और बूढ़ी गंडकी के किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने को कहा गया है।
स्थानीय मीडिया के अनुसार, बाढ़ से नामरुंग इलाके में दो छोटी पनबिजली परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है। झूला पुल के बह जाने के कारण इलाके में आवाजाही भी प्रभावित हुई है।
भाषा धीरज संतोष
संतोष
0609 1614 काठमांडू