शीर्ष अदालत ने कॉजपा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकियां रद्द कीं
भाषा
- 01 Sep 2026, 06:39 PM
- Updated: 06:39 PM
नयी दिल्ली, एक सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को उन सभी प्राथमिकियों को रद्द कर दिया, जो देश भर में 20 से 25 जुलाई के बीच 'कॉकरोच जनता पार्टी' (कॉजपा) के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज की गई थीं। इसके बाद कॉजपा ने राष्ट्रीय राजधानी में पांच सितंबर को होने वाले अपने प्रस्तावित मार्च को रद्द कर दिया।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार को यह भी निर्देश दिया कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक के कारण अपनी जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को तीन महीने के भीतर मुआवजा दिया जाए।
प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को बंद करते हुए पीठ ने कहा, "युवा प्रदर्शनकारियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए, हम पूरा न्याय करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हैं।"
अनुच्छेद 142 उच्चतम न्यायालय को पूर्ण न्याय करने के लिए कोई भी आदेश पारित करने का अधिकार देता है।
हालांकि, केंद्र सरकार की गुजारिश मानते हुए न्यायालय ने दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल रहे, गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोगों के खिलाफ नयी प्राथमिकी दर्ज करने की इजाजत दे दी।
पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों पर ध्यान दिया और अपने आदेश का दायरा बढ़ा दिया। पीठ ने कहा, "अगर 20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच इसी विरोध-प्रदर्शन के संबंध में किसी राज्य या केंद्र-शासित प्रदेश में कोई और प्राथमिकी दर्ज की गई है, जो इस न्यायालय के सामने नहीं है, तो उस पर आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी और उसे बंद माना जाएगा।"
आत्महत्या करने वालों के परिवारों को मुआवजा देने के मामले में, न्यायालय ने केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर पूरे देश के लिए एक नीति बनाने और पीड़ित परिवारों को तीन महीने के अंदर पैसे का भुगतान करने का निर्देश दिया।
कॉजपा के सह-संयोजक सौरव दास पीठ के सामने पेश हुए और समूह की ओर से एक बयान पढ़कर सुनाया।
दास ने कहा, "कॉजपा के सह-संयोजक के तौर पर, मैं यह कहना चाहता हूं कि भारत सरकार के सकारात्मक आश्वासनों और आज उन्हें मिली न्यायिक मान्यता को देखते हुए, और इस न्यायालय के आदेश को ध्यान में रखते हुए, कॉजपा पांच सितंबर को मार्च निकालने का अपना आह्वान वापस लेना उचित समझती है और आज के आदेश के पालन की उम्मीद करती है। मैं इस फैसले के लिए न्यायालय का और दोनों पक्षों के वकीलों -वृंदा ग्रोवर और सॉलिसिटर जनरल - का भी उनकी कोशिशों के लिए धन्यवाद देता हूं।"
पीठ ने सॉलिसिटर जनरल और दास के बयान दर्ज किए और कहा कि मामले के खास तथ्यों और हालात को ध्यान में रखते हुए उसने अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल किया है। पीठ ने उम्मीद जताई कि दोनों पक्ष अपने वादों का पालन करेंगे।
सुनवाई के दौरान, मेहता ने न्यायालय को बताया कि केंद्र सरकार कॉजपा को दिए गए उन आश्वासनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिनके तहत दिल्ली और अन्य राज्यों की पुलिस विरोध-प्रदर्शनों के सिलसिले में दर्ज प्राथमिकी पर आगे कोई कार्रवाई नहीं करेगी।
सॉलिसिटर जनरल ने न्यायालय को यह भी बताया कि भारत सरकार अन्य आश्वासनों को पूरा करने के लिए भी प्रतिबद्ध है, जिसमें परिवारों को मुआवजा देना भी शामिल है।
मेहता ने हालांकि जरूरी तौर-तरीके तय करने के लिए समय मांगा।
कॉजपा ने पांच सितंबर, यानी शिक्षक दिवस पर दिल्ली में एक विरोध मार्च का आह्वान किया था। संगठन ने केंद्र पर आरोप लगाया कि वह 25 जुलाई को किए गए उन वादों को पूरा करने में नाकाम रहा है, जिनके तहत संगठन को परीक्षाओं में गड़बड़ी और नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ अपना 36 दिन का आंदोलन वापस लेने के लिए मनाया गया था।
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