होम्योपैथ चिकित्सकों के पंजीकरण के विरोध में महाराष्ट्र के रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल
नरेश
- 05 Aug 2026, 06:53 PM
- Updated: 06:53 PM
मुंबई, पांच अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (एमएआरडी) ने सरकार के उस फैसले के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है जिसमें होम्योपैथ चिकित्सकों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (एमएमसी) के तहत पंजीकरण कराने और एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति दी गई है।
इस आंदोलन का असर राज्यभर के मेडिकल कॉलेज और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा संचालित अस्पतालों में बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) सेवाओं पर पड़ा।
मुंबई के सर जेजे अस्पताल और ग्रांट मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने अपने परिसरों में प्रदर्शन किया और सरकार के फैसले के खिलाफ नारे लगाये।
एमएमसी ने 30 जून को एक अधिसूचना जारी करके होम्योपैथ चिकित्सकों को छह महीने का आधुनिक औषध विज्ञान प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम (सीसीएमपी) पूरा करने के बाद आधुनिक दवाएं लिखने की अनुमति दी थी।
एमएआरडी ने मांग की है कि अंतिम न्यायिक फैसले तक बीएचएमएस-सीसीएमपी (बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी-सर्टिफिकेट कोर्स इन मॉडर्न फार्माकोलॉजी) पंजीकरण प्रक्रिया तत्काल रोक दी जाए।
संगठन ने आरोप लगाया कि सरकार और संबंधित प्राधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद उसे बीएचएमएस-सीसीएमपी नीति के क्रियान्वयन को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है।
सेंट्रल एमएआरडी अध्यक्ष अथर्व शिंदे ने बुधवार को 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''हड़ताल आधी रात से शुरू हुई। हम आज के घटनाक्रम पर नजर रखेंगे। यदि सरकार बातचीत शुरू नहीं करती है तो 24 घंटे बाद हम आपातकालीन सेवाएं भी बंद कर देंगे।''
शिंदे ने बताया कि यह हड़ताल 32 मेडिकल कॉलेज और बीएमसी द्वारा संचालित कॉलेज में की गई। उन्होंने कहा, ''हमारा विरोध कानून को लेकर है। किसी भी तरह की क्रॉस-पैथी और मिक्सोपैथी नहीं होनी चाहिए। महाराष्ट्र सरकार को मरीजों को दी जाने वाली सेवाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।''
उन्होंने कहा, ''यदि उन्होंने (होम्योपैथ चिकित्सकों ने) 5.5 साल की पढ़ाई की है और केवल एक कोर्स करने के बाद उन्हें एलोपैथी का लाइसेंस मिल जाता है... तो यह ऐसा है जैसे किसी व्यक्ति को आग्नेयास्त्र का लाइसेंस देकर उसे बिना किसी नियंत्रण के इस्तेमाल की अनुमति दे दी जाए।''
नागपुर में रेजिडेंट डॉक्टरों ने सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसीएच) और इंदिरा गांधी सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीजीएमसी) में ओपीडी सेवाओं से दूरी बनाई। उन्होंने अस्पताल परिसर में तख्तियां और बैनर लेकर प्रदर्शन किया।
विदर्भ क्षेत्र के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी इसी तरह के दृश्य देखने को मिले।
सेंट्रल एमएआरडी के महासचिव डॉ. आशुतोष अडे ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा कि रेजिडेंट डॉक्टरों ने बुधवार को ओपीडी सेवाओं से खुद को अलग रखा। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर रेजिडेंट डॉक्टर बुधवार आधी रात से आपातकालीन सेवाओं से भी हट जाएंगे।
उन्होंने कहा कि जीवन के जोखिम वाले मामलों में उपचार किया जाएगा और अन्य मामलों का प्रबंधन संबंधित अस्पताल प्रशासन को करना होगा।
एमएआरडी ने दावा किया कि आईजीजीएमसी के करीब 450 और जीएमसीएच के करीब 800 रेजिडेंट डॉक्टरों ने बुधवार को ओपीडी सेवाओं से खुद को अलग रखा।
एमएआरडी ने मंगलवार को जारी बयान में कहा था कि मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शुरुआती 24 घंटे तक आपातकालीन और आकस्मिक सेवाएं जारी रहेंगी, लेकिन सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं, नियमित कार्य और शैक्षणिक गतिविधियां निलंबित रहेंगी।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, बीएमसी एमएआरडी, महाराष्ट्र स्टेट रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन, एसोसिएशन ऑफ स्टेट मेडिकल इंटर्न्स, महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ गजटेड मेडिकल ऑफिसर्स ग्रुप-ए और महाराष्ट्र स्टेट मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने सेंट्रल एमएआरडी द्वारा बुलाई गई राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल को पूरा समर्थन दिया है।
सेंट्रल एमएआरडी ने मंगलवार को एक बयान में कहा था कि स्पष्ट कानूनी और नियामकीय ढांचे के अभाव तथा मामला अदालत में लंबित होने के कारण उसने पांच अगस्त की मध्यरात्रि से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने का फैसला किया है।
उसने मांग की है कि व्यापक, कानूनी रूप से मजबूत, पारदर्शी और वैज्ञानिक रूप से मान्य नियामकीय व्यवस्था के बिना बीएचएमएस-सीसीएमपी ढांचे के तहत पंजीकरण या इसका क्रियान्वयन नहीं किया जाए। उसने राज्य सरकार से महाराष्ट्र के रेजिडेंट डॉक्टरों की लंबे समय से लंबित मांगों का समाधान करने को भी कहा है।
एमएआरडी के अनुसार, शुरुआती 24 घंटे तक मरीजों की सुरक्षा के लिए रेजिडेंट डॉक्टर आपातकालीन और आकस्मिक सेवाएं जारी रखेंगे, जबकि ओपीडी सेवाएं, नियोजित प्रक्रियाएं, नियमित कार्य और शैक्षणिक गतिविधियां निलंबित रहेंगी।
बयान में कहा गया कि यदि कोई सकारात्मक समाधान नहीं निकलता है तो छह अगस्त से सेंट्रल एमएआरडी के अगले निर्देश तक आपातकालीन सेवाओं सहित रेजिडेंट डॉक्टरों की सभी सेवाएं वापस ले ली जाएंगी।
भाषा अमित नरेश
नरेश
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