लाकड़ा ने हॉकी इंडिया की आचरण समिति के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाये, दस्तावेज मांगे
सुधीर
- 05 Aug 2026, 06:51 PM
- Updated: 06:51 PM
(मोना पार्थसारथी)
नई दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) भारत की पूर्व महिला हॉकी कप्तान असुंथा लाकड़ा ने उन्हें 'कारण बताओ नोटिस' भेजने वाली हॉकी इंडिया की आचरण समिति के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाते हुए प्रक्रिया का पालन नहीं करने का आरोप लगाया है।
हॉकी इंडिया की आचरण समिति के अध्यक्ष जस्टिस (रिटायर्ड) राघवेंद्र कुमार को भेजे गए नौ पेज के शुरुआती जवाब में लाकड़ा ने पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी अलबेला रानी टोप्पो द्वारा की गई शिकायतों में लगाए गए सभी आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें "झूठा, बेबुनियाद, दुर्भावनापूर्ण, और छवि खराब करने वाला" बताया है।
हॉकी इंडिया की चयनकर्ता और कार्यकारी बोर्ड की सदस्य लाकड़ा ने कहा ,"मेरे खिलाफ लगाए गए हर आरोप का मैं खंडन करती हूं । आरोप झूठे, बेबुनियाद, गलत इरादे से किए गए, बदनाम करने वाले हैं और तथ्यों को पूरी तरह से तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है।''
उन्होंने जवाब की एक प्रति हॉकी इंडिया अध्यक्ष और महासचिव को भी भेजी है ।
पिछले महीने लाकड़ा को झारखंड की ही अलबेला रानी टोप्पो की शिकायत पर समिति ने कारण बताओ नोटिस दिया था। इससे ठीक पहले लाकड़ा के अनुरोध पर खेल मंत्रालय ने झारखंड हॉकी में पूर्व कोच सुधीर गोला पर लड़कियों के यौन उत्पीड़न और हॉकी इंडिया महासचिव भोलानाथ सिंह पर धमकाने के कथित आरोपों की भारतीय ओलंपिक समिति द्वारा स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिये थे ।
लाकड़ा को पांच अगस्त, 2026 तक जवाब देने के लिए कहा गया था, उन्होंने साफ किया कि उनका जवाब "बिना किसी भेदभाव के" और "समिति के अधिकार क्षेत्र में आए बिना" जमा किया जा रहा है। उन्होंने विस्तृत जवाब देने के लिये कुछ दस्तावेज मांगे हैं ।
समिति की वैधता पर सवाल उठाते हुए लाकड़ा ने तर्क दिया कि हॉकी इंडिया के उप नियमों और आचार संहिता के तहत, आचरण समिति हॉकी इंडिया के अध्यक्ष से लिखित निर्देश के बाद ही कार्रवाई कर सकती है ।
उन्होंने कहा ,''दोनों शिकायतें हॉकी इंडिया महासचिव को भेजी गई हैं, अध्यक्ष को नहीं जबकि हॉकी इंडिया के उप नियमों के तहत अध्यक्ष के निर्देश के बिना आचरण समिति जांच शुरू नहीं कर सकती ।''
लाकड़ा ने आचरण समिति के गठन पर भी यह कहकर सवाल उठाया कि हॉकी इंडिया की वेबसाइट पर सिर्फ दो सदस्यों का नाम है, जबकि इसे तीन सदस्यों वाली ईकाई होना जरूरी है।
उन्होंने समिति के सभी सदस्यों, उनकी नियुक्ति और समिति बनाने वाले प्रस्ताव की जानकारी मांगी।
उन्होंने आगे कहा ,'' नोटिस सिर्फ समिति के अध्यक्ष ने जारी किए थे, जबकि "आचरण समिति एक 'कोलिजिएट' ईकाई है जिसे सही तरीके से बने कोरम के जरिए काम करना चाहिए।"
लाकड़ा ने हॉकी इंडिया के उप नियमों के आर्टिकल 19, हॉकी इंडिया की आचार संहिता, प्रक्रिया के नियम, शिकायतों से जुड़ी बैठकों का विवरण और सभी सहायक दस्तावेजों के साथ शिकायतों की पूरी प्रति भी मांगी।
उन्होंने दावा किया कि उन्हें दी गई कॉपी अधूरी और पढ़ने लायक नहीं थीं।
उन्होंने कहा, "मुझे भेजी गई शिकायतों की कॉपी अधूरी हैं और कुछ खास हिस्से पढ़ने लायक नहीं हैं। कोई एनेक्सर, एनक्लोजर या सहयोगी दस्तावेज नहीं दिए गए हैं। इस तरह के आरोपों का जवाब बिना विस्तृत जानकारी के नहीं दिया जा सकता।"
दस्तावेज मिलने के बाद चार सप्ताह का समय मांगते हुए लाकड़ा ने समिति से कहा कि जब तक खुलासा नहीं हो जाता, तब तक कोई एकतरफा कार्रवाई न की जाए।
उन्होंने पत्र के आखिर में कहा ,'' मैं उन लोगों के खिलाफ सही अदालत में दीवानी और फौजदारी कार्रवाई शुरू करने का अपना अधिकार भी सुरक्षित रखती हूं जिनके झूठे आरोपों ने भारतीय हॉकी की जीवन भर की सेवा से बनी मेरी छवि को नुकसान पहुंचाया।''
भाषा मोना सुधीर
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