शबरिमला घी अनियमितता में नहीं है टीडीबी की कोई भूमिका: त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के अध्यक्ष
सुभाष
- 31 Jul 2026, 02:38 PM
- Updated: 02:38 PM
तिरुवनंतपुरम, 31 जुलाई (भाषा) त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) के अध्यक्ष के. जयकुमार ने शुक्रवार को शबरिमला मंदिर में 2025 की तीर्थयात्रा के दौरान घी की आपूर्ति में कथित गड़बड़ी में बोर्ड की कोई भूमिका होने से इनकार किया।
उन्होंने कहा कि विवाद सामने आने से पहले ही बोर्ड ने इस साल की तीर्थयात्रा के लिए बाहर से घी नहीं खरीदने का निर्णय लिया था।
देवस्वोम मंत्री के. मुरलीधरन ने शबरिमला में उपयोग के लिए राज्य संचालित 'मिल्मा' द्वारा आपूर्ति की जाने वाली घी की खरीद और ढुलाई में कथित अनियमितता की जांच का आदेश था। इसके कुछ दिन बाद, जयकुमार की यह टिप्पणी आई है।
जयकुमार ने यहां पत्रकारों से कहा कि जब तक यह मामला मीडिया में नहीं आया, तब तक उन्हें या बोर्ड को पिछली तीर्थयात्रा के दौरान 'मिल्मा' द्वारा उपलब्ध कराये गये घी की गुणवत्ता के बारे में कोई शिकायत नहीं मिली थी।
उन्होंने कहा, ''इन आरोपों के सामने आने से पहले ही, इस साल 'अरावणा' (प्रसाद) बनाने और दूसरी जरूरतों के लिए खरीददारी को अंतिम रूप देते समय, हमने बाहर से घी न खरीदने का निर्णय लिया और ऐसा इस विवाद की वजह से नहीं किया गया। हमें लगा कि जब शबरिमला में श्रद्धालुओं द्वारा काफ़ी मात्रा में लाया गया घी उपलब्ध है, तो घी खरीदने की कोई जरूरत नहीं है। अब पीछे मुड़कर देखने पर हमें लगता है कि यह एक अच्छा फ़ैसला था।''
जयकुमार ने कहा कि पिछली तीर्थयात्रा के दौरान 'मिल्मा' द्वारा उपलब्ध कराये गये घी की सभी खेपों को शबरिमला में खाद्य सुरक्षा विभाग की प्रयोगशाला में नमूने की जांच के बाद ही मंजूरी दी गई थी।
उन्होंने कहा, ''सिर्फ नमूने की ही जांच की जा सकती है। पूरी मात्रा की जांच नहीं हो सकती। हर खेप को प्रयोगशाला में जांच के बाद मंजूरी दी गई थी और उस समय इसकी गुणवत्ता को लेकर कोई शिकायत नहीं की गई थी।''
उनसे जब उन आरोपों के बारे में पूछा गया कि 'मिल्मा' की जांच में पता चला था कि असली घी की जगह घटिया घी दिया गया था, तो जयकुमार ने कहा कि 'मिल्मा' द्वारा नियुक्त ठेकेदार के लिए बोर्ड जिम्मेदार नहीं है।
उन्होंने कहा, ''अगर आपूर्ति श्रृंखला में कोई गड़बड़ी हुई थी, तो सरकार और दूसरी एजेंसियां इसकी जांच कर रही हैं। अगर हमारे पास घटिया घी पहुंचा था, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन सारा घी पहले ही अरावणा बनाने, दीये जलाने और मंदिर के दूसरे कामों में इस्तेमाल हो चुका है। अब कोई घी नहीं बचा है।''
इस बात को नकारते हुए कि बोर्ड अपनी ज़िम्मेदारियां निभाने में नाकाम रहा, जयकुमार ने कहा कि बोर्ड ने खरीद का काम 'मिल्मा' को सौंपा था और यह सुनिश्चित किया था कि घी को प्राप्त करने से पहले उसकी प्रयोगशाला में जांच की जाए।
भाषा राजकुमार सुभाष
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