हसीना के प्रत्यर्पण के अनुरोध पर प्रगति से अवगत कराती रहे सरकार: संसदीय समिति
पारुल
- 30 Jul 2026, 10:57 PM
- Updated: 10:57 PM
नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) संसद की एक समिति ने बांग्लादेश सरकार द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण के लिए किए गए अनुरोध पर संज्ञान लिया है और केंद्र सरकार से इस मामले में हुई प्रगति से समिति को अवगत कराते रहने के लिए कहा है।
सरकार ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली संसद की विदेश मामलों की स्थायी समिति को बताया कि प्रत्यर्पण के अनुरोध पर स्थापित कानूनों और प्रक्रियाओं के अनुसार सरकार के सक्षम प्राधिकारियों द्वारा विचार किया जा रहा है।
सरकार ने कहा, ''समिति की सिफारिश पर अनुपालन के लिए संज्ञान लिया गया है।''
'भारत-बांग्लादेश संबंधों के भविष्य' विषय पर समिति की नौवीं रिपोर्ट में की गई टिप्पणियों और सिफारिशों पर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई संबंधी रिपोर्ट बृहस्पतिवार को संसद में पेश की गई।
समिति ने कहा कि उसे बताया गया है कि भारत में हसीना का प्रवास और इस संबंध में भारत का रुख गंभीर संकट अथवा अस्तित्व के खतरे का सामना कर रहे व्यक्तियों को शरण देने की उसकी सभ्यतागत परंपरा और मानवीय मूल्यों से निर्देशित है।
समिति को यह भी बताया गया कि भारत सरकार ने हसीना को कोई राजनीतिक मंच उपलब्ध नहीं कराया है और न ही उन्हें भारतीय क्षेत्र से किसी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि संचालित करने की अनुमति दी गई है।
समिति ने कहा कि इस तरह का मानवीय आधार प्रदान करते हुए भी भारत ने इस सिद्धांत का कड़ाई से पालन किया है कि उसकी धरती का उपयोग किसी अन्य देश के खिलाफ राजनीतिक गतिविधियों के लिए नहीं होने दिया जाएगा।
समिति ने सिफारिश की कि सरकार को भारत के मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप अपने सिद्धांतनिष्ठ और मानवीय दृष्टिकोण को जारी रखना चाहिए तथा ऐसे मामलों का आवश्यक संवेदनशीलता के साथ प्रबंधन करना चाहिए।
समिति ने बांग्लादेश सरकार के प्रत्यर्पण अनुरोध पर भी संज्ञान लिया और सरकार से इस पर विचार से संबंधित प्रगति से समिति को अवगत कराते रहने का आग्रह किया।
बांग्लादेश में इस साल फरवरी में हुए संसदीय चुनावों के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेतृत्व में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नयी सरकार सत्ता में आई थी।
अगस्त 2024 में हसीना सरकार के पतन के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद भारत और बांग्लादेश के संबंधों में उल्लेखनीय गिरावट आई।
अगस्त 2024 में अवामी लीग सरकार के पतन के बाद हसीना बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं और तब से यहीं रह रही हैं।
स्थायी समिति ने बांग्लादेश में "चीन के बढ़ते प्रभाव" पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से सिफारिश की कि वह वहां विदेशी शक्तियों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाए।
समिति ने कहा कि अगर "भारत के प्रति कोई गैर-मित्रवत देश" बांग्लादेश में सैन्य ठिकाना स्थापित करने का प्रयास करता है, तो यह भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा होगा।
भाषा
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