प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले छात्रों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए: दीपके
नेत्रपाल
- 29 Jul 2026, 10:04 PM
- Updated: 10:04 PM
(फोटो के साथ)
छत्रपति संभाजीनगर, 29 जुलाई (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बुधवार को कहा कि सरकार को उन छात्रों को परेशान करना बंद करना चाहिए, जिन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ 'पैलेट गन' के इस्तेमाल का आदेश देने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की।
दीपके ने कहा कि यदि सरकार अपने रवैये में सुधार नहीं करती है, तो युवा ''सरकार बदल देंगे''।
वह दिल्ली से लौटने के बाद अपने गृहनगर छत्रपति संभाजीनगर पहुंचे। कॉजपा ने नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर दिल्ली में एक महीने तक प्रदर्शन का नेतृत्व किया था और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ही प्रदर्शन समाप्त किया गया।
दीपके ने कहा, ''चाहे वह अमित शाह हों (या कोई और), पैलेट गन चलाने का आदेश देने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।''
हवाई अड्डे पहुंचने के बाद दीपके ने कहा कि वह खुश हैं कि अब वह अपने माता-पिता से मिल सकेंगे। उन्होंने कहा, ''मैं लगभग 40 दिनों बाद घर लौट रहा हूं। जब से मैं भारत आया हूं, तब से आंदोलन चल रहे थे। इसके बाद मैं लगभग 36 दिनों तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर था। यह आंदोलन सफल साबित हुआ और देश के छात्रों की जीत हुई... मैं यहां आ गया हूं और मुझे खुशी है कि मैं अपने माता-पिता से मिलने जा रहा हूं।''
उन्होंने आरोप लगाया कि कई राज्यों की सरकारें उन छात्रों को परेशान कर रही हैं, जिन्होंने प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था।
दीपके ने कहा, ''अब सरकार को अच्छा व्यवहार करना चाहिए। बीस जुलाई को (संसद मार्च के दौरान) सड़कों पर छात्रों का खून बहा था। यह वास्तव में बहुत बुरा था। क्या यह पर्याप्त नहीं है। अब भी छात्रों को परेशान किया जा रहा है। कई राज्यों में पुलिस छात्रों के घरों पर जाकर उन्हें गिरफ्तार करने की धमकी दे रही है।''
कॉजपा संस्थापक ने कहा, ''ये छात्र आतंकवादी नहीं हैं। ये हमारे देश का भविष्य हैं। अगर देश के भविष्य को इस तरह प्रताड़ित किया जाएगा, तो जिस तरह धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना पड़ा...तो कल हम सरकार बदल देंगे, अगर वह (सरकार) सही रास्ते पर नहीं आती है।''
उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस्तीफा दे देना चाहिए और एक 'इन्फ्लुएंसर' बन जाना चाहिए, ''जिस काम में वह बहुत अच्छे हैं''।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह नहीं मान लेना चाहिए कि मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से छात्रों का गुस्सा कम हो गया है।
दीपके ने कहा, ''अगर जरूरत पड़ी, तो हम इससे भी बड़े स्तर पर एक नया आंदोलन शुरू करेंगे।''
इसके बाद दीपके डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय के निकट स्थित डॉ. बी. आर. आंबेडकर की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे।
बाद में, अपने घर पर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने दिल्ली में पैलेट गन के इस्तेमाल पर सवाल उठाया।
दीपके ने कहा, ''पैलेट गन के इस्तेमाल की क्या जरूरत थी। किसी के खिलाफ भी पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। वे (छात्र) हमारे देश के नागरिक हैं, आतंकवादी नहीं। चाहे वह (केंद्रीय गृह मंत्री) अमित शाह हों, पैलेट गन चलाने का आदेश देने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।''
प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉजपा के स्वयंसेवियों द्वारा किए गए जश्न के बारे में पूछे जाने पर दीपके ने कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं था।
दीपके ने कहा, ''स्वयंसेवी 36 दिनों तक तेज धूप और बारिश में बैठे रहे। इतनी बड़ी जीत के बाद (जश्न मनाने में) क्या गलत है? चुनाव जीतने के बाद भाजपा क्या करती है? स्वयंसेवियों ने भाजपा के लोगों की तरह सड़कों को जाम नहीं किया।''
उन्होंने सवाल किया, ''क्या छात्रों द्वारा आत्महत्या किए जाने के बाद भी संसद में धर्मेंद्र प्रधान का सम्मान किए जाने पर भाजपा को जरा भी शर्म महसूस नहीं हुई।''
जब पूछा गया कि क्या कॉजपा एक और आंदोलन शुरू करेगी, तो दीपके ने कहा कि सरकार उसे ऐसा करने के लिए मजबूर कर रही है।
उन्होंने कहा, ''सरकार हमें इसके खिलाफ आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर कर रही है। उसे छात्रों को परेशान करना बंद करना चाहिए। छात्रों में अब भी गुस्सा है, क्योंकि उनका गुस्सा सिर्फ एक मंत्री के खिलाफ नहीं था, बल्कि पूरी सरकार के खिलाफ था। सरकार को अपने रवैये में सुधार करना चाहिए।''
दीपके ने कहा कि आंदोलन ने एक बड़ी जीत हासिल की, क्योंकि युवाओं ने यह दिखा दिया कि वे सरकार पर सवाल उठाने से डरेंगे नहीं।
'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि देश में कई कानून हैं, लेकिन जब तक उन्हें लागू करने वाले लोग अच्छे नहीं होंगे, तब तक कुछ भी नहीं हो सकता।
दीपके ने कहा, ''तीन दिन पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रश्नपत्र लीक मामलों के लिए त्वरित अदालतों का वादा किया था। लोग भी खुश हुए थे। लेकिन हुआ क्या? मामले की पहली ही सुनवाई इसलिए टाल दी गई क्योंकि सीबीआई के वकील पेश नहीं हुए।''
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देवेंद्र नेत्रपाल
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