मध्याह्न भोजन योजना के तहत छात्रों को अलग से अंडे उपलब्ध कराए जाएंगे: शुभेंदु
पवनेश
- 29 Jul 2026, 09:54 PM
- Updated: 09:54 PM
(फोटो के साथ)
कोलकाता, 29 जुलाई (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को घोषणा की कि उनकी सरकार मध्याह्न भोजन योजना में छात्रों को अलग से अंडे उपलब्ध कराएगी।
उन्होंने कहा कि हालांकि, कोलकाता के सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में भोजन पकाने और आपूर्ति करने की जिम्मेदारी एक पायलट परियोजना के रूप में एक अगस्त से इस्कॉन द्वारा संभाली जाएगी।
राज्य सचिवालय 'नबन्ना' में आयोजित 'स्कूल कंपोजिट ग्रांट' वितरण कार्यक्रम में शुभेंदु ने छात्रों के भोजन में अंडे शामिल किए जाने को लेकर बनी अनिश्चितता को समाप्त कर दिया।
यह अनिश्चितता विपक्ष के उस आरोप के बाद पैदा हुई थी, जिसमें कहा गया था कि भाजपा शासित राज्य छात्रों पर शाकाहारी भोजन थोपने की कोशिश कर रहा है।
सरकार ने इसी कार्यक्रम से राज्य के कुल 80,375 सरकारी स्कूलों को 296 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता देने की भी घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''जहां इस्कॉन छात्रों को शुद्ध, सात्विक और प्रोटीन से भरपूर भोजन उपलब्ध कराएगा, वहीं हम उनकी संतुलित प्रोटीनयुक्त आहार की जरूरत को ध्यान में रखते हुए स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से छात्रों को अतिरिक्त रूप से अंडे उपलब्ध कराने की व्यवस्था कर रहे हैं।''
यह स्पष्ट करते हुए कि अंडे सप्ताह में एक या दो बार अलग से उपलब्ध कराए जाएंगे, शुभेंदु ने कहा, ''राज्य सरकार ने प्राथमिक कक्षाओं के छात्रों के लिए आवंटन को प्रति छात्र 6.78 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये कर दिया है। इससे मध्याह्न भोजन के लिए कनिष्ठ और वरिष्ठ छात्रों के बीच धन आवंटन में मौजूद असमानता समाप्त हो गई है।''
मध्याह्न भोजन का मुद्दा वर्ष 2026-27 के राज्य बजट में भी शामिल रहा, क्योंकि ऐसी खबरें सामने आई थीं कि भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी इस्कॉन को सौंपी जाएगी।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कुछ हितधारकों के एक वर्ग ने इस पर चिंता जताई थी। उनका तर्क था कि स्कूल भोजन कार्यक्रम की जिम्मेदारी इस्कॉन को सौंपने से अप्रत्यक्ष रूप से छात्रों को शाकाहारी आहार की ओर प्रेरित किया जा सकता है और स्कूलों के मध्याह्न भोजन मेन्यू से अंडों को स्थायी रूप से हटाया जा सकता है।
इस महीने की शुरुआत में इस मुद्दे को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई थी, जिसके बाद अदालत ने राज्य सरकार से एक हलफनामा मांगा था।
इस बीच, स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन की शाकाहारी भोजन की वकालत करने वाली टिप्पणियों ने छात्रों के भोजन से अंडों को हटाए जाने की संभावना को बल मिला था।
बर्मन ने कहा था, ''समाज में, इस देश में और पूरी दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं, जो पूरी तरह शाकाहारी हैं और स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। शाकाहारी भोजन में भी पर्याप्त पोषण होता है, और जो लोग शाकाहारी भोजन करते हैं, उन्हें अपने शरीर के निर्माण के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व मिल जाते हैं। इसलिए, पोषण के लिए बच्चों का अंडा खाना न तो अनिवार्य है और न ही इसकी कोई आवश्यकता है।''
मुख्यमंत्री ने कहा स्कूलों के लिए दिए जाने वाले समग्र अनुदान का 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार उपलब्ध कराती है, जबकि शेष 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार वहन करती है।
शुभेंदु ने कहा कि अब से राज्य के शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया ही मानक होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी राजनीतिक व्यक्ति की कोई भूमिका नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि चालू शैक्षणिक वर्ष के दौरान कुल 50,000 शिक्षकों और शैक्षणिक कर्मचारियों की भर्ती की जाएगी।
उन्होंने कहा, ''शिक्षकों, शैक्षणिक कर्मचारियों, प्रधान शिक्षकों, शारीरिक शिक्षा शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों के पद खाली हैं। भर्ती प्रक्रिया में बहुत भ्रष्टाचार हुआ है। हम उस स्थिति से बाहर निकल चुके हैं और स्कूल सेवा आयोग में राजनीतिक नियुक्तियों को रोक दिया है। भविष्य में किसी भी भर्ती प्रक्रिया में किसी राजनीतिक व्यक्ति की कोई भूमिका नहीं होगी।''
शुभेंदु ने कहा, ''हम उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार भर्ती प्रक्रिया पूरी करेंगे। छह हजार साक्षात्कार लंबित थे; उन्हें भी पूरा किया जाएगा। आने वाले दिनों में कोई और समस्या नहीं होगी।''
उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, रोजगार और औद्योगिक विकास राज्य में भाजपा सरकार के प्राथमिकता वाले क्षेत्र हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार चालू वित्तीय वर्ष के दौरान शिक्षा क्षेत्र के लिए राज्य को 4,000 करोड़ रुपये से 5,000 करोड़ रुपये तक की राशि उपलब्ध कराएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग राज्य की शिक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा कर रहा है और उन्होंने विश्वास जताया कि अगले शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत से सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगेंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस की पिछली सरकार ने शिक्षा को उचित महत्व नहीं दिया। उन्होंने कहा, ''उनकी (तृणमूल कांग्रेस) प्राथमिकता तुष्टिकरण और भ्रष्टाचार थी।''
उन्होंने कहा कि स्कूलों को बेहतर बुनियादी ढांचे के साथ स्मार्ट और आधुनिक संस्थानों के रूप में विकसित किया जाएगा।
भाषा
देवेंद्र पवनेश
पवनेश
2907 2154 कोलकाता