दिल्ली में कचरा प्रबंधन के लिए इंदौर मॉडल अपनाने की तैयारी, 'लैंडफिल साइट' पर बोझ घटाने की कवायद
सुरेश
- 29 Jul 2026, 09:00 PM
- Updated: 09:00 PM
(हर्षवर्धन प्रकाश)
इंदौर (मध्यप्रदेश), 29 जुलाई (भाषा) दिल्ली में स्रोत पर कचरे के पृथक्करण की कमियों और अपशिष्ट भराव (लैंडफिल) स्थलों पर बढ़ते बोझ के बीच दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने इंदौर के स्वच्छता मॉडल को राजधानी की जरूरतों के मुताबिक अपनाने की कवायद शुरू कर दी है।
इंदौर, राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार आठ बार अव्वल रहा है।
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के एक उच्चस्तरीय दल ने दो दिन तक इंदौर के अलग-अलग स्थानों का दौरा करके शहर की कचरा प्रबंधन प्रणाली का अध्ययन किया है।
यह पहल ऐसे समय हुई है, जब दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने हाल ही में चिंता जताई थी कि राजधानी में करीब 50 प्रतिशत कचरे का स्रोत स्तर पर पृथक्करण नहीं हो पा रहा है और अपशिष्ट की लगभग इतनी ही मात्रा सीधे 'लैंडफिल' स्थलों पर पहुंच रही है।
उपराज्यपाल ने 27 जुलाई (सोमवार) को एमसीडी से कहा था कि वह दिल्ली के किसी एक क्षेत्र में स्वच्छता के 'इंदौर मॉडल' को पायलट परियोजना के रूप में लागू करने की संभावनाएं तलाशे।
उपराज्यपाल के इस निर्देश के बाद एमसीडी के पांच-सदस्यीय दल ने मंगलवार और बुधवार को इंदौर में कचरा प्रबंधन की समूची व्यवस्था का जायजा लिया।
दल में शामिल एमसीडी के अतिरिक्त आयुक्त अरुण कुमार मिश्रा ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''हमारे अध्ययन का उद्देश्य यह समझना है कि इंदौर ने स्वच्छता का उच्च स्तर किस तरह हासिल किया और इसमें वैज्ञानिक हस्तक्षेप, तकनीकी नवाचार तथा मानव संसाधन की क्या भूमिका रही।''
हालांकि, दिल्ली और इंदौर के बीच नागरिकों की आबादी और रोजाना निकलने वाले कचरे की मात्रा का बहुत बड़ा अंतर है।
दिल्ली में स्रोत पर कचरे का पृथक्करण अब भी प्रमुख चुनौती बना हुआ है, जबकि इंदौर की स्वच्छता व्यवस्था की सफलता इसी प्रणाली पर आधारित है।
मिश्रा ने बताया कि एमसीडी क्षेत्र की करीब 2.25 करोड़ आबादी से प्रतिदिन लगभग 15,000 मीट्रिक टन कचरा निकलता है, जबकि इंदौर नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार 35 लाख की जनसंख्या वाले इस शहर में हर रोज तकरीबन 1,500 मीट्रिक टन कचरा पैदा होता है।
एमसीडी अधिकारी ने कहा, ''किसी भी शहर के स्वच्छता मॉडल को दूसरे शहर में हू-ब-हू लागू नहीं किया जा सकता, लेकिन इंदौर के स्वच्छता मॉडल की कुछ खूबियों को दिल्ली की जरूरतों के मुताबिक अपनाने का प्रयास किया जाएगा।''
मिश्रा ने बताया कि इंदौर मॉडल की इन खूबियों में स्रोत स्तर पर कचरे के पृथक्करण के साथ ही अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था की सूक्ष्म स्तर पर निगरानी करने वाला 'इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर', कचरा संग्रहण मार्गों की विस्तृत मैपिंग और प्रत्येक कचरा संग्रहण वाहन के साथ ही गैर-सरकारी संगठन के प्रतिनिधि की तैनाती शामिल है।
उन्होंने कहा कि एमसीडी वर्ष 2026 के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत स्रोत स्तर पर चार श्रेणियों में कचरे के पृथक्करण की व्यवस्था लागू करने की दिशा में काम कर रहा है।
कचरे के प्रसंस्करण को लेकर भी दिल्ली और इंदौर में बड़ा अंतर है। इंदौर नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, शहर से निकलने वाले लगभग पूरे कचरे को प्रसंस्करण इकाइयों तक पहुंचाया जाता है।
एमसीडी अधिकारी मिश्रा ने बताया कि इस निकाय द्वारा वर्तमान में हर रोज करीब 6,000 मीट्रिक टन कचरा प्रसंस्करण के लिए 'वेस्ट-टू-एनर्जी' संयंत्रों (कचरे को ऊर्जा में बदलने वाली इकाइयों) में भेजा जाता है, जबकि शेष अपशिष्ट 'लैंडफिल' स्थलों पर पहुंचता है।
उन्होंने कहा, ''हम बायो-माइनिंग, कचरा प्रबंधन के वैज्ञानिक नवाचारों और नये 'वेस्ट-टू-एनर्जी' संयंत्रों के जरिये वर्ष 2029 तक 'लैंडफिल' स्थलों पर निर्भरता खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।''
भाषा हर्ष सुरेश
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2907 2100 इंदौर