न्यायालय ने केंद्र से दिव्यांग-अनुकूल नियमों को और मजबूत बनाने के लिए सुझावों पर विचार करने को कहा
पवनेश
- 29 Jul 2026, 08:08 PM
- Updated: 08:08 PM
नयी दिल्ली, 29 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सुविधाओं और पहुंच को बेहतर बनाने की दिशा में दिए गए एक महत्वपूर्ण आदेश में बुधवार को केंद्र सरकार से कहा कि वह विशेषज्ञों और याचिकाकर्ताओं के सुझावों पर ''गहनता से'' विचार करे ताकि ऐसी मजबूत और त्रुटिरहित नियमावली बनाई जा सके, जिससे ऐसे लोगों को सार्वजनिक स्थानों और सेवाओं तक आसानी से पहुंच मिल सके।
उच्चतम न्यायालय ने आठ नवंबर, 2024 को केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (आरपीडब्ल्यूडी), 2016 की धारा 40 के तहत आवश्यक अनिवार्य नियम बनाए, ताकि सार्वजनिक स्थानों और सेवाओं को दिव्यांगजनों के लिए सुलभ बनाया जा सके।
न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने नियम बनाने से संबंधित दलीलों पर संज्ञान लिया और केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि मसौदा नियमों को राजपत्र में अधिसूचित करने से पहले विशेषज्ञों और याचिकाकर्ताओं के सुझावों पर विचार करें, ताकि उन्हें और अधिक मजबूत, त्रुटिरहित और व्यावहारिक बनाया जा सके।
पीठ ने कहा, ''याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि मसौदा नियमों को अंतिम रूप देने और आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित करने से पहले उनके सुझावों पर विचार किया जाए, ताकि कोई खामी या कमी न रह जाए और इससे आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम के प्रावधान अधिक प्रभावी बन सकें तथा कानून के उद्देश्य को पूरा किया जा सके।''
उच्चतम न्यायालय ने इस बात का भी कड़ा संज्ञान लिया कि दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, अंडमान और निकोबार तथा तमिलनाडु समेत 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम के तहत अनिवार्य राज्य आयुक्तों की नियुक्ति नहीं की है, जिन्हें दिव्यांग व्यक्तियों के पुनर्वास की निगरानी करनी होती है।
पीठ ने कहा, ''हम सभी राज्यों को निर्देश देते हैं कि वे आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम की धारा 79 के तहत चार सप्ताह के भीतर राज्य आयुक्तों की नियुक्ति करें। इस निर्देश का सख्ती से पालन किया जाये और किसी भी राज्य को इसमें कोई ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए।''
इसने कहा कि किसी भी प्रकार की चूक को गंभीरता से लिया जायेगा।
पीठ ने केंद्र सरकार द्वारा आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम के तहत अनिवार्य नियमित मुख्य आयुक्त की नियुक्ति नहीं किए जाने पर भी कड़ा रुख अपनाया। यह मुख्य आयुक्त दिव्यांग व्यक्तियों के पुनर्वास की निगरानी के लिए जिम्मेदार होता है।
पीठ ने केंद्र सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह कानून के तहत अनिवार्य प्रावधानों के अनुसार मुख्य आयुक्त की सहायता के लिए दो आयुक्तों की नियुक्ति भी चार सप्ताह के भीतर करे, ताकि दिव्यांग व्यक्तियों के पुनर्वास को सुनिश्चित किया जा सके।
पीठ ने राजीव रतूड़ी द्वारा 2025 में दायर जनहित याचिका को अगले साल जनवरी में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया है।
इसने केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से अनुपालन हलफनामे दाखिल करने को कहा।
इससे पहले 2024 में उच्चतम न्यायालय ने दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सार्वजनिक स्थानों तक पहुंच को बेहतर बनाने के उद्देश्य से दिए गए एक महत्वपूर्ण आदेश में केंद्र सरकार को तीन महीने के भीतर अनिवार्य सुगम्यता मानकों को लागू करने का निर्देश दिया था।
पीठ ने दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सार्वजनिक स्थानों तक सार्थक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश देने के अनुरोध संबंधी जनहित याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी थी।
इसने केंद्र सरकार से निर्देशों के कार्यान्वयन की दिशा में हुई प्रगति की रिपोर्ट देने को कहा।
भाषा
देवेंद्र पवनेश
पवनेश
2907 2008 दिल्ली