ओडिशा में बाढ़ से तीन लोगों की मौत, दो लाख से अधिक प्रभावित; भारी बारिश से सभी प्रमुख नदियां उफान पर
पवनेश
- 29 Jul 2026, 05:40 PM
- Updated: 05:40 PM
भुवनेश्वर, 29 जुलाई (भाषा) ओडिशा में बुधवार को बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी रही। उफनती नदियों के कारण राज्य के छह उत्तरी जिले जलमग्न हो गए हैं। इस दौरान अग्निशमन सेवा के एक कर्मी समेत तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने बताया कि तीनों मौतें क्योंझर जिले में हुई हैं, जो सबसे अधिक प्रभावित बालासोर, भद्रक और जाजपुर जिलों की तुलना में अपेक्षाकृत कम प्रभावित है।
उन्होंने बाढ़ की स्थिति की समीक्षा के बाद बताया कि ड्यूटी के दौरान करंट लगने से एक अग्निशमन कर्मी की मौत हो गई, दीवार गिरने से एक बुजुर्ग व्यक्ति की जान चली गई और एक बच्चे का शव बाढ़ के पानी में मिला।
उन्होंने कहा, ''बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित बालासोर, भद्रक और जाजपुर जिलों में किसी मानव या पशु की मौत की कोई सूचना नहीं है। हमने मुख्यमंत्री को उनके गृह जिले क्योंझर में हुई मौतों के बारे में जानकारी दे दी है।''
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि वह बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं और लोगों से नहीं घबराने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ''हर नागरिक का जीवन और सुरक्षा हमारे लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। मेरी सरकार और मैं लगातार बारिश और बाढ़ से उत्पन्न स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। मैंने मुख्य सचिव और विशेष राहत आयुक्त के साथ स्थिति पर चर्चा की है तथा प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरे प्रशासन को निर्देश दिए हैं।''
मुख्यमंत्री ने अग्निशमन कर्मी चंदन पटनायक की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया।
अग्निशमन सेवा के महानिदेशक सुधांशु सारंगी ने बताया कि जलभराव वाले इलाके से पानी निकालने के दौरान करंट लगने से चंदन पटनायक की मौत हुई। उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटे में अग्निशमन कर्मियों ने जलमग्न गांवों से 212 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है।
मंत्री पुजारी ने बताया कि बालासोर, भद्रक, जाजपुर, मयूरभंज, संबलपुर और ढेंकनाल जिले बाढ़ से गंभीर रूप से प्रभावित हैं।
इसके अलावा भारी बारिश के कारण क्योंझर, सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, बरगढ़, नुआपाड़ा, कालाहांडी, रायगडा और गजपति जिलों में भी बाढ़ की स्थिति बनी हुई है।
उन्होंने बताया कि 44 प्रखंडों के 266 गांव अब भी जलमग्न हैं। उन्होंने बताया कि बाढ़ के पानी से 761 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और 7,901 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है।
मंत्री ने कहा कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए 10 जिलों के विद्यालयों और आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद रखने का आदेश दिया गया है।
बुधबलंगा और जालका नदियों का पानी बालासोर जिले में कई गांवों में घुस गया है, जबकि भद्रक और जाजपुर में बैतरणी, बुधा और सालंदी नदियों के पानी ने कई इलाकों को प्रभावित किया है।
जल संसाधन विभाग के अनुसार, क्षेत्र की सभी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
अधिकारियों ने बताया कि जिला प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। उन्होंने बताया कि निचले इलाकों से करीब 30,000 लोगों को निकालकर राहत केंद्रों में पहुंचाया गया है, जहां उन्हें पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओडीआरएएफ) और अग्निशमन सेवा की टीम बचाव एवं राहत कार्यों में तैनात हैं। राज्य सरकार ने बाढ़ प्रबंधन और राहत कार्यों की निगरानी के लिए बालासोर, भद्रक और जाजपुर में तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को भी भेजा है।
पुजारी ने बताया कि छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और ओडिशा के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण महानदी का जलस्तर बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, ''हीराकुंड जलाशय में दोपहर के समय जलस्तर 616 फुट था, जबकि इसकी पूरी क्षमता 630 फुट है। हम सुरक्षित रूप से 620 फुट तक पानी रख सकते हैं। यदि जलस्तर इससे ऊपर जाता है तो अतिरिक्त फाटक खोलने पड़ेंगे।''
मंत्री ने कहा कि तेल और इब जैसी सहायक नदियों से महानदी में पानी आने के कारण बृहस्पतिवार तक कटक के पास नरज में जल प्रवाह करीब नौ लाख क्यूसेक तक पहुंच सकता है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अगले 24 घंटों में ओडिशा के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है।
भाषा अमित पवनेश
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