उच्चतम न्यायालय ने इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े दो लोगों को जमानत दी
नरेश
- 29 Jul 2026, 05:27 PM
- Updated: 05:27 PM
नयी दिल्ली, 29 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने इंडियन मुजाहिदीन के दो कथित सदस्यों को ज़मानत दे दी है, जो 2014 से हिरासत में थे। इसने कहा कि उन्हें लगातार हिरासत में रखना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त स्वतंत्रता के अधिकार का ''घोर उल्लंघन'' है।
न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने रेखांकित किया कि याचिकाकर्ता - मोहम्मद साकिब अंसारी और वकार अज़हर दिल्ली में दर्ज एक आतंकी मामले के सिलसिले में लगभग 12 साल से जेल में बंद हैं, तथा मुकदमा जल्द खत्म होने की कोई उम्मीद नहीं है।
पीठ ने 27 जुलाई के अपने आदेश में कहा, ''मुकदमे की कार्यवाही बहुत धीमी रही है और निकट भविष्य में इसके पूरा होने की कोई संभावना नहीं दिखती।''
इसने यह भी रेखांकित किया कि सह-आरोपियों में से एक को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
शीर्ष अदालत ने अंसारी और अज़हर की अलग-अलग याचिकाओं पर यह आदेश दिया। इन याचिकाओं में दिल्ली उच्च न्यायालय के अप्रैल के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ द्वारा नवंबर 2011 में दर्ज मामले में उन्हें ज़मानत देने से इनकार कर दिया गया था।
पीठ ने कहा, ''...हमें लगता है कि इस मामले में याचिकाकर्ताओं को लगातार जेल में रखना भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त स्वतंत्रता के अधिकार का घोर उल्लंघन है।''
इसने उल्लेख किया कि याचिकाकर्ताओं को 2014 में तीन प्राथमिकियों के सिलसिले में गिरफ़्तार किया गया था - जिनमें से दो राजस्थान में दर्ज की गई थीं - और वे तब से हिरासत में ही हैं।
पीठ ने कहा कि राजस्थान में दर्ज मामलों में से एक में, दोनों याचिकाकर्ताओं को मार्च 2021 में निचली अदालत ने दोषी ठहराया था और बाद में उच्च न्यायालय ने उन्हें सुनाई गई सज़ा पर रोक लगा दी थी।
शीर्ष अदालत ने कहा कि राजस्थान में उनके खिलाफ दर्ज एक और मामले में सुनवाई अभी बाकी है और दोनों याचिकाकर्ताओं को उस मामले में पहले ही ज़मानत मिल चुकी है।
इसने निर्देश दिया कि दिल्ली में दर्ज प्राथमिकी के सिलसिले में निचली अदालत की शर्तों और नियमों के आधार पर याचिकाकर्ताओं को ज़मानत पर रिहा किया जाए, बशर्ते उनकी किसी अन्य मामले में ज़रूरत न हो।
न्यायालय ने कहा कि अगर निचली अदालत या अभियोजन को लगता है कि वे मुकदमा पूरा होने में देरी करा रहे हैं, मुकदमे में सहयोग नहीं कर रहे हैं, या उन्हें मिली आज़ादी का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, तो अभियोजन पक्ष इस बारे में उच्चतम न्यायालय को बताकर उचित आदेश ले सकता है।
यह मामला तब शुरू हुआ जब नवंबर 2011 में इंडियन मुजाहिदीन के कथित सदस्य मोहम्मद कतील सिद्दीकी को पकड़ा गया और उसने दिल्ली तथा इसके आस-पास आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए संगठन का राजस्थान मॉड्यूल बनाए जाने के बारे में कथित तौर पर जानकारी दी।
इसके बाद विशेष प्रकोष्ठ ने कई लोगों को गिरफ़्तार किया और भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया।
भाषा
नेत्रपाल नरेश
नरेश
2907 1727 दिल्ली