जेल में बंद छह कुख्यात महिलाएं, किसी ने पति को सांप से डसवाया तो किसी ने शव नीले ड्रम में भरा
जितेंद्र
- 28 Jul 2026, 10:32 PM
- Updated: 10:32 PM
मेरठ, 28 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश के मेरठ जिला कारागार में इन दिनों सनसनीखेज हत्याओं के आरोपों का सामना कर रहीं छह महिला विचाराधीन कैदी एक-दूसरे से सटी बैरकों में रह रही हैं।
इन विचाराधीन कैदियों में पति को 'सांप से डसवा' कर जान से मारने के मामले की आरोपी, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान की हत्या की आरोपी पत्नी, शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में छिपाने के मामले की आरोपी और सात वर्षीय बच्चे की हत्या के मामले में आरोपी मां शामिल हैं।
चौधरी चरण सिंह जिला कारागार के वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने मंगलवार को 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि जेल में वर्तमान में 63 महिला बंदी हैं, जिनमें दामिनी, रविता, कोमल, मुस्कान, अंजलि और गुरप्रीत कौर जैसे आरोपी महिलाएं हत्या के गंभीर मामलों में शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि इन कैदियों के मामलों की सुनवाई अदालत में लंबित है और उनके पुनर्वास के लिए परामर्श, धार्मिक कार्यक्रमों तथा कौशल प्रशिक्षण जैसी गतिविधियां चलाई जा रही हैं।
शर्मा ने बताया, ''महिला कैदियों के लिए जेल में केवल दो बैरक हैं। इनमें से दो महिलाओं को बैरक 12-ए और चार को बैरक 12-बी में रखा गया है। उन्हें एक-दूसरे के निकट इसलिए रखा गया है ताकि वे सुधारात्मक गतिविधियों में भाग लेने के साथ-साथ भावनात्मक रूप से भी एक-दूसरे का सहयोग कर सकें।''
उन्होंने बताया कि इन छह महिला विचाराधीन कैदियों में दामिनी भी शामिल है, जिसे हाल ही में अपने पति को कथित तौर पर सांप से डसवाकर जान से मारने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
वहीं रविता पर भी अपने पति की हत्या कर उसे सांप के काटने से हुई मौत का रूप देने का आरोप है।
मेरठ के चर्चित 'नीले ड्रम हत्याकांड' की आरोपी मुस्कान पर अपने प्रेमी की मदद से अपने पति की हत्या कर शव को एक नीले ड्रम में छिपाने का आरोप है। कोमल पर बीएसएफ में तैनात अपने पति की हत्या की साजिश रचने और इसके लिए कथित तौर पर शूटर की मदद लेने का आरोप है, जबकि अंजलि पर अपने प्रेमी की सहायता से पति की हत्या कराने का आरोप है।
वहीं, गुरप्रीत कौर अपने सात वर्षीय बेटे की कथित हत्या के मामले में विचाराधीन कैदी है।
जेल प्रशासन ने बताया कि इन सभी मामलों की सुनवाई संबंधित अदालतों में लंबित है।
जेल अधीक्षक ने बताया कि महिला कैदी प्रतिदिन सुंदरकांड के पाठ और भजन-कीर्तन में भाग लेती हैं।
उन्होंने बताया कि महिला कैदियों की क्षमता के अनुसार उन्हें सिलाई, कढ़ाई, साफ-सफाई, पुस्तकालय रखरखाव, रसोई और अन्य नियमित कार्यों में भी लगाया जाता है।
शर्मा ने बताया, ''तनाव से उबरने और सकारात्मक व्यवहार विकसित करने के लिए समय-समय पर मनोवैज्ञानिक परामर्श सत्र भी आयोजित किए जाते हैं।''
उन्होंने परिजनों से मुलाकात के संबंध में बताया कि अब तक मुस्कान और दामिनी से मिलने कोई नहीं आया है जबकि अन्य महिला कैदियों से उनके परिजन समय-समय पर मिलने आते हैं।
अधिकारी ने बताया, ''परिजनों से मुलाकात के दौरान कई कैदी भावुक हो जाती हैं। ऐसे अवसरों पर परामर्शदाता और जेलकर्मी उन्हें आवश्यक सहयोग प्रदान करते हैं।'' जेल प्रशासन के अनुसार, बैरक 12-ए में कैद दामिनी बहुत कम बोलती है और नियमित गतिविधियों में उसकी भागीदारी भी सीमित रहती है।
शर्मा ने बताया कि दामिनी की शैक्षिक योग्यता को देखते हुए उसे जेल पुस्तकालय के रखरखाव के साथ महिला कैदियों और उनके बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अधिकारियों ने बताया कि उसी बैरक में बंद मुस्कान अपना अधिकांश समय अपनी छोटी बेटी की देखभाल में बिताती है, जो उसके साथ जेल में रह रही है।
बैरक 12-बी में रविता, कोमल, अंजलि और गुरप्रीत कौर को रखा गया है।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि जेल प्रशासन का उद्देश्य केवल सुरक्षा सुनिश्चित करना नहीं बल्कि शिक्षा, कौशल विकास, धार्मिक गतिविधियों और नियमित परामर्श के माध्यम से कैदियों के सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक पुनर्वास की दिशा में भी कार्य करना है।
जेल प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि ये सभी छह महिलाएं विचाराधीन कैदी हैं और उनके दोषी या निर्दोष होने का अंतिम निर्णय संबंधित अदालतें करेंगी।
भाषा सं राजेंद्र जितेंद्र
जितेंद्र
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