दुबई, ब्रिटेन से जुड़े 'म्यूल' खाता गिरोह का दिल्ली पुलिस ने भंडाफोड़ किया, छह गिरफ्तार
अविनाश
- 28 Jul 2026, 07:29 PM
- Updated: 07:29 PM
नयी दिल्ली, 28 जुलाई (भाषा) दिल्ली पुलिस ने 10 हजार रुपये की साइबर ठगी के मामले की जांच के दौरान 'म्यूल' (कमीशन पर मिलने वाले) बैंक खातों के एक बड़े गिरोह का भंड़ाफोड़ किया है जिसके तार दुबई और ब्रिटेन से जुड़े हैं। गिरोह ने फर्जी कंपनियों के नाम पर खोले गए 248 बैंक खातों के जरिए 70 करोड़ रुपये इधर-उधर किए। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
उनके मुताबिक, जांच में एक बैंक प्रबंधक सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि चार अन्य बैंक अधिकारियों और सहयोगियों को कथित तौर पर गिरोह की मदद करने के लिए पाबंद किया गया है या हिरासत में लिया गया है।
पुलिस के अनुसार, वित्तीय विश्लेषण से पता चला कि इन 248 बैंक खातों के माध्यम से 70 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन किया गया था। पुलिस ने पाया कि राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज 20 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की 156 शिकायतों से ये खाते जुड़े हैं।
पुलिस ने कहा कि जांच के दौरान अब तक 56 लाख रुपये 'फ्रीज' करा दिए गए हैं, जबकि इन खातों से जुड़ी कुल विवादित राशि लगभग 37 करोड़ रुपये है।
मध्य दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) रोहित राजबीर सिंह ने एक बयान में कहा, "जांच से यह भी पता चला कि साइबर धोखाधड़ी गिरोह की पैठ पूरे भारत में है, इससे जुड़ी शिकायतें 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आई हैं।"
उन्होंने कहा कि गिरोह पिछले तीन से चार वर्षों से भारत भर में साइबर धोखाधड़ी करने वालों के साथ-साथ दुबई और ब्रिटेन स्थित संचालकों को कॉरपोरेट चालू बैंक खाता उपलब्ध कर रहा था।
अधिकारी ने कहा कि इन खातों का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी से मिली रकम प्राप्त करने और उसे इधर-उधर करने के लिए किया जाता था जिससे जांच एजेंसियों के लिए असली लाभार्थियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था।
गिरफ्तार किए गए छह लोगों की पहचान कथित मास्टरमाइंड दिशांत खन्ना (36), बैंक प्रबंधक कुंदन कुमार (35), मोहित सोनी (26) और योगेश कुमार (35), मुखौटा कंपनी के मालिक रंजीत डेमियन एक्का (41) और गिरोह के सदस्य मृदुल (22) के रूप में की गई है।
बयान में कहा गया है, "उनके अलावा, द्वारका सेक्टर-22 में एक बैंक शाखा से जुड़े चार लोगों - शाखा प्रबंधक कोमाक्षी शर्मा, उप प्रबंधक पायल सेतिया, बैंक टेलर सृष्टि और बीमा एजेंट चिराग भाटिया को 'अपने ग्राहक को जानो' (केवाईसी) नियमों को दरकिनार कर खाते खोलने में मदद करने और अवैध लाभ प्राप्त करने के आरोप में पाबंद किया गया है।"
बयान के मुताबिक, जांच शुरू में एक नियमित साइबर धोखाधड़ी की शिकायत के साथ शुरू हुई। मध्य दिल्ली के बलजीत नगर के एक निवासी ने अपनी शिकायत में बताया कि उससे सोशल मीडिया के माध्यम से घर से ऑनलाइन काम का झांसा देकर 10 हजार रुपये ठग लिए। एनसीआरपी पर दर्ज शिकायत के आधार पर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई।
जांचकर्ताओं ने पता लगाया कि ठगी की राशि में से 5,000 रुपये एक मुखौटा कंपनी 'डेमियन ट्रेडर्स' के नाम पर एक निजी बैंक में खोले गए चालू खाते में गया। हालांकि, न तो कंपनी के मालिक और न ही उसके पंजीकृत पते को शुरू में सत्यापित किया जा सका।
बयान के मुताबिक, आगे की जांच में पुलिस मोहित सोनी तक पहुंची और आठ जुलाई को उसे गिरफ्तार कर लिया गया और इसके बाद उससे पूछताछ तथा उसके डिजिटल उपकरणों की जांच में एक बेहद संगठित अंतरराष्ट्रीय गिरोह का खुलासा हुआ, जो भारत और विदेशों में सक्रिय साइबर अपराधियों को कॉरपोरेट बैंक खाते उपलब्ध करा रहा था।
डीसीपी ने कहा, "गिरोह पहले आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों की पहचान करता और उनके पहचान दस्तावेज एकत्र करता। उन दस्तावेजों का उपयोग करके, फर्जी कंपनियां और मुखौटा कंपनियां बनाता। इन मुखौटा कंपनियों के उपयोग विभिन्न बैंकों में चालू खाते खोले जाते।"
पुलिस ने दावा किया कि दिशांत खन्ना प्रमुख समन्वयक था और वह बैंकों से जुड़े लोगों के साथ काम करता और सुनिश्चित करता कि केवाईसी सत्यापन में कमी के बावजूद बैंक खाते जल्दी खुलें।
पुलिस ने कहा कि बैंक प्रबंधक कुंदन कुमार ने खाते खोलने के लिए 75,000 रुपये की रिश्वत ली जिसमें 55,000 रुपये सीधे उसके व्यक्तिगत खाते में जमा किए गए थे। एक अन्य निजी बैंक की शाखा के अधिकारियों ने कथित तौर पर रिश्वत और बीमा-संबंधी प्रोत्साहन के बदले चालू खाते खोलने में सहायता की।
पुलिस ने शालीमार बाग स्थित एक परिसर पर भी छापा मारा और वहां से 248 बैंक खाता किट, 38 पंजीकृत सिम कार्ड, 22 मोबाइल फोन, फर्जी कंपनी की 28 रबड़ स्टांप, विभिन्न बैंकों के 55 डेबिट और क्रेडिट कार्ड, एक लाख रुपये नकद और एक गाड़ी जब्त की।
भाषा नोमान नोमान अविनाश
अविनाश
2807 1929 दिल्ली