धांधली के आरोपों के बीच पीओके चुनाव के पहले चरण में शरीफ की पीएमएल-एन को नौ सीट मिलीं
सुरेश
- 28 Jul 2026, 08:19 PM
- Updated: 08:19 PM
इस्लामाबाद, 28 जुलाई (भाषा) पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में सोमवार को हुए पहले चरण के चुनाव में 13 में से नौ सीट पर जीत हासिल की है। निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
सोमवार को हुए पहले चरण के चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगाए गए हैं। इसमें पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने शेष चार सीट पर जीत दर्ज की।
पीओके की तथाकथित विधानसभा की 45 सीट के लिए चुनाव तीन चरणों में 27 जुलाई से 10 अगस्त के बीच कराये जा रहे हैं।
भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश उसके अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। नयी दिल्ली का यह भी कहना है कि पाकिस्तान ने इन केंद्र शासित प्रदेशों के कुछ हिस्सों पर ''अवैध तरीके से और जबरन कब्जा'' कर रखा है।
भारत ने मंगलवार को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जारी चुनाव को लेकर कहा कि यह इस्लामाबाद की ओर से अपने ''अवैध कब्जे'' को छिपाने और क्षेत्र में हो रहे ''गंभीर'' मानवाधिकार उल्लंघनों को ढकने का प्रयास है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नयी दिल्ली में कहा, ''यह मौजूदा दिखावटी चुनावी प्रक्रिया कुछ और नहीं, बल्कि पाकिस्तान की ओर से अपने अवैध कब्जे को छिपाने और इस क्षेत्र में हुए गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों को ढकने का एक प्रयास है।''
पाकिस्तान के निर्वाचन आयोग द्वारा मंगलवार को जारी प्रारंभिक परिणाम के अनुसार, नवाज शरीफ और शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली पीएमएल-एन ने नौ निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दर्ज की, जबकि भुट्टो परिवार के नेतृत्व वाली पीपीपी ने चार सीट हासिल कीं। दोनों दल संघीय सरकार में गठबंधन सहयोगी हैं। पीओके में यह मुकाबला मुख्य रूप से इन दोनों दलों के बीच है, क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने चुनाव का बहिष्कार किया है।
पीओके की तथाकथित विधानसभा में कुल 53 सीट हैं। इनमें से 45 सीट पर सीधे चुनाव होते हैं, जबकि आठ सीट महिलाओं, तकनीक विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित हैं।
पीपीपी के वरिष्ठ नेता नय्यर बुखारी ने सात सीट पर धांधली का आरोप लगाते हुए कहा, "हमारी जीती हुई सीट पीएमएल-एन को दे दी गई हैं।"
पीपीपी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में धांधली की जांच पूरी होने तक परिणाम घोषित नहीं किए जाएं।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने धांधली के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव बड़े पैमाने पर ''शांतिपूर्ण और निष्पक्ष'' तरीके से हुए हैं। उन्होंने कहा कि केवल एक निर्वाचन क्षेत्र में हिंसा की सूचना मिली।
मतदान के दिन हुई हिंसक झड़प में पीपीपी के एक कार्यकर्ता की मौत हो गई और दो लोग घायल हो गए। आरोप है कि यह घटना पीएमएल-एन नेता द्वारा कथित रूप से गोलीबारी किए जाने के बाद शुरू हुई।
इस बीच, पीओके में तथाकथित सरकार द्वारा प्रतिबंधित किए गए समूह जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने मंगलवार को कहा कि चुनाव के पहले चरण के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाले कर्मियों के साथ हुई झड़पों में उसके कम से कम 14 कार्यकर्ता मारे गए और दो दर्जन से अधिक घायल हुए।
हालांकि, क्षेत्र के कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने मृतकों की संख्या पर सवाल उठाते हुए इसे खारिज किया है और जेएएसी प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षाकर्मियों पर गोलीबारी शुरू करने का आरोप लगाया है।
ये चुनाव इस क्षेत्र में करीब दो महीने की हिंसा के बाद हो रहा है, जिसमें कई लोगों की मौत हुई है। यह हिंसा 12 विवादित शरणार्थी सीट को समाप्त करने की ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी की मांग को लेकर शुरू हुए लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद हुई थी। इन प्रदर्शनों के बाद सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की थी।
भारत ने 14 जुलाई को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में प्रदर्शनों को इस्लामाबाद के दशकों लंबे ''व्यवस्थित शोषण और प्रशासनिक दमन'' का प्रत्यक्ष परिणाम बताया था। भारत ने प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई की आलोचना भी की थी।
भाषा अमित सुरेश
सुरेश
2807 2019 इस्लामाबाद