निर्वाचित जनप्रतिनिधि जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी न करें: बंगाल सरकार
प्रशांत
- 23 Jul 2026, 08:01 PM
- Updated: 08:01 PM
कोलकाता, 23 जुलाई (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि नगरपालिका अध्यक्षों और ग्राम पंचायतों समेत निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को अब जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि अब से केवल नामित सरकारी अधिकारियों को ही जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार होगा। उन्होंने कहा कि सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से यह अधिकार वापस ले लिया गया है।
यह घोषणा ऐसे समय की गई है, जब बृहस्पतिवार को पुलिस ने भ्रष्टाचार और फर्जी जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्रों के वितरण के आरोपों की जांच के लिए कई जिलों में समन्वित छापेमारी शुरू की।
अग्रवाल ने कहा कि सरकार ने ऐसे प्रमाणपत्रों को जारी करने में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां पाई हैं। उन्होंने बताया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान कई कथित अनियमितताएं सामने आईं।
मुख्य सचिव ने कहा, "हमें पुलिस समेत कई जगहों से बड़ी संख्या में शिकायतें मिली हैं। कई स्थानों पर फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों का पता चला है और कई लोगों ने इसका गलत तरीके से फायदा उठाया है। हालांकि नियम पहले से लागू थे, लेकिन बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं।''
राज्य सरकार ने 1997 से अब तक पंजीकृत सभी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों का दोबारा सत्यापन करने का भी निर्णय लिया है। अधिकारी घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे और जो भी प्रमाणपत्र फर्जी पाया जायेगा, उसे रद्द कर दिया जाएगा।
अग्रवाल ने कहा, ''किसी को भी घबराने की कोई जरूरत नहीं है। यह सत्यापन केवल एक प्रक्रियात्मक कवायद है, जिसका उद्देश्य व्यवस्था को भ्रष्टाचार से मुक्त बनाना है। यह कार्य केवल सरकारी अधिकारियों द्वारा किया जाएगा। सत्यापन प्रक्रिया में किसी भी संविदा कर्मचारी को शामिल नहीं किया जाएगा।''
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसे प्रमाणपत्र जारी करने में अनियमितताओं के लिए किसी भी सरकारी अधिकारी को दोषी पाए जाने पर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि दिन में इससे पहले, पुलिस दलों ने जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने में कथित अनियमितताओं की जांच के तहत राज्य के कई जिलों में नगरपालिकाओं और नगर निगमों में तलाशी अभियान चलाया।
उन्होंने बताया कि ये तलाशी अभियान कोलकाता, बीरभूम, कूच बिहार, पश्चिम बर्धमान, हुगली, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना जिलों में चलाए गए।
एक अधिकारी ने कहा, ''पुलिस विशेष शिकायतों के आधार पर कार्रवाई कर रही है और जांच के तहत संबंधित रिकॉर्ड एकत्र कर रही है। ये तलाशी अभियान सरकार के निर्देशों के अनुसार चलाये जा रहे हैं और जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाना चाहिए।''
पुलिस ने जब्त किए गए दस्तावेजों का विवरण या यह जानकारी साझा नहीं की है कि जांच के संबंध में कोई प्राथमिकी दर्ज की गई है या नहीं।
भाषा देवेंद्र प्रशांत
प्रशांत
2307 2001 कोलकाता