जंतर मंतर पर जख्मी हुए एसीपी ने कहा, 'मेरे सिर पर पत्थर लगा'
नरेश
- 23 Jul 2026, 05:07 PM
- Updated: 05:07 PM
नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी के जंतर मंतर पर कथित पथराव में जख्मी हुए सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) जय प्रकाश ने बृहस्पतिवार को बताया कि धरना स्थल पर बुधवार शाम लगभग 4.30 बजे भीड़ बढ़कर 5,000 से 6,000 लोगों की हो गई थी।
प्रकाश ने घटना के एक दिन बाद 'पीटीआई-भाषा' को बताया, "मेरे सिर पर पत्थर लगा था। जब मेरे सहकर्मी मुझे विरोध स्थल से निकालकर आरएमएल अस्पताल ले गए, तब मेरे सिर से खून बह रहा था। मेरे सिर में मामूली फ्रैक्चर है और आगे का इलाज किया जा रहा है।"
एसीपी उन दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों में शामिल हैं, जो संसद मार्ग के पास बुधवार को प्रदर्शनकारियों द्वारा किए गए कथित पथराव में घायल हो गए थे। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, "संसद मार्ग पर कल हुई हिंसा की घटना के संबंध में प्राथमिकी दर्ज की गई है और मामले में आगे की जांच जारी है।"
पंजाबी बाग उपमंडल के एसीपी जय प्रकाश ने घटना को याद करते हुए बताया कि उन्हें सुबह सात बजे से जंतर-मंतर के पास तैनात किया गया था।
उन्होंने कहा, "प्रदर्शनकारी सरकार और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। शाम लगभग 4.30 बजे भीड़ बढ़कर करीब 5,000 से 6,000 लोगों की हो गई थी। लगभग 500 प्रदर्शनकारी उपद्रव करने की कोशिश कर रहे थे, तभी हमने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप किया।"
अधिकारी ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को प्रतिबंधित क्षेत्रों की ओर बढ़ने से रोकने के लिए मानव श्रृंखला बनाई, जिसके बाद कुछ प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पत्थरबाजी शुरू कर दी और पानी की बोतलें फेंकने लगे।
एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि कनॉट प्लेस में तैनात एक अन्य एसीपी भी भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान पथराव में घायल हो गए और उन्हें आरएमएल अस्पताल ले जाया गया।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कई जगह झड़पें हुईं, जिसके कारण स्थिति पर काबू पाने के लिए सुरक्षाकर्मियों को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि इस हिंसा में कम से कम दो एसीपी और चार अन्य पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। उन्होंने बताया कि सभी घायलों की हालत स्थिर है।
सूत्रों ने यह भी आरोप लगाया कि कई "असामाजिक" तत्व धरना स्थल में घुस आए हैं और पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने तथा कानून-व्यवस्था न बिगाड़ने की बार-बार की जा रही अपील के बावजूद वे हिंसा में शामिल थे।
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