अदालत ने खुले मैनहोल को लेकर बीएमसी को फटकार लगाई
अविनाश
- 06 Jul 2026, 09:09 PM
- Updated: 09:09 PM
मुंबई, छह जुलाई (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने सोमवार को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) को खुले मैनहोल को लेकर कड़ी फटकार लगाई और सवाल किया कि नगर निकाय बचाव के कदम उठाने से पहले हमेशा मौतों का इंतजार क्यों करता है।
न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ ने खुले मैनहोल के मुद्दे पर की गई कार्रवाई के बारे में बीएमसी की प्रगति रिपोर्ट और हलफनामों को ''बेकार और सिर्फ दिखावा' करार देते हुए खारिज कर दिया।
अदालत ने यह टिप्पणी 55 वर्षीय असलम शेख की मौत की ओर ध्यान आकर्षित कराए जाने के बाद की, जो जुलाई में शहर में भारी बारिश के दौरान उपनगरीय साकीनाका में एक खुले मैनहोल में गिर गए थे।
बीएमसी ने सोमवार को अदालत में दाखिल हलफनामा में कहा कि घटना के तुरंत बाद नगर निकाय के प्रमुख ने बैठक की और उस इलाके के लिए जिम्मेदार चार अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश दिया, जहां यह हादसा हुआ था।
हलफनामे में कहा गया है कि घटना की जांच के लिए एक समिति भी बनाई गई है। साथ ही, यह समिति ऐसे उपाय भी सुझाएगी जिनसे भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
बीएमसी का पक्ष रखने के लिए पेश अधिवक्ता अनिल सखारे ने अदालत को बताया कि आयुक्त ने भरोसा दिलाया है कि शहर में ऐसी कोई घटना नहीं होगी।
अदालत ने हालांकि बीएमसी को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि निकाय अधिकारियों की लापरवाही के कारण लोगों की जान जाती है।
पीठ ने कहा, ''ऐसी घटना के बाद आपने (बीएमसी) ने क्या किया, यह महत्वपूर्ण नहीं है। ऐसी अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए आप क्या करते हैं, यह मायने रखता है। जीवन अनमोल है। इंसानी जिदगी सबसे ज्यादा अहम है।''
अदालत ने कहा कि शहर में मॉनसून के दौरान उत्पन्न स्थिति के बारे में सभी को जानकारी है, इसलिए बीएमसी को पहले से ही जरूरी कदम उठाने चाहिए।
पीठ ने सवाल किया, ''मॉनसून से पहले कदम क्यों नहीं उठाए जा सकते? क्या बीएमसी किसी की जान जाने का इंतजार करती रहेगी और उसके बाद ही उपाय करने के लिए हरकत में आएगी?''
सखारे ने अदालत को बताया कि शहर में अगर कोई भी मैनहोल खुला है, तो उसे 12 घंटे के अंदर बंद कर दिया जाएगा और अगर मरम्मत के काम के लिए कोई मैनहोल खोला जाता है, तो उसके चारों ओर अवरोधक लगाए जाएंगे।
बीएमसी के हलफनामे में यह भी बताया गया कि दो जुलाई को जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
अदालत ने इसके बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तारीख तय की।
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश
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