प्रधानमंत्री को छात्रों और एक 'अक्षम' मंत्री में से किसी एक का चयन करना होगा: सीजेपी संस्थापक दीपके
रंजन
- 13 Jun 2026, 11:02 PM
- Updated: 11:02 PM
(तस्वीरों के साथ)
अमृतसर, 13 जून (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शनिवार को अमृतसर में विरोध प्रदर्शन के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को यह चयन करना होगा कि उनके लिए छात्र अधिक महत्वपूर्ण हैं या एक 'अक्षम' और 'विफल' मंत्री।
यह विरोध प्रदर्शन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चलाए जा रहे दीपके के राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा है।
छात्रों और युवाओं ने बड़ी संख्या में शहर के प्रवेश द्वार 'गोल्डन गेट' पर परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं और प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर किए जा रहे सीजेपी के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
इसी तरह के विरोध प्रदर्शन इससे पहले दिल्ली, पुणे और लखनऊ में भी आयोजित किए गए थे।
दीपके ने कहा, ''हम सभी 20 जून को दिल्ली जाएंगे और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक वहां डेरा डालेंगे। जेल जाने से मत डरो। जब मैं अमेरिका से भारत लौटा था, तब मैंने भी सोचा था कि मुझे जेल जाना पड़ेगा।''
दीपके ने कहा कि मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) और केंद्रीय माध्यमिक परीक्षा बोर्ड (सीबीएसई)के छात्रों को न्याय दिलाना है और जवाबदेही तय होनी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र के लीक होने की घटनाओं को जारी नहीं रहने दिया जा सकता।
सीजेपी संस्थापक ने यह भी कहा कि पंजाब के समर्थन के बिना देश में कोई भी आंदोलन सफल नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा, ''किसानों का (अब निरस्त हो चुके) कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन पंजाब से शुरू हुआ था। मैं प्रदर्शनकारियों में शामिल होने के लिए सिंघू बॉर्डर पर गया था। हमने देखा कि केंद्र ने आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश कैसे की।''
दीपके ने दोहराया कि परीक्षा में हुई गड़बड़ी की जिम्मेदारी लेते हुए प्रधान को पद छोड़ना होगा। उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक फैसला लेना होगा-या तो वे छात्रों के साथ खड़े हों या एक अक्षम और असफल मंत्री के साथ। उन्हें जल्द ही फैसला लेना होगा।''
चेतावनी के बावजूद प्रधान के इस्तीफा नहीं देने का जिक्र करते हुए दीपके ने कहा कि मौजूदा सरकार से ज्यादा 'बेशर्म' कोई नहीं हो सकती।
सीजेपी के संस्थापक ने यह भी कहा कि वे पिछले शनिवार को अमेरिका से लौट आए क्योंकि सरकार ने छात्रों की बात सुनना बंद कर दिया था। उन्होंने कहा, ''सरकार हमें तवज्जो नहीं दे रही है।''
प्रदर्शनकारियों में से एक गुरविंदर सिंह ने कहा कि शनिवार को समाज के विभिन्न वर्गों के लोग छात्रों और उनकी मांगों का समर्थन करने के लिए सड़कों पर उतरे।
सिख युवा और किसान सीजेपी के प्रदर्शनकारियों के सामने पंजाब की समस्याओं को उठाते हुए देखे गए, जिनमें बेअदबी की घटनाएं, सिख कैदियों (बंदी सिंहों) की रिहाई और कृषि समुदाय की दुर्दशा शामिल थी।
कुछ ने प्रदर्शनकारियों को 'दिशाहीन' भी करार दिया, क्योंकि सरकार के रुख में बदलाव न आने पर आगे की कार्रवाई को लेकर स्पष्टता का अभाव दिखा।
माझा क्षेत्र (तरनतारन, गुरदासपुर, पठानकोट और अमृतसर) के युवा काफी संख्या में प्रदर्शन में शामिल हुए।
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा कुछ बेरोजगार युवाओं की तुलना 'कॉकरोच' से करने वाली टिप्पणी के जवाब में पिछले महीने एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन के रूप में उभरे सीजेपी ने छह जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद 11 जून को पुणे और 12 जून को लखनऊ में भी प्रदर्शन किए गए।
इस समूह ने प्रश्नपत्र लीक से संबंधित सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से लोकप्रियता हासिल की और खुद को शिक्षा क्षेत्र में सुधारों की वकालत करने वाले युवा नेतृत्व वाले मंच के रूप में स्थापित किया। सीजेपी की मुख्य मांग प्रधान का इस्तीफा है।
हालांकि, प्रधान न्यायाधीश ने बाद में कहा कि मीडिया के एक वर्ग ने उनकी 'कॉकरोच' संबंधी टिप्पणी को गलत तरीके से उद्धृत किया जिससे आक्रोश भड़क गया।
भाषा संतोष रंजन
रंजन
1306 2302 अमृतसर