तृणमूल कांग्रेस बंगाल विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देगी: कल्याण बनर्जी
पवनेश
- 05 Jun 2026, 10:28 PM
- Updated: 10:28 PM
कोलकाता, पांच जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस सोमवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुखकर पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती देगी जिसमें बागी नेता रिताब्रता बनर्जी को सदन में विपक्ष के नेता के रूप मान्यता दी गई है। पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी ने यह जानकारी दी।
यह निर्णय शुक्रवार शाम को तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई एक बैठक में लिया गया। बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने हाल में हुए विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद कुछ विधायकों की बगावत को लेकर चर्चा की गई।
तृणमूल कांग्रेस को तीन जून को अपने 28 साल के इतिहास में पहली फूट का सामना करना पड़ा था और पार्टी के 58 बागी विधायकों ने निष्कासित नेता रिताब्रता बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष चुनकर विधायक दल पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। इसके साथ ही उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से मान्यता भी प्राप्त कर ली, जिससे ममता बनर्जी की पार्टी अपने गठन के बाद से अब तक के सबसे गंभीर आंतरिक संकट में घिर गई है।
कल्याण बनर्जी ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, ''हमने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ अदालत जाने का फैसला किया है। हमारा मानना है कि यह फैसला स्थापित मानदंडों और संसदीय प्रक्रियाओं के खिलाफ है। नियमों का उल्लंघन हुआ है।''
प्रस्तावित कानूनी चुनौती पर प्रतिक्रिया देते हुए, रिताब्रता बनर्जी ने आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि सभी संवैधानिक और प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं का पालन किया गया है।
उन्होंने पत्रकारों से कहा, ''सभी नियमों का पालन किया गया है। आज ममता बनर्जी द्वारा एक बैठक बुलाई गई थी। कृपया जाकर देखें कि उस बैठक में कितने विधायकों ने हिस्सा लिया।''
उन्होंने कहा कि इससे यह संकेत मिलता है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों का बहुमत विद्रोही खेमे के साथ बना रहा।
रिताब्रता बनर्जी के दावे का जवाब देते हुए, तृणमूल कांग्रेस के मीडिया प्रकोष्ठ ने कहा कि ममता बनर्जी के आवास पर हुई बैठक पार्टी के सभी विधायकों या सांसदों के लिए नहीं बुलाई गई थी, बल्कि यह पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक थी।
पार्टी के मीडिया प्रकोष्ठ द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, ''यह राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक थी, न कि सभी विधायकों या सांसदों की बैठक। महुआ मोइत्रा और सुष्मिता देव समेत कई सदस्यों ने, साथ ही वरिष्ठ नेताओं मुकुल संगमा और राजेश त्रिपाठी ने भी ऑनलाइन तरीके से इसमें भाग लिया।''
दूसरी ओर बागी खेमे ने एक नयी नेतृत्व संरचना प्रस्तुत की, जिसमें रिताब्रता को नेता प्रतिपक्ष और अखरुज्जमान को मुख्य सचेतक नामित किया गया। वरिष्ठ विधायकों और पार्टी के पुराने सदस्यों जावेद अहमद खान, संदीपन साहा, सबीना यास्मीन और शिउली साहा को उपनेता नियुक्त किया गया।
तृणमूल कांग्रेस के तमाम दिग्गज विधायक भी इस विद्रोह में शामिल हो गए हैं, जिनमें समर मुखोपाध्याय, अरूप राय, रथीन घोष, जावेद खान और प्रसून बनर्जी जैसे नाम शामिल हैं।
विवाद तब शुरू हुआ था जब विधानसभा अध्यक्ष को वरिष्ठ तृणमूल विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को मान्यता देने के लिए भेजे गए एक प्रस्ताव में कथित तौर पर कई विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर पाए गए।
इन आरोपों के कारण इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई और सीआईडी जांच शुरू कर दी गई।
भाषा
देवेंद्र पवनेश
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