भारत-अमेरिका ने पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते की प्रतिबद्धता जताई
रमण
- 04 Jun 2026, 10:24 PM
- Updated: 10:24 PM
नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) भारत और अमेरिका ने पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, जो द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा। बृहस्पतिवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।
दोनों देशों के मुख्य वार्ताकारों की एक से चार जून तक चली बातचीत के समापन के बाद यह बयान जारी किया गया।
वाणिज्य मंत्रालय ने कहा, "बातचीत सहयोग और व्यावहारिकता की भावना के साथ हुई। इस दौरान दोनों पक्षों ने व्यापार और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने वाले समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता दोहराई।"
बयान के मुताबिक, दोनों देशों के व्यापार दलों ने वस्तु व्यापार, गैर-शुल्क उपायों, सीमा शुल्क, व्यापार सुगमता, आर्थिक सुरक्षा समन्वय और आपसी हित के अन्य मुद्दों पर रचनात्मक एवं सकारात्मक चर्चा की।
अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व उसके मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच ने किया जबकि भारतीय पक्ष की अगुवाई वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव एवं वार्ताकार दर्पण जैन ने की।
यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब दोनों देश पहले चरण के द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) की रूपरेखा को अंतिम रूप दे चुके हैं और अब अंतरिम व्यापार समझौते एवं व्यापक बीटीए की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इससे पहले कहा था कि पहले चरण के समझौते के अधिकांश बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है और अब कुछ 'छोटे मुद्दों' पर ही चर्चा चल रही है।
भारत एवं अमेरिका ने सात फरवरी को एक संयुक्त बयान में अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा तय करने की घोषणा की थी। इसमें अमेरिका ने भारत पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई थी और रूसी तेल खरीद से जुड़े 25 प्रतिशत शुल्क को भी हटा दिया था। बाकी शुल्क को भी घटाकर 18 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया था।
हालांकि, 20 फरवरी को अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक जवाबी सीमा शुल्कों को खारिज कर दिया। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने 24 फरवरी से 150 दिन के लिए सभी देशों पर 10 प्रतिशत का समान शुल्क लागू करने की घोषणा की।
प्रस्तावित ढांचे के तहत भारत ने अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों पर शुल्क समाप्त या कम करने के साथ कई कृषि एवं खाद्य उत्पादों पर रियायत देने का भी प्रस्ताव रखा है। इनमें पशु आहार का लाल ज्वार, मेवे, ताजा एवं प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, वाइन और अन्य उत्पाद शामिल हैं।
भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान एवं उनके कलपुर्जे, कीमती धातुएं, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला खरीदने की भी मंशा जताई है।
अमेरिकी शुल्क ढांचे में हाल के बदलावों के कारण इस समझौते में संशोधन की जरूरत पड़ सकती है, ताकि भारत को श्रीलंका, पाकिस्तान एवं बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले शुल्क के मामले में बढ़त मिल सके।
अमेरिका, भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में इनका द्विपक्षीय व्यापार 87.3 अरब डॉलर के निर्यात और 52.9 अरब डॉलर के आयात के साथ महत्वपूर्ण स्तर पर पहुंच गया है।
भाषा प्रेम
प्रेम रमण
रमण
0406 2224 दिल्ली