जलाशयों में पर्याप्त पानी खरीफ फसलों की बुवाई पर अल नीनो के असर को कर सकता है कम: रिपोर्ट
रमण
- 04 Jun 2026, 08:25 PM
- Updated: 08:25 PM
मुंबई, चार जून (भाषा) जलाशयों में पानी का पर्याप्त भंडार खरीफ फसलों की बुवाई और उनके आरंभिक विकास पर अल नीनो के कारण बारिश में कमी के असर को कम कर सकता है। लेकिन नमी की कमी, कीटों के संक्रमण का खतरा और उर्वरकों की सीमित आपूर्ति पैदावार पर बुरा असर डाल सकती है। बृहस्पतिवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
अल नीनो एक मौसमी परिघटना है। इससे मॉनसून कमजोर होता है और बारिश को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है।
क्रिसिल इंटेलिजेंस का अनुमान है कि अल नीनो के कारण बारिश में आने वाला बदलाव, भारत के वर्ष 2026 के खरीफ सत्र को प्रभावित कर सकता है, लेकिन जलाशयों में पानी का पर्याप्त भंडार बुवाई और फसल के आरंभिक विकास पर पड़ने वाले असर को सीमित रखने में मददगार साबित होगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि खरीफ की बुवाई वाले तीन-चौथाई इलाकों में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान होने के बावजूद, सत्र की शुरुआत में फसल पर इसका असर काफी हद तक सीमित रहने की संभावना है।
पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख कृषि प्रधान राज्यों में बारिश की कमी देखने को मिल सकती है। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख क्षेत्रों में जलाशयों में पानी का भंडार सामान्य स्तर से काफी ऊपर बना हुआ है। पश्चिमी क्षेत्र में 44 प्रतिशत, उत्तरी क्षेत्र में 34 प्रतिशत, मध्य क्षेत्र में 20 प्रतिशत और दक्षिणी क्षेत्र में छह प्रतिशत जल स्तर अधिक है।
हालांकि, पूर्वी भारत में जलाशयों में पानी का भंडार सामान्य स्तर से 11 प्रतिशत कम है, लेकिन पिछले एक महीने में हुई अनुकूल बारिश ने इस पूरे क्षेत्र में मिट्टी में नमी की स्थिति को बेहतर बनाया है।
नतीजतन, बुवाई और फसल के जमने की गतिविधियां एक स्थिर गति से आगे बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, देश के बाकी हिस्सों की तुलना में यह क्षेत्र मॉनसून के समय पर आगे बढ़ने और बारिश के सही वितरण पर अधिक निर्भर रहता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सत्र के दूसरे हिस्से में नमी की कमी, कीटों और बीमारियों का बढ़ता प्रकोप, और उर्वरकों की सीमित उपलब्धता के कारण फसल की उत्पादकता पर जोखिम पैदा हो सकता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि उर्वरकों की सीमित आपूर्ति और फसल सुरक्षा उत्पादों पर बढ़ती निर्भरता के कारण खेती में लगने वाले संसाधनों से जुड़ी चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं।
इसमें यह भी कहा गया है कि खरीफ की अंतिम पैदावार काफी हद तक पूरे मौसम के दौरान बारिश के वितरण और खेती के लिए जरूरी चीजों की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।
भाषा राजेश राजेश रमण
रमण
0406 2025 मुंबई