केरल के मुख्यमंत्री ने द्वितीय विश्वयुद्ध, भारत छोड़ो आंदोलन में कम्युनिस्टों की भूमिका पर सवाल उठाए
माधव
- 04 Jun 2026, 06:38 PM
- Updated: 06:38 PM
तिरुवनंतपुरम, चार जून (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने बृहस्पतिवार को कम्युनिस्टों पर निशाना साधते हुए उन पर ''स्वतंत्रता से पहले और बाद में भारत के हितों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया''।
सतीशन ने विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण के लिए धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत में कम्युनिस्टों ने तत्कालीन सोवियत संघ में जोसेफ स्टालिन द्वारा अपनाए गए रुख के अनुरूप कार्य किया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि कम्युनिस्टों ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की निंदा की थी। सतीशन ने दावा किया कि कम्युनिस्टों ने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान कांग्रेस नेताओं के ठिकानों का खुलासा किया था।
उन्होंने कहा कि राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन का यह कहना गलत था कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सोवियत संघ गुटनिरपेक्ष था और जर्मनी द्वारा उस पर हमला करने के बाद वह अंग्रेजों के साथ शामिल हो गया था।
सतीशन ने कहा कि 1939 में हिटलर-स्टालिन संधि हुई थी और जर्मनी द्वारा 1941 में सोवियत संघ पर हमला करने के बाद ही कम्युनिस्ट राष्ट्र ब्रिटिशों में शामिल हुआ था। उन्होंने कहा कि शुरुआत में भारत में कम्युनिस्टों ने स्टालिन का मार्ग अपनाया और एडॉल्फ हिटलर के पक्ष में निर्णय लिए।
मुख्यमंत्री ने कम्युनिस्टों पर कटाक्ष करते हुए कहा, ''जब जर्मनी ने सोवियत संघ पर हमला किया, तो स्टालिन ने अपना रुख बदल लिया और अंग्रेजों का साथ दिया और भारत में कम्युनिस्टों ने भी ऐसा ही किया। अगर मॉस्को में बारिश होती थी, तो भारत में कम्युनिस्ट छाता उठा लेते थे। उस समय उनका यही रुख था।''
विजयन ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि 1939 की संधि उस समय हुई थी जब सोवियत संघ नवगठित था और जर्मनी के हमले का सामना करने में सक्षम नहीं होता।
उन्होंने दावा किया, ''अस्थायी समझौते का इस्तेमाल सोवियत संघ को मजबूत करने के लिए किया गया था।''
इस दावे को खारिज करते हुए सतीशन ने कहा कि सोवियत संघ 1939 से बहुत पहले अस्तित्व में आया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि हिटलर और स्टालिन दोनों अपने-अपने देशों में एक जैसी कार्रवाइयों में लिप्त थे, "अपने विरोधियों की हत्या कर रहे थे"।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आजादी के तुरंत बाद, जब भारत अपने नागरिकों को भोजन, स्वास्थ्य और शिक्षा प्रदान करने के लिए संघर्ष कर रहा था, तब कम्युनिस्टों ने कलकत्ता थीसिस के माध्यम से देश को अस्थिर करने की कथित तौर पर कोशिश की। 'कलकत्ता थीसिस' नेहरू प्रशासन के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष का खुला आह्वान था।
उन्होंने कहा, ''यही कम्युनिस्ट विरासत है।''
सतीशन ने कहा कि कांग्रेस ने किसी के साथ विश्वासघात नहीं किया और वे कम्युनिस्ट ही थे जिन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान कांग्रेस नेताओं के ठिकानों का खुलासा किया था।
उन्होंने दावा किया, ''उन्होंने (कम्युनिस्टों ने) यह रुख इसलिए अपनाया क्योंकि उस समय स्टालिन हिटलर के साथ थे।''
भाषा देवेंद्र माधव
माधव
0406 1838 तिरुवनंतपुरम