एलडीएफ ने 5.07 लाख करोड़ रुपये की देनदारियां छोड़ी हैं, लोगों को 'गुमराह' किया : सतीशन
वैभव
- 04 Jun 2026, 03:17 PM
- Updated: 03:17 PM
तिरुवनंतपुरम, चार जून (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने बृहस्पतिवार को पूर्ववर्ती वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) की सरकार पर तीखा हमला करते हुए दावा किया कि वह केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (केआईआईएफबी) के कर्ज सहित कुल 5.07 लाख करोड़ रुपये की भारी देनदारियां छोड़कर गयी है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जनता को गुमराह करने के लिए यह कहानी ''गढ़ी'' गई कि सरकारी खजाने में लगभग 6,000 करोड़ रुपये शेष थे।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नीत एलडीएफ पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि यदि खजाने में इतनी राशि थी तो उसका उपयोग कुछ देनदारियों के भुगतान के लिए क्यों नहीं किया गया। इनमें 'सप्लाईको' के लगभग 2,000 करोड़ रुपये के बकाये और स्थानीय निकायों को धनराशि की तीसरी किस्त का भुगतान शामिल है।
उन्होंने कहा कि वाम सरकार के सत्ता छोड़ने के समय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ता (डीए) तथा महंगाई राहत (डीआर) के हजारों करोड़ रुपये के बकाये भी लंबित थे।
सतीशन ने कहा, ''यदि खजाने में धन उपलब्ध था तो उससे कुछ देनदारियां क्यों नहीं चुकाई गईं? इसके बजाय जनता को भ्रमित करने के लिए यह प्रचार किया गया कि खजाने में 6,000 करोड़ रुपये पड़े हैं। यही केरल की वित्तीय स्थिति है और इसमें बदलाव लाने की आवश्यकता है।''
केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संस्था ने करीब 56,000 करोड़ रुपये की देनदारी पैदा कर दी है, जिसका बोझ अब नयी सरकार पर आ गया है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहते हुए उन्होंने कई बार चेतावनी दी थी कि केआईआईएफबी द्वारा लिया गया कर्ज अंततः राज्य की उधारी सीमा में शामिल हो जाएगा और अब वही हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली एलडीएफ सरकारें दावा करती थीं कि केआईआईएफबी सरकार से स्वतंत्र रूप से काम करेगा, उसे सरकारी धन की जरूरत नहीं होगी और उसकी उधारी का राज्य की कर्ज लेने की सीमा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
उन्होंने विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कहा, ''लेकिन उपकर के रूप में एकत्र किए गए हजारों करोड़ रुपये केआईआईएफबी को दिए गए। उसने राज्य की संप्रभु गारंटी के आधार पर ऊंची ब्याज दरों पर भारी कर्ज लिया और अंततः उसका कर्ज केरल की उधारी सीमा में जोड़ दिया गया।''
उन्होंने कहा, ''इसके अलावा केआईआईएफबी स्वयं कोई राजस्व उत्पन्न नहीं करता। इसलिए उसकी सारी देनदारियां सरकार पर आ गईं और अब हमें उनका पूरा बोझ उठाना पड़ रहा है।''
मुख्यमंत्री ने ये आरोप विधानसभा में पेश किए गए श्वेत पत्र का हवाला देते हुए लगाए। श्वेत पत्र के अनुसार, केआईआईएफबी पर वर्तमान में लगभग 21,000 करोड़ रुपये का कर्ज है, जबकि करीब 35,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के लिए अभी और धन जुटाना बाकी है। इस प्रकार राज्य पर कुल लगभग 56,000 करोड़ रुपये की देनदारी बनती है।
सतीशन ने कहा कि केआईआईएफबी की स्थापना राज्य की उधारी सीमा से बाहर रहकर बुनियादी ढांचा विकास को तेज करने के लिए की गई थी, लेकिन समय के साथ यह वित्त विभाग के दायरे से बाहर संचालित होने वाली एक ''समानांतर सरकार'' बन गई।
उन्होंने कहा कि श्वेत पत्र पिछली एलडीएफ सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन का आईना है और इसे पेश करने से पहले तथ्यों की व्यापक पड़ताल की गयी है।
मुख्यमंत्री विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन के उस सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसमें उन्होंने पूछा था कि श्वेत पत्र पेश करने से पहले तथ्यों की जांच की गई थी या नहीं।
विजयन ने यह भी दावा किया कि राज्यपाल के अभिभाषण में राज्य की प्रगति के लिए कोई ठोस नीति नहीं है और पिछली सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न कल्याणकारी एवं विकास योजनाओं के भविष्य पर भी कोई स्पष्टता नहीं है।
इन आरोपों को खारिज करते हुए सतीशन ने कहा कि राज्य के कई सामाजिक संकेतक ठहराव की स्थिति में पहुंच गए हैं और विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक सुधारों की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, ''यह केरल के भविष्य से जुड़ी घोषणाओं वाला नीति अभिभाषण है। इसमें कुछ कमियां हो सकती हैं, जिनकी ओर विपक्ष ध्यान दिला सकता है और हम बजट में उन्हें दूर करने का प्रयास करेंगे।''
भाषा गोला वैभव
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0406 1517 तिरुवनंतपुरम