वेदांता ने पांच साल में घटाया 25 लाख टन कार्बन उत्सर्जन
मनीषा
- 04 Jun 2026, 11:05 AM
- Updated: 11:05 AM
नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) वेदांता समूह के लौह अयस्क खनन और इस्पात कारोबार ने पिछले पांच वर्षों में विभिन्न स्थिरता पहलों के माध्यम से लगभग 25 लाख टन कार्बन उत्सर्जन को कम या अवशोषित किया है।
कंपनी ने बृहस्पतिवार को बयान में कहा कि पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन, नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने तथा स्वच्छ औद्योगिक प्रक्रियाओं जैसे कदम उसके भारी उद्योग के कार्बन उत्सर्जन में कमी (डीकार्बोनाइजेशन) और राष्ट्रीय व वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप प्रयासों का हिस्सा हैं।
वेदांता आयरन एंड स्टील लिमिटेड ने 'विश्व पर्यावरण दिवस' पर कम-कार्बन भविष्य के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि पारंपरिक खनन व धातु कंपनी भी टिकाऊ प्रथाओं में अग्रणी बन सकती है।
कंपनी के कार्बन उत्सर्जन में कमी के प्रयासों में स्वच्छ प्रौद्योगिकी का उपयोग प्रमुख है। विद्युत चालित यात्री वाहन, पहिया लोडर व फोर्कलिफ्ट के इस्तेमाल से हर साल करीब 800 किलोलीटर डीजल की बचत हो रही है और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आई है।
सतत परिवहन व्यवस्था के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी के जलमार्ग पोत संचालन से लगभग 2.1 लाख ट्रक यात्राओं के बराबर परिवहन कम हुआ, जिससे 1.08 करोड़ लीटर डीजल की बचत हुई और करीब 28,900 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन घटा।
कंपनी ने गोवा के अमोना स्थित पिग आयरन संयंत्र और बोकारो इस्पात संयंत्र में अपशिष्ट ऊष्मा पुनर्प्राप्ति के जरिये कुल 100 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता विकसित की है जिससे 2.4 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से बचाव हुआ।
पर्यावरण संरक्षण के तहत गोवा की संक्वेलिम पुनर्वास खदान (100 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र) में 7.5 लाख पेड़ लगाए गए हैं, जो हर साल 16,000 टन कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करते हैं। तीन दशकों में यह क्षेत्र लगभग 4.8 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित कर चुका है।
इसके अलावा, अमोना (गोवा) और बोकारो (झारखंड) में घने वन (मियावाकी पद्धति) विकसित किए गए हैं, जहां 75,000 से अधिक पेड़ लगाए गए हैं। साथ ही नियमित वनीकरण अभियानों के तहत तीन लाख पेड़ लगाए गए हैं।
बोकारो स्थित 15 लाख टन क्षमता वाले एकीकृत इस्पात संयंत्र में कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के साथ साझेदारी में द्रवित पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के स्थान पर पाइप द्वारा आपूर्ति की जाने वाली प्राकृतिक गैस की ओर बढ़ रही है, जिससे सालाना लगभग 1,500 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी।
कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पंकज कुमार शर्मा ने कहा कि टिकाऊ भविष्य के लिए उद्योगों को ऊर्जा उपयोग, परिवहन व्यवस्था और पर्यावरण के साथ अपने संबंधों पर नए सिरे से विचार करना होगा।
भाषा निहारिका मनीषा
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