दिल्ली के मुकुंदपुर में एलपीजी विस्फोट में मकान ढहा, 11 लोग घायल
धीरज
- 03 Jun 2026, 12:05 AM
- Updated: 12:05 AM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, दो जून (भाषा) बाहरी उत्तर दिल्ली के मुकुंदपुर इलाके में मंगलवार सुबह एलपीजी विस्फोट के कारण एक मंजिला मकान ढह गया। हादसे के बाद मलबे में दबे 11 लोगों को बाहर निकाला गया जिनमें से एक महिला की हालत गंभीर है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि एक मंजिला इस इमारत में बर्तनों की रंगाई का काम होता था और अवैध रूप से सिलेंडरों में गैस भरी जाती थी।
उन्होंने बताया कि घटना मुकुंदपुर-दो के इशू विहार की गली नंबर एक में हुई।
पुलिस ने इस अवैध काम से कथित रूप से जुड़े दो व्यक्तियों को हिरासत में लिया है और घटनास्थल व पास की एक संपत्ति से एलपीजी के 84 खाली सिलेंडर बरामद करने के बाद भारतीय न्याय संहिता और आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों के तहत दो मामले दर्ज किए हैं।
घटना की सूचना मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पुलिस की एक टीम तुरंत मौके पर पहुंची।
आपातकालीन प्रतिक्रिया वाहन (ईआरवी) के कर्मचारियों और स्थानीय निवासियों की मदद से सभी घायलों को मलबे से बाहर निकाला गया और अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया।
बाहरी उत्तरी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) हरेश्वर स्वामी ने बताया कि एक महिला गंभीर रूप से झुलस गई है और उसे नाजुक हालत में सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया है।
डीसीपी ने कहा, ''मलबे से 11 लोगों को निकाल लिया गया है। एक महिला झुलस गई है और उसकी हालत गंभीर है। उसे सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया है।''
प्रारंभिक जांच से संकेत मिला है कि यह विस्फोट बड़े वाणिज्यिक सिलेंडर से छोटे सिलेंडर में एलपीजी भरने के दौरान हुआ।
डीसीपी ने कहा, ''शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस इमारत में बर्तन रंगने की फैक्टरी संचालित की जा रही थी। वहां कई गैस सिलेंडर पाए गए। बड़े सिलेंडर से छोटे सिलेंडर में गैस भरने की प्रक्रिया चल रही थी और विस्फोट के पीछे यही संभावित कारण प्रतीत होता है।''
पुलिस के अनुसार, परिसर से 38 खाली सिलेंडर बरामद किए गए। आगे की तलाशी में इलाके में ही पास के एक कमरे से 46 अन्य खाली सिलेंडर मिले जिनमें से 25 घरेलू और 21 वाणिज्यिक है।
पुलिस ने बताया कि परिसर का इस्तेमाल सुधीर राय द्वारा बर्तन कोटिंग के काम के लिए किया जा रहा था जबकि हरकेश बहादुर उर्फ बबलू कथित तौर पर वहां गैस सिलेंडर रखता था। दोनों को हिरासत में ले लिया गया है।
भालस्वा डेयरी थाने में भारतीय न्याय संहिता और आवश्यक वस्तु अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस ने बताया कि अतिरिक्त सिलेंडरों की बरामदगी के सिलसिले में एक और मामला दर्ज किया जा रहा है।
दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के अनुसार,सुबह 9:37 बजे फोन पर उसे विस्फोट और इमारत ढहने की सूचना मिली। इमारत के भूतल का इस्तेमाल कथित तौर पर वाणिज्यिक सिलेंडर से छोटे एलपीजी सिलेंडरों में गैस भरने के लिए किया जा रहा था, तभी यह विस्फोट हुआ और ढांचा गिर गया।
डीएफएस ने बताया कि 10 घायलों को बाबू जगजीवन राम मेमोरियल अस्पताल और डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर अस्पताल ले जाया गया, जबकि गंभीर रूप से झुलसी महिला को सफदरजंग अस्पताल स्थानांतरित कर दिया गया।
अपराध अन्वेषण टीम के कर्मी, फोरेंसिक विशेषज्ञ, दिल्ली अग्निशमन सेवा, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमें और एक श्वान दस्ते को मौके पर तैनात किया गया। प्रारंभिक निरीक्षण में मलबे के नीचे और लोगों के फंसे होने की आशंका नहीं है।
श्रमिकों और स्थानीय निवासियों ने बताया कि इस इमारत में छोटी निर्माण और पैकेजिंग इकाइयां चल रही थीं। उनके अनुसार, परिसर के एक हिस्से में बर्तनों को रंगा जाता था और भट्टी में पकाया जाता था, जबकि दूसरी इकाई चार्जर और पंखे के कलपुर्जों की पैकेजिंग में शामिल थी।
कई श्रमिकों ने दावा किया कि उन्होंने विस्फोट से कुछ समय पहले ही गैस लीक होने की गंध महसूस की थी।
एक पड़ोसी ने आरोप लगाया, ''वहां गैस की गंध आ रही थी। लोगों को पता था कि रिसाव हो रहा है लेकिन वे सिलेंडर की पहचान नहीं कर सके। जैसे ही महिला ने चाय बनाने के लिए गैस चूल्हा जलाया, वहां विस्फोट हो गया।''
अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर इस दावे की पुष्टि नहीं की है।
श्रमिकों ने बताया कि गंभीर रूप से घायल महिला हर सुबह काम शुरू होने से पहले मजदूरों के लिए चाय बनाती थी।
पटना के पास एक गांव के रहने वाले मुन्ना नामक श्रमिक ने दावा किया कि जिस भट्टी के पास रंगे हुए बर्तनों को पकाया जाता था, वहीं पास में ही गैस सिलेंडर भरे जा रहे थे। एक सिलेंडर से गैस लीक हो रही थी।
घायल श्रमिकों में से एक के दोस्त संजीव ने बताया कि वह महज कुछ मिनटों के अंतर से मौत के मुंह से बच निकला।
उन्होंने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, ''मैं एक मंदिर से वापस आया था और बहुत थका हुआ था। मैंने एक कालीन बिछाया और सोचा कि कुछ मिनट आराम कर लूं। फिर मैं पानी पीने के लिए बाहर निकला। कुछ ही पलों बाद, मैंने एक जोरदार धमाका सुना और पूरी इमारत ढह गई।''
उन्होंने कहा, ''अगर मैं पानी पीने बाहर नहीं जाता, तो मैं भी मर जाता।''
संजीव के अनुसार, विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि शटर बाहर की ओर उड़ गए और कुछ ही सेकंड में इमारत मलबे में तब्दील हो गई।
एक अन्य घायल श्रमिक, मुकेश के हाथ और पैर गंभीर रूप से झुलस गए और विस्फोट के दौरान दरवाजे का एक हिस्सा कथित तौर पर लगने से उसके जबड़े में चोटें आईं।
एक प्रत्यक्षदर्शी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि जैसे ही उसने विस्फोट जैसी जोरदार आवाज सुनी, उसे संदेह हुआ कि कोई गैस सिलेंडर फटा है।
उसने कहा, ''हम तुरंत मौके की ओर भागे और पाया कि एक मकान ढह गया है।''
उसने कहा कि वहां हर तरफ धूल का गुबार था और लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे। कुछ लोगों ने अपने फोन पर वीडियो रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया।
यह घटना साकेत मेट्रो स्टेशन के पास 30 मई को एक बहुमंजिला वाणिज्यिक इमारत के ढह जाने से छह लोगों की मौत और आठ अन्य के घायल होने के कुछ दिनों बाद हुई है।
भाषा नोमान तान्या धीरज
धीरज
0306 0005 दिल्ली