क्रॉपलाइफ इंडिया की सरकार से कीटनाशकों पर जल्दबाजी में रोक न लगाने की अपील
अजय
- 26 May 2026, 07:00 PM
- Updated: 07:00 PM
नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) फसल सुरक्षा उद्योग की संस्था क्रॉपलाइफ इंडिया ने मंगलवार को सरकार से आग्रह किया कि वह पैराक्वाट डाइक्लोराइड और कार्बोसल्फान जैसे कीटनाशकों पर जल्दबाजी में प्रतिबंध न लगाए, क्योंकि यह किसानों की आत्महत्याओं को रोकने में मददगार साबित नहीं हो सकता है।
एक बयान में क्रॉपलाइफ इंडिया ने तर्क दिया कि किसानों की आत्महत्याओं का मुख्य कारण आर्थिक संकट है, न कि कृषि रसायनों तक उनकी पहुंच।
यह अपील तेलंगाना सरकार के उस कदम के बाद आई है, जिसमें जहर से होने वाली मौतों की चिंताओं के चलते इन दोनों उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया गया था।
क्रॉपलाइफ इंडिया ने बयान में कहा, ''प्रतिबंध लगाने से साधन तो छिन जाता है, लेकिन मूल समस्या खत्म नहीं होती।''
संस्था ने चेतावनी दी कि व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले कृषि-सामग्री पर रोक लगाने से किसानों पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।
संस्था ने 'इंडियन जर्नल ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन' में 2024 में प्रकाशित एक अध्ययन का हवाला दिया, जिसमें तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में किसानों की आत्महत्याओं का मुख्य कारण 'कर्ज' को बताया गया था। साथ ही, संस्था ने ऐसे शोध का भी जिक्र किया, जो आत्महत्या की दर को कीटनाशकों की उपलब्धता के बजाय 'कम बारिश' से जोड़ते हैं।
संस्था ने फसल के बीच में किसी भी उत्पाद पर प्रतिबंध लगाने से होने वाले आर्थिक नुकसान पर भी प्रकाश डाला। संस्था ने बताया कि खरपतवारों के कारण हर साल फसल उत्पादन में लगभग 92,000 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान होता है।
पैराक्वाट की कीमत लगभग 300-350 रुपये प्रति एकड़ है, और इसका इस्तेमाल चाय, कपास, आलू तथा अन्य फसलों की लगभग 80 लाख एकड़ जमीन पर किया जाता है। कार्बोसल्फान धान की फसल में लगने वाले 'गॉल मिज' कीट को नियंत्रित करने वाले कुछ प्रभावी उपायों में से एक है, और इसका इस्तेमाल लगभग 32 लाख एकड़ जमीन पर किया जाता है।
क्रॉपलाईफ इंडिया के चेयरमैन अंकुर अग्रवाल ने कहा, ''मुख्य मसला यह है कि किसी उत्पाद पर रातों-रात प्रतिबंध लगा देने से किसानों का संकट खत्म नहीं हो जाता। कर्ज, फसल का बर्बाद होना और भविष्य को लेकर मन में बैठा डर—ये सभी चीजें जस की तस बनी रहती हैं।'' उन्होंने कहा, ''अगर हमारा मकसद लोगों की जान बचाना है, तो हमें उस समस्या की जड़ तक पहुंचकर उसका समाधान करना होगा।''
उद्योग निकाय ने सरकार से आग्रह किया कि वह किसानों की जरूरतों पर गंभीरता से विचार करे—विशेष रूप से ऐसे समय में, जब खरीफ की बुवाई का मौसम शुरू होने वाला है और किसानों ने पूरे साल के लिए अपनी कृषि सामग्री की योजना बनाकर उन्हें खरीदने का मन बना लिया है।
क्रॉपलाईफ इंडिया—जो भारत के फसल सुरक्षा बाजार में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली 17 कंपनियों का प्रतिनिधित्व करती है—ने कहा कि वह सरकार द्वारा एक विशेषज्ञ समिति गठित करने के फैसले का स्वागत करती है और उसने इस समीक्षा प्रक्रिया में अपना जमीनी स्तर के आंकड़े उपलब्ध कराने की पेशकश भी की है।
भाषा राजेश राजेश अजय
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