दिल्ली जिमखाना मामला: उच्च न्यायालय ने कहा, फिलहाल किसी अंतरिम आदेश की आवश्यकता नहीं
दिलीप
- 26 May 2026, 08:20 PM
- Updated: 08:20 PM
नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्यों को राहत देते हुए, दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र की इस दलील पर गौर किया कि वह 5 जून तक औपनिवेशिक काल के क्लब पर जबरन कब्जा नहीं करेगा। अदालत ने कहा कि फिलहाल किसी अंतरिम आदेश की आवश्यकता नहीं है।
न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन ने भी केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली के बीचोंबीच स्थित क्लब की 27.3 एकड़ जमीन के स्थायी पट्टे को समाप्त करने के निर्णय में फिलहाल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और मामले की सुनवाई जुलाई के अंतिम सप्ताह के लिए निर्धारित कर दी।
केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि बेदखली की कार्यवाही केवल कानून के अनुसार और उचित नोटिस देने के बाद ही शुरू की जाएगी।
उन्होंने दलील दी, ''हमने पट्टेदार को 5 जून तक स्वेच्छा से जमीन खाली करने का विकल्प दिया है। मीडिया में बनाई जा रही इस धारणा के विपरीत, ऐसा नहीं है कि पुलिस मौके पर पहुंचकर जबरन कब्जा कर लेगी। कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही कब्जा लिया जाएगा।''
मेहता ने कहा कि इस मामले में मुआवजा या तो नकद में दिया जा सकता है या सरकार वैकल्पिक जमीन उपलब्ध करा सकती है।
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन भूमि एवं विकास कार्यालय (एल एंड डीओ) द्वारा 22 मई को जारी एक आदेश में क्लब को ''रक्षा अवसंरचना को सुदृढ़ और सुरक्षित करने'' के आधार पर 5 जून तक अपनी भूमि वापस करने को कहा गया।
मंगलवार को अदालत ने कहा कि इस समय, ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है जिससे यह संकेत मिले कि अधिकारियों ने बेदखली के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू की है और इसलिए जिमखाना क्लब के सदस्यों और कर्मचारियों द्वारा दायर मुकदमों पर किसी अंतरिम आदेश की आवश्यकता नहीं है।
न्यायमूर्ति झिंगन ने कहा, ''बेदखली का मुद्दा अभी समय से पहले और अनुमान पर आधारित है। यदि आवश्यकता पड़ी, तो वादी कानून के अनुसार अपने कानूनी उपायों का सहारा ले सकते हैं।''
उन्होंने कहा, ''जारी किए गए समन और सॉलिसिटर जनरल द्वारा दिए गए बयान को ध्यान में रखते हुए, आगे किसी अंतरिम निर्देश की आवश्यकता नहीं है... यदि बेदखली की जाती है, तो वह पूर्व सूचना के साथ कानून के अनुसार होगी।''
अदालत ने जिमखाना क्लब के सदस्यों, कर्मचारियों और पिछली निर्वाचित शासी निकाय द्वारा दायर मुकदमों के संबंध में केंद्र और क्लब के प्रबंधन को भी समन जारी किया और प्रतिवादियों से आठ सप्ताह के भीतर लिखित बयान मांगे।
इससे याचिकाकर्ताओं की यह आशंका दूर हो गई कि क्लब का शासी निकाय, जिसमें केंद्र सरकार के नामित सदस्य शामिल हैं, अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर सकता है और इसलिए कब्जा दे सकता है।
न्यायाधीश ने कहा कि यह आशंका सॉलिसिटर जनरल के इस दावे के विपरीत प्रतीत होती है कि शासी निकाय ने अपनी शिकायतें उठाने के लिए पहले ही अधिकारियों को पत्र लिख दिया है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वादी द्वारा मुकदमे दायर करने के अधिकार और पट्टा समझौते को समाप्त करने के लिए पूर्व सूचना देने की आवश्यकता जैसे मुद्दों पर उपयुक्त समय पर विचार किया जाएगा।
जिमखाना क्लब के सदस्यों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने अदालत से अनुरोध किया कि वह अधिकारियों को इस मामले में आगे कोई भी कार्रवाई करने से रोकने का आदेश पारित करे।
सिंघवी ने दलील दी कि चूंकि क्लब का संचालन वर्तमान में केंद्र सरकार के नामित व्यक्तियों द्वारा किया जा रहा है, इसलिए सदस्यों को राहत के लिए उच्च न्यायालय का रुख करना पड़ा।
क्लब के पिछली निर्वाचित निकाय की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि यह अनधिकृत कब्जे का मामला नहीं है। उन्होंने दलील दी कि सरकार द्वारा परिसर में पुनः प्रवेश करने के बाद बेदखली का कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया जा सकता।
जिमखाना क्लब के सदस्य और याचिकाकर्ताओं में से एक विजय खुराना ने अपनी याचिका में कहा कि केंद्र द्वारा रक्षा अवसंरचना और सुरक्षा के संबंध में दिए गए ''अस्पष्ट और सामान्यीकृत कारण'' महज "दिखावा" हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करने के बजाय ''जबरन बेदखली कराने का प्रयास'' है।
बताया जा रहा है कि दिल्ली जिमखाना क्लब के 500 से अधिक अन्य सदस्यों ने भी उनके इस मुकदमे का समर्थन किया है।
याचिका में केंद्र सरकार को जिमखाना क्लब के स्थायी पट्टे के अधिकारों को "अवैध रूप से निर्धारित" करने से रोकने और 2, सफदरजंग रोड स्थित ऐतिहासिक परिसर से किसी भी प्रकार की जबरन बेदखली को रोकने का अनुरोध किया गया है।
भाषा सुभाष दिलीप
दिलीप
2605 2020 दिल्ली